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सांपला में भी लगाया भूकंप सूचक यंत्र, भविष्य में और भी बढ़ाने की योजना

Tue, 30 Jun 2020 12:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2020 12:24 AM IST
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Earthquake indicator device installed in Sampla, plans to increase in future
रोहतक में बार-बार आ रहे भूकंपों पर राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र लगातार नजर बनाए हुए है। इस पर अध्ययन करने के लिए सोमवार को सांपला में एक और भूकंप सूचक यंत्र लगाया गया। इससे पहले करौंथा गांव में और लघु सचिवालय में भी एक-एक भूकंप सूचक यंत्र लगाया गया था। आपदा प्रबंधन के जिला समन्वयक सौरभ धीमान ने बताया कि लघु सचिवालय में लगा यंत्र तकनीकी खामी के कारण बदलकर कहीं दूसरे गांव में शिफ्ट किया जाएगा। उसका जीपीएस काम नहीं कर रहा है।
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वहीं, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीनस्थ राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जेएल गौतम ने कहा कि भूकंप आने का कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता, भूकंप आने के बाद ही उस पर अध्ययन होता है। रोहतक में आ रहे भूकंपों पर भी अध्ययन जारी है। इसके लिए रोहतक क्षेत्र में भूकंप सूचक यंत्रों की भी संख्या बढ़ाई जा रही है। इन दिनाें तीन दिल्ली के आसपास और तीन रोहतक के आसपास भूकंप सूचक यंत्र लगाए गए है। सोमवार को सांपला में एक यंत्र लगाया गया है, भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाने की योजना है।
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डॉ. जेएल गौतम ने बताया कि धरती सात बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों पर टीकी हुई है। इतनी बड़ी-बड़ी प्लेटों में कई जगह फॉल्ट लाइन (जमीन के अंदर की दरारें) या फिर रिज (जमीन के अंदर उभरा हुआ क्षेत्र) होती है। जब बड़ी प्लेट हिलती है तो उसमें मौजूद रिज व फॉल्ट लाइन में भी हलचल हो सकती है। भारत इंडो-आस्ट्रेलियन प्लेट पर टीका है। युरेशियन टेक्टोनिक प्लेट के इंडो-आस्ट्रेलियन प्लेट के साथ टकराव होने से हिमालय क्षेत्र प्रभावित होने के साथ-साथ इन प्लेटों में मौजूद दरारें भी प्रभावित होती है। इन प्लेटों की हलचल से ही रोहतक के पास से गुजर रही महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन (जमीन के अंदर की दरारें) सक्रिय हुई है। इसी कारण इन दिनों रोहतक में भूकंप आए हैं। 2003-2004 के आसपास जींद में ऐसे ही भूकंप आए थे। उन दिनों दिल्ली सरगोधा रिज पर हलचल होती थी। इन हलचलों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि कोई बड़ा भूकंप आएगा या नहीं आएगा। क्या पता अब कई वर्ष तक कोई भूकंप ही न आए। दुनिया में भूकंप आने का अनुमान कोई नहीं लगा सकता।
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इस क्षेत्र में भूकंप की गहराई रहती है कम
दिल्ली एनसीआर में भूकंपों की गहराई हिमालय क्षेत्र में आ रहे भूकंपों के मुकाबले बहुत कम होती है। इस कारण इन क्षेत्रों में कम तीव्रता के भूकंप भी महसूस हो जाती हैं। पिछले दिनों आए भूकंप में हलचल जमीन के मात्र 5 किलोमीटर नीचे हुई थी, जिस कारण 2.4 तीव्रता का भूकंप भी अधिक लोगों को महसूस हुआ था।
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