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एमडीयू में नियमों की उड़ी धज्जियां, फिर भी नहीं मिली डिस्टेंस की मान्यता
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 30 Aug 2015 02:42 AM IST
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एमडीयू में डिस्टेंस एजुकेशन की मान्यता को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। मान्यता के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नियमों की धज्जियां उड़ा दीं, हर वह दांव खेला जो मान्यता दिला सकता था, लेकिन यूजीसी के एक पत्र ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
पत्र में चेताया गया है कि प्रतिनियुक्ति पर रखे गए शिक्षकों के भरोसे मान्यता नहीं दी जा सकती। मान्यता चाहिए तो नियमित शिक्षकों ही भर्ती करने होंगे। एमडीयू के डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर की मान्यता को लेकर विवाद चला आ रहा है। यूजीसी की तरफ से इस बार सख्त गाइडलाइन जारी की गई है कि नियमित शिक्षक वाले सेंटर को ही डिस्टेंस की मान्यता दी जाएगी। एमडीयू में नियमित शिक्षक नहीं होने के कारण इस सत्र के लिए यूजीसी मान्यता नहीं दे रही है।
कुछ ऐसे खेले गए खेल
एमडीयू के डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर में नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए सरकार से अनुमति नहीं मिल रही। इस कारण एमडीयू प्रशासन के पसीने छूटे हुए हैं, क्योंकि डिस्टेंस सेंटर एमडीयू के लिए सोने के अंडे देने वाली मुर्गी जैसा है। इसीलिए एमडीयू प्रशासन इसकी मान्यता लेने के लिए हर कोशिश कर रहा है। कुछ दिन पूर्व डीडीई के विभिन्न विषयों के लिए सृजित 12 पदों पर प्रतिनियुक्ति पर शिक्षक तैनात किए गए थे। इन शिक्षकों की तैनाती को लेकर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। यहां तक कि बीएड कोर्स कराने वाले शिक्षकों को हिस्ट्री और पॉलिटिकल साइंस आदि पढ़ाने की जिम्मेदारी दे दी गई।
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यूजीसी ने कुछ ऐसा भेजा पत्र
शिक्षकों की तैनाती समेत समस्त प्रक्रिया पूरी करने के बाद यूनिवर्सिटी की तरफ से यूजीसी को फाइल सबमिट की गई। यूजीसी ने इस पर मंथन किया और अब फिर से यूनिवर्सिटी को एक पत्र जारी किया है। सूत्रों की मानें तो इस पत्र में यूजीसी ने तर्क दिया है कि प्रतिनियुक्ति पर रखे गए शिक्षकों के भरोसे मान्यता नहीं दी जाएगी। पहले नियमित शिक्षक भर्ती करो, इसके बाद ही मान्यता मिलेगी। इस पत्र के बाद से ही यूनिवर्सिटी प्रशासन में एक बार फिर से खलबली मच गई है।
यूजीसी ने मान्यता के लिए मना नहीं किया है। यूजीसी के नियमानुसार सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई हैं। संभावना है कि जल्द ही डिस्टेंस की मान्यता मिल जाएगी।
- प्रो. नसीब सिंह गिल, निदेशक डीडीई।
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पत्र में चेताया गया है कि प्रतिनियुक्ति पर रखे गए शिक्षकों के भरोसे मान्यता नहीं दी जा सकती। मान्यता चाहिए तो नियमित शिक्षकों ही भर्ती करने होंगे। एमडीयू के डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर की मान्यता को लेकर विवाद चला आ रहा है। यूजीसी की तरफ से इस बार सख्त गाइडलाइन जारी की गई है कि नियमित शिक्षक वाले सेंटर को ही डिस्टेंस की मान्यता दी जाएगी। एमडीयू में नियमित शिक्षक नहीं होने के कारण इस सत्र के लिए यूजीसी मान्यता नहीं दे रही है।
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कुछ ऐसे खेले गए खेल
एमडीयू के डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर में नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए सरकार से अनुमति नहीं मिल रही। इस कारण एमडीयू प्रशासन के पसीने छूटे हुए हैं, क्योंकि डिस्टेंस सेंटर एमडीयू के लिए सोने के अंडे देने वाली मुर्गी जैसा है। इसीलिए एमडीयू प्रशासन इसकी मान्यता लेने के लिए हर कोशिश कर रहा है। कुछ दिन पूर्व डीडीई के विभिन्न विषयों के लिए सृजित 12 पदों पर प्रतिनियुक्ति पर शिक्षक तैनात किए गए थे। इन शिक्षकों की तैनाती को लेकर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। यहां तक कि बीएड कोर्स कराने वाले शिक्षकों को हिस्ट्री और पॉलिटिकल साइंस आदि पढ़ाने की जिम्मेदारी दे दी गई।
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यूजीसी ने कुछ ऐसा भेजा पत्र
शिक्षकों की तैनाती समेत समस्त प्रक्रिया पूरी करने के बाद यूनिवर्सिटी की तरफ से यूजीसी को फाइल सबमिट की गई। यूजीसी ने इस पर मंथन किया और अब फिर से यूनिवर्सिटी को एक पत्र जारी किया है। सूत्रों की मानें तो इस पत्र में यूजीसी ने तर्क दिया है कि प्रतिनियुक्ति पर रखे गए शिक्षकों के भरोसे मान्यता नहीं दी जाएगी। पहले नियमित शिक्षक भर्ती करो, इसके बाद ही मान्यता मिलेगी। इस पत्र के बाद से ही यूनिवर्सिटी प्रशासन में एक बार फिर से खलबली मच गई है।
यूजीसी ने मान्यता के लिए मना नहीं किया है। यूजीसी के नियमानुसार सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई हैं। संभावना है कि जल्द ही डिस्टेंस की मान्यता मिल जाएगी।
- प्रो. नसीब सिंह गिल, निदेशक डीडीई।