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Rohtak News: मां ने लड़की होकर भी मुझे आजादी दी...तीन गांवों में प्रथम आने पर बंटवाए थे लड्डू

Wed, 06 May 2026 02:49 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 06 May 2026 02:49 AM IST
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Despite being a girl, my mother gave me freedom laddus were distributed when I came first in three villages.
मैं 51 साल की राजनीति शास्त्र की प्रवक्ता और 21 साल के बेटे की मां हूं। मां शब्द एक संपूर्ण अहसास है। इसमें अपनापन, चिंता, डांट सब कुछ समाया है। मेरा बचपन छह भाई-बहनों के साथ गांव बखेता में एक किसान परिवार में बीता। खेतों में काम करना, पशुओं का ध्यान रखना, जीवन का जरूरी हिस्सा था। सुविधाएं बहुत कम थीं। इसी माहौल में मां कलावती ने मुझे साहस के साथ पढ़ना- आगे बढ़ना सिखाया। मर्यादा में रहकर जीना, हौसले से सब कुछ संभाल लेना, हर परिस्थिति में बिना सहारे की चिंता किए आगे बढ़ना मां ने ही सिखाया। मां एक खूबसूरत शख्सियत की मालिक थीं।
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दूरदर्शी सोच और बुलंद हौसले के साथ भाई-बहनों को बड़ा किया। बचपन में मेरी मां की सख्ती से मुझे चिढ़ थी। उनका सौम्य रूप मैंने कम ही देखा। शायद जिम्मेदारियां ज्यादा थीं और संसाधन कम, इसीलिए ऐसा हुआ। बीती 10 अप्रैल को ही मैंने उन्हें खो दिया। लगता है जीवन खाली हो गया है। वे 12 साल से बिस्तर पर थीं लेकिन हौसला कमाल का था। हिम्मत बेमिसाल थी। मैंने अपने बेटे को सौम्यता से बड़ा किया, सख्ती कम ही की है। उनके अनुशासन ने ही मुझे काम के प्रति समर्पण सिखाया। मर्यादित व्यवहार और समय की पांबदी सिखाई। अशिक्षित होते हुए मुझे पढ़ने दिया।
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जो भी करना चाहती थी उसमें सहयोग दिया। खेत में काम करते हुए दुखी होती तो कहतीं कि अगर इससे बचना है तो पढ़ाई करो। यहीं से मुझे समझ आया कि पढ़ना कितना जरूरी है। आठवीं कक्षा में तीन गांवों में प्रथम आई तो मेरी मां ने बहुत सारे लड्डू मंगवाकर बांटे। उस दिन मां का नरम दिल देखा। मुझे लड़की होते हुए बहुत आजादी दी। अब उनको खोने के बाद एक अजीब खालीपन है। 10 मिनट के अंदर उनसे झगड़ा न करूं तो चैन न मिलता था।
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उनके अंतिम समय में पूछा कि मां अब क्या-कैसे करूं। वह बोलीं, दिमाग से काम करना, डरना नहीं। मैं हमेशा तेरे आस-पास रहूंगी। अभी लिखते हुए मेरी आंखों से आंसू बह रहे हैं। काश...कुछ और वक्त मुझे उनका साथ मिल पाता। उनका संघर्ष मुझे हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। अब जब मैं थकूंगी तो वो नहीं पूछेंगी कि क्या बात है बेटी, पर उन्हें याद करते हुए उस थकान को पीछे छोड़ते हुए निरंतर चलती रहूंगी।

शत-शत नमन मां।

डॉ. विद्या देवी

वाइस प्रिंसिपल,

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बहुअकबरपुर
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