फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Demand for nutritious and healthy ancient grains is on the rise, and farmers are cultivating them.

Rohtak News: पोषण से भरपूर व सेहतमंद प्राचीन अनाज की मांग बढ़ी, किसान कर रहे खेती

Mon, 16 Feb 2026 12:56 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 16 Feb 2026 12:56 AM IST
विज्ञापन
Demand for nutritious and healthy ancient grains is on the rise, and farmers are cultivating them.
28-एमडीयू में रंग बहार के तहत आयोजित रंग सृजन कार्यक्रम में स्टॉल पर जैविक व प्राचीन गेहूं की क - फोटो : संवाद
विकास सैनी
विज्ञापन

रोहतक। बदलते पर्यावरण व खान-पान के कारण बढ़ती मधुमेह, एलर्जी व मोटापे की परेशानी ने सेहत संबंधी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में भोजन की थाली को पौष्टिक व रोगमुक्त बनाने की जरूरत है।
वैज्ञानिक भी प्राचीन फसलों से बेहतर पैदावार लेने पर जोर दे रहे हैं। इसमें सोना मोती सरीखी गेहूं की अति प्राचीन किस्म मुख्य है। इस किस्म को न केवल किसान तवज्जो दे रहे हैं बल्कि उपभोक्त भी इन्हें बाजार में तलाश रहे हैं।
विज्ञापन

यह बातें रविवार को एमडीयू में रंग बहार के तहत आयोजित कलात्मक रंग आयाम रंग सृजन कार्यक्रम में सामने आई। एमडीयू के शिक्षक विकास केंद्र के लॉन में दीपक कौशिक अपने जैविक उत्पाद बेचने आए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

झज्जर के किलरोध गांव के दीपक कौशिक ने बताया कि उनके पास दस एकड़ जमीन है। इस पर प्राचीन किस्म के अनाज की पैदावार ले रहे हैं। इसमें सात एकड़ में सोना मोती, दो एकड़ में खपली व एक एकड़ में बंसी किस्म के गेहूं की फसल की बुवाई की हैं। ये फसलें सेहत की दृष्टि से बेहतर हैं।
सोना मोती मधुमेह, एलर्जी व मोटापे से बचाती है। इसका उत्पादन कम रहता है। इसलिए किसान इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। बाजार में इसकी अच्छी खासी मांग है। वे खेत में उगाई सोनी मोती गेहूं की फसल से दो से तीन गुणा तक कमा रहे हैं। लोगाें को सेहतमंद रहने के लिए भी प्रेरित करते हैं। ग्लूटेन फ्री यह फसल पूरी तरह गुणकारी है।


एमडीयू कैंपस के रणबीर सिंह ने बताया कि सोना मोती किस्म का गेहूं सेहत के लिए बेहतर है। परिवार पिछले एक साल से इसी का उपभोग कर रहा है। कार्यक्रम में जैविक अनाज की स्टॉल का पता लगा तो यहां पहुंचा। स्टॉल पर सैकड़ों वर्ष प्राचीन गेहूं की किस्म नजर आई। इसे देखकर किसान से उत्पादक के बारे में जानने आया हूं।






सेहत के लिए फायदेमंद है प्राचीन गेहूं
एमडीयू के एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजिस्ट डॉ. एसएस गिल ने बताया कि प्राचीन गेहूं राजस्थान, हरियाणा व अन्य उत्तर भारतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक प्राचीन, देसी व अत्यंत पौष्टिक गेहूं की किस्म है। सुनहरे व गोल दानों वाले इस गेहूं में फाइबर, जिंक, आयरन और प्रोटीन की उच्च मात्रा (14–15 प्रतिशत) होती है। यह इसे मधुमेह के रोगियों के लिए एक उत्तम विकल्प बनाती है। यह कम ग्लूटेन वाली गेहूं है। इस कारण आसानी से पच जाती है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। इसकी रोटी नरम, सुगंधित व मीठी होती है। ताजी के साथ बासी होने पर भी रोटी नरम रहती है। यह एक सूखा-प्रतिरोधी देसी किस्म है। कम पानी (3-4 सिंचाई) में भी अच्छी उपज देती है। इसके दाने धनिये के समान गोल व सुनहरे होते हैं। इसकी खेती के लिए जैविक व प्राकृतिक खेती के तरीके बेहतर हैं।

28-एमडीयू में रंग बहार के तहत आयोजित रंग सृजन कार्यक्रम में स्टॉल पर जैविक व प्राचीन गेहूं की क

28-एमडीयू में रंग बहार के तहत आयोजित रंग सृजन कार्यक्रम में स्टॉल पर जैविक व प्राचीन गेहूं की क- फोटो : संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article