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Rohtak News: वराह अवतार प्रसंग से श्रद्धालु हुए भावविभोर
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04जेएनडी22: पंडाल में कथा श्रवण करती महिलाएं। संवाद।
नरवाना। बाबा गैबी साहब मंदिर परिसर में वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा व ज्ञान यज्ञ के दौरान बुधवार को कथा के तीसरे दिन भजन-कीर्तन में श्रद्धालु झूमते नजर आए। कथावाचक धर्मपाल शास्त्री नाभा ने भगवान श्रीहरि विष्णु के वराह अवतार का प्रेरक प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को धर्म और कर्तव्य का संदेश दिया।
कथा के दौरान कथावाचक ने बताया कि जब हिरण्याक्ष नामक असुर ने पृथ्वी को उठाकर समुद्र में डुबो दिया था तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण किया। वराह रूप में भगवान ने समुद्र की गहराइयों में जाकर पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाया और असुर का वध कर धर्म की पुनः स्थापना की।
उन्होंने कहा कि वराह अवतार केवल पौराणिक कथा नहीं बल्कि यह संदेश देता है कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है। तब-तब ईश्वर किसी न किसी रूप में अवतरित होकर सत्य और न्याय की रक्षा करते हैं।
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कथावाचक ने वराह अवतार को प्रकृति संरक्षण का प्रतीक बताते हुए कहा कि भगवान की ओर से पृथ्वी की रक्षा करना मानव को यह सीख देता है कि उसे धरती, जल और पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए। इस अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में नगर परिषद चेयरपर्सन मुकेश रानी मिर्धा व प्रतिनिधि विशाल मिर्धा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में तरसेम शर्मा, रमेश मोर, सुभाष चहल, पार्षद आशुतोष शर्मा, सुरेश मोर, काकू शर्मा, गंगा सिंह मोर, तिलक सचदेवा, अचल मित्तल मौजूद रहे।
चौथे दिन दिखाया जाएगा भगवान श्रीकृष्ण का जन्म
श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वीरवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य प्रसंग दिखाया जाएगा। कथावाचक धर्मपाल नाभा की ओर से कंस के अत्याचार, देवकी-वसुदेव की कारागार लीला और मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के अवतरण का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। विशेष झांकियां और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा जिससे श्रद्धालु कृष्ण जन्म की दिव्य अनुभूति प्राप्त करेंगे।
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कथा के दौरान कथावाचक ने बताया कि जब हिरण्याक्ष नामक असुर ने पृथ्वी को उठाकर समुद्र में डुबो दिया था तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण किया। वराह रूप में भगवान ने समुद्र की गहराइयों में जाकर पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाया और असुर का वध कर धर्म की पुनः स्थापना की।
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उन्होंने कहा कि वराह अवतार केवल पौराणिक कथा नहीं बल्कि यह संदेश देता है कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है। तब-तब ईश्वर किसी न किसी रूप में अवतरित होकर सत्य और न्याय की रक्षा करते हैं।
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कथावाचक ने वराह अवतार को प्रकृति संरक्षण का प्रतीक बताते हुए कहा कि भगवान की ओर से पृथ्वी की रक्षा करना मानव को यह सीख देता है कि उसे धरती, जल और पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए। इस अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में नगर परिषद चेयरपर्सन मुकेश रानी मिर्धा व प्रतिनिधि विशाल मिर्धा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में तरसेम शर्मा, रमेश मोर, सुभाष चहल, पार्षद आशुतोष शर्मा, सुरेश मोर, काकू शर्मा, गंगा सिंह मोर, तिलक सचदेवा, अचल मित्तल मौजूद रहे।
चौथे दिन दिखाया जाएगा भगवान श्रीकृष्ण का जन्म
श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वीरवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य प्रसंग दिखाया जाएगा। कथावाचक धर्मपाल नाभा की ओर से कंस के अत्याचार, देवकी-वसुदेव की कारागार लीला और मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के अवतरण का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। विशेष झांकियां और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा जिससे श्रद्धालु कृष्ण जन्म की दिव्य अनुभूति प्राप्त करेंगे।