{"_id":"5f7b6a798ebc3e9b897903ba","slug":"dr-shobti-sharma-gold-medal-award-to-dr-deepti-dahiya-rohtakcity-news-rtk5768679164","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉ. दीप्ति दहिया को डॉ. शोभा शर्मा गोल्ड मेडल अवॉर्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉ. दीप्ति दहिया को डॉ. शोभा शर्मा गोल्ड मेडल अवॉर्ड
विज्ञापन
डॉ. दीप्ति दहिया।
- फोटो : RohtakCity
रोहतक। जच्चा के सिजेरियन प्रसव को आसान बनाने में पटवर्धन तकनीक सबसे बेहतर है। जबकि स्त्री रोग विशेषज्ञ रिवर्स ब्रीच एक्सट्रेक्शन, पुश तकनीक भी जच्चा की स्थिति के अनुसार अपनाती हैं। पीजीआईएमएस में 105 जच्चा पर किए गए शोध में सामने आया कि 67 जच्चा को पटवर्धन तकनीक में कोई समस्या नहीं आई। इस रिसर्च को पीजीआईएमएस की सहायक प्रोफेसर डॉक्टर दीप्ति दहिया ने रायपुर में तीन अक्तूबर को आयोजित ओबस एंड गायनी सोसाइटी की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में रखा और उन्हें बेस्ट पेपर अवॉर्ड मिला और उन्हें डॉ. शोभा शर्मा गोल्ड मेडल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
डॉ. दीप्ति दहिया ने बताया कि सामान्य डिलिवरी न होने पर सिजेरियन डिलिवरी कराने की तीन तकनीक होती हैं। तीनों तकनीकों का 105 जच्चा पर प्रयोग किया गया। इसमें देखा गया कि किस तकनीक का अधिक लाभ जच्चा-बच्चा को प्रसव के दौरान मिलता है। तीनों पर पटवर्धन तकनीक का बेहतर परिणाम रहा। इसमें पहले कंधा, फिर पैर व बाद में सिर बाहर निकाला जाता है। स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिति नंदा ने बताया कि अक्सर देखने में आता है की गर्भवती महिला को प्रसव के समय नॉर्मल डिलिवरी करवाने की कोशिश होती है, इसके बावजूद सिजेरियन करना पड़ता है। ऐसे में मां व बच्चे को अधिक परेशानी ना हो तो उसके लिए बेहतरीन तरीके का चुनाव किया जाता है। वहीं डॉक्टर दीप्ति ने बताया कि कांफ्रेंस में रिलेशंस ऑफ मेथड ऑफ हेड डिलिवरी इन डिपली इंपैक्टेड इन सेकेंड स्टेज सिजेरियन टू मैटरनल फीटल आउटकम विषय पर पेपर प्रस्तुत किया गया था। अपने अनुभव साझा करते हुए डॉ. दीप्ति बताती हैं कि जब चिकित्सक कई बार नॉर्मल डिलिवरी करवाने में असमर्थ हो जाता है तो सिजेरियन अंतिम विकल्प बचता है। ऐसे में बच्चा नीचे की तरफ होता है और बच्चे को सुरक्षित निकालने के लिए चिकित्सक तीन तरीके अपनाते हैं। उनकी रिसर्च को कांफ्रेंस में प्रथम स्थान देते हुए उन्हें डॉ: शोभा शर्मा गोल्ड मेडल अवॉर्ड से नवाजा गया।
डॉ. दीप्ति ने बताया कि डॉक्टर वाणी मल्होत्रा ने उनको इस कांफ्रेंस में पेपर प्रस्तुत करने के लिए काफी हौसला दिया, इसके चलते आज उन्हें अवार्ड मिला है। वह विभागाध्यक्ष डॉक्टर समिति नंदा, डॉ. सविता सिंगल, डॉ. पुष्पा दहिया, डॉ. अंजली गुप्ता, डॉ. निशा मलिक की आभारी है जिनके सहयोग से उन्होंने यह रिसर्च की।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. दीप्ति दहिया ने बताया कि सामान्य डिलिवरी न होने पर सिजेरियन डिलिवरी कराने की तीन तकनीक होती हैं। तीनों तकनीकों का 105 जच्चा पर प्रयोग किया गया। इसमें देखा गया कि किस तकनीक का अधिक लाभ जच्चा-बच्चा को प्रसव के दौरान मिलता है। तीनों पर पटवर्धन तकनीक का बेहतर परिणाम रहा। इसमें पहले कंधा, फिर पैर व बाद में सिर बाहर निकाला जाता है। स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिति नंदा ने बताया कि अक्सर देखने में आता है की गर्भवती महिला को प्रसव के समय नॉर्मल डिलिवरी करवाने की कोशिश होती है, इसके बावजूद सिजेरियन करना पड़ता है। ऐसे में मां व बच्चे को अधिक परेशानी ना हो तो उसके लिए बेहतरीन तरीके का चुनाव किया जाता है। वहीं डॉक्टर दीप्ति ने बताया कि कांफ्रेंस में रिलेशंस ऑफ मेथड ऑफ हेड डिलिवरी इन डिपली इंपैक्टेड इन सेकेंड स्टेज सिजेरियन टू मैटरनल फीटल आउटकम विषय पर पेपर प्रस्तुत किया गया था। अपने अनुभव साझा करते हुए डॉ. दीप्ति बताती हैं कि जब चिकित्सक कई बार नॉर्मल डिलिवरी करवाने में असमर्थ हो जाता है तो सिजेरियन अंतिम विकल्प बचता है। ऐसे में बच्चा नीचे की तरफ होता है और बच्चे को सुरक्षित निकालने के लिए चिकित्सक तीन तरीके अपनाते हैं। उनकी रिसर्च को कांफ्रेंस में प्रथम स्थान देते हुए उन्हें डॉ: शोभा शर्मा गोल्ड मेडल अवॉर्ड से नवाजा गया।
विज्ञापन
डॉ. दीप्ति ने बताया कि डॉक्टर वाणी मल्होत्रा ने उनको इस कांफ्रेंस में पेपर प्रस्तुत करने के लिए काफी हौसला दिया, इसके चलते आज उन्हें अवार्ड मिला है। वह विभागाध्यक्ष डॉक्टर समिति नंदा, डॉ. सविता सिंगल, डॉ. पुष्पा दहिया, डॉ. अंजली गुप्ता, डॉ. निशा मलिक की आभारी है जिनके सहयोग से उन्होंने यह रिसर्च की।
विज्ञापन