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ट्रेजडी किंग के लिए कम नहीं हो रही चंडीगढ़ की दूरी

Fri, 16 Aug 2019 11:54 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 16 Aug 2019 11:54 PM IST
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distance of chandigarh not working tragedy king
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प्रदेश की सियासत में ट्रेजरी किंग के नाम से पहचाने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र डूमरखां का भाजपा में पांच साल का सफर पूरा हो गया है। भाजपा ने उनको केंद्र में मंत्री पद दिया। साथ ही बेटे ब्रजेंद्र को संसद में पहुंचाया, लेकिन उनके सीएम बनने की इच्छा भाजपा भी पूरी नहीं कर सकी और न ही अगले पांच साल में पूरी होने की संभावना लग रही है। सियासी नजरिए से कहें तो चंडीगढ़ तक उनका सफर आज भी उतनी ही दूर है, जिनका कांग्रेस में रहते हुए था। क्योंकि शुक्रवार की जींद रैली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बीरेंद्र सिंह की रैली में 29 मिनट के संबोधित में सीएम मनोहर लाल की न केवल पीठ थपथपाते रहे, बल्कि साफ कह दिया कि अबकी बार फिर प्रदेश की जनता सीएम मनोहर लाल को अगले पांच साल के लिए आशीर्वाद देगी।
किसान व गरीबों के मसीहा रहे सर छोटूराम के नाती बीरेंद्र सिंह देश व प्रदेश की राजनीति से दशकों से जुड़े हैं। 1966 के बाद जब प्रदेश की राजनीति पहले सीएम भगवत दयाल और राव विरेंद्र सिंह के हाथ से निकल कर तीन दशक तक राजनीति के तीन लाल बंसीलाल, देवीलाल व भजनलाल के हाथ में आ गई, तब बीरेंद्र सिंह अपना अलग मुकाम बनाए हुए थे। उनकी पहुंच कांग्रेस के अंदर पूर्व पीएम राजीव गांधी तक थी। कहते हैं कि अगर राजीव गांधी की असमय मृत्यु नहीं होती तो 1991 में भजनलाल की जगह बीरेंद्र सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। इतना ही नहीं, जब 2005 में भजनलाल का दौर खत्म हुआ तो बीरेंद्र सिंह ने सीएम पद का दावेदार होने के बावजूद भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नाम की सिफारिश करनी पड़ी। 10 साल हुड्डा कांग्रेस राज में सीएम रहे। 2014 में हालात भांप कर बीरेंद्र सिंह कांग्रेस से दशकों पुराना नाता तोड़कर भाजपा में आ गए। उस समय कयास लगाए जा रहे थे कि बीरेंद्र सिंह की सीएम बनने की हसरत भाजपा में रहकर पूरी हो सकती है, लेकिन राजनीति के नए खिलाड़ी मनोहर लाल ने संगठन के बाद राजनीति में अहम छाप छोड़ी है। पांच साल में कार्यकाल के पहले दो साल 2016 तक सीएम मनोहर लाल पार्टी के अंदर और बाहरी मोर्चों पर दो-चार होते रहे, लेकिन पहले मेयर, फिर जींद उप चुनाव, इसके बाद लोकसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत ने उनको सियासत का बड़ा खिलाड़ी बना दिया। न केवल उनके नेतृत्व को समय-समय पर पार्टी के अंदर चुनौती देने वाली आवाज दबकर रह गई, बल्कि इनेलो की टूट और कांग्रेस की फूट के बीच बाहरी मोर्चों पर भी खास चुनौती नहीं मिल सकी। जींद की आस्था रैली का आयोजन चाहे पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने किया, लेकिन अमित शाह अपने संबोधन में बार-बार सीएम मनोहर लाल की पीठ थपथापते नजर आए।
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म्हारे लाल ने करके दिखाया, कैसे चलती है बिना भ्रष्टाचार, दबंगई और जातिवाद के सरकार
अमित शाह ने अपने 29 मिनट के संबोधन में बार-बाद प्रदेश की मनोहर सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वे मनोहर लाल को साधुवाद देने आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नौकरियों में भ्रष्टाचार था, उसे समाप्त किया गया। नौकरी एक व्यवसाय बन गई थी। यहां तबादलों के नाम पर पूरा उद्योग चलता था। शाह ने कहा कि सरकार बनने के बाद जब वे हरियाणा आए तो यहां के नेताओं ने उन्हें घेर लिया और कहा कि उनके कहने से तबादले नहीं हो रहे हैं। इस पर उन्होंने मनोहर लाल से कहा कि सिर्फ जरूरतमंद का ही तबादला करें। शाह के अनुसार प्रदेश की सरकार ने बिना भ्रष्टाचार 50 हजार युवाओं को उनके घर पर ज्वाइनिंग लेटर भेजे हैं। अभी तक गुजरात भी केरोसिन मुक्त नहीं हो पाया है, लेकिन मनोहर लाल ने इसे कर दिखाया है।
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