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पूर्व एसपी और डीएसपी ने कोर्ट से मांगी सशर्त माफी
Updated Sat, 23 Jul 2016 02:47 AM IST
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अवमानना नोटिस पर जींद के एसपी और रोहतक के डीएसपी ने कोर्ट में दिया जवाब
- फोटो : अमर उजाला
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स्वामी रामदेव पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में देशद्रोह का केस दर्ज कराने के मामले में जारी अवमानना नोटिस पर रोहतक के तत्कालीन एसपी और डीएसपी ने शुक्रवार को कोर्ट में अपना जवाब पेश किया। मामले में वर्तमान में जींद के एसपी शशांक आनंद और डीएसपी डॉ. रविंद्र ने कोर्ट से सशर्त माफी मांगी है। एसीजेएम हरीश गोयल की अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 19 अगस्त तय की है।
शिकायतकर्ता पूर्व मंत्री सुभाष बतरा के वकील ओपी चुग ने बताया कि रोहतक के तत्कालीन एसपी शशांक आनंद ने कोर्ट में पेश किये जवाब में कहा है कि जाट आरक्षण हिंसा को लेकर जिले भर में 1200 से ज्यादा केस दर्ज थे। इनका सुपर विजन करने और गंभीर परिस्थितियों के चलते डीएसपी रविंद्र कुमार को रिपोर्ट लेकर कोर्ट में भेजा गया था। यदि इस दौरान कोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है तो वह सशर्त माफी मांगते हैं। इसी तरह डीएसपी रविंद्र ने आरक्षण हिंसा के दौरान दर्ज एफआईआर का हवाला दिया। उन्होंने भी कोर्ट ने सशर्त माफी मांगी है।
अब अगली सुनवाई पर होगी बहस
वकील ओपी चुग ने बताया कि मामले में अगली सुनवाई के दौरान बाबा रामदेव पर देशद्रोह का केस दर्ज करने और एसपी, डीएसपी की ओर से कोर्ट में पेश किये गये जवाब पर बहस होगी। बता दें कि 6 अप्रैल-2016 को कोर्ट ने कार्रवाई की रिपोर्ट एसपी को पेश करने के आदेश दिये थे, लेकिन एसपी ने अपनी जगह डीएसपी को रिपोर्ट लेकर भेज दिया। इस कारण एसपी और डीएसपी को कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया गया था।
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कोर्ट की ओर से जारी अवमानना के नोटिस के जवाब में रोहतक के तत्कालीन एसपी शशांक आनंद और डीएसपी डा. रविंद्र ने सशर्त माफी मांगी है। एसपी ने जवाब में माना है कि उन्होंने अपनी जगह डीएसपी को रिपोर्ट लेकर कोर्ट भेजा था। अब अगली सुनवाई पर दोनों की तरफ से पेश किये गये जवाब पर बहस होगी।
- एडवोकेट ओपी चुग, शिकायत कर्ता के वकील
यह है मामला
करीब ढाई माह पहले नई अनाज मंडी में सद्भावना सम्मेलन में स्वामी रामदेव ने कहा था कि यदि कानून नहीं होता तो वे भारत माता की जय नहीं बोलने वालाें का सिर काट देते। मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सुभाष बतरा ने एसपी को शिकायत देकर मांग की कि बाबा रामदेव पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में देशद्रोह का केस दर्ज किया जाए। सुनवाई नहीं होने के कारण पूर्व मंत्री ने कोर्ट में याचिका लगा दी। कोर्ट ने एसपी को जांच करके रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए। 23 मई को हुई सुनवाई में डीएसपी ने कोर्ट में जाकर रिपोर्ट पेश की। इस पर कोर्ट ने चेतावनी दी और कहा कि खुद एसपी को कोर्ट में रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसके बाद एसपी ने 10 दिन का समय मांगा था और सुनवाई 3 जून को तय की थी। तीन जून को भी एसपी रिपोर्ट लेकर पेश नहीं हुए। एसपी ने जाट आरक्षण आंदोलन की चेतावनी के कारण कानून व्यवस्था बनाने में व्यस्त होने की बात कही और वे कोर्ट नहीं पहुंच सके। फिर डीएसपी ने रिपोर्ट पेश की थी।
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शिकायतकर्ता पूर्व मंत्री सुभाष बतरा के वकील ओपी चुग ने बताया कि रोहतक के तत्कालीन एसपी शशांक आनंद ने कोर्ट में पेश किये जवाब में कहा है कि जाट आरक्षण हिंसा को लेकर जिले भर में 1200 से ज्यादा केस दर्ज थे। इनका सुपर विजन करने और गंभीर परिस्थितियों के चलते डीएसपी रविंद्र कुमार को रिपोर्ट लेकर कोर्ट में भेजा गया था। यदि इस दौरान कोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है तो वह सशर्त माफी मांगते हैं। इसी तरह डीएसपी रविंद्र ने आरक्षण हिंसा के दौरान दर्ज एफआईआर का हवाला दिया। उन्होंने भी कोर्ट ने सशर्त माफी मांगी है।
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अब अगली सुनवाई पर होगी बहस
वकील ओपी चुग ने बताया कि मामले में अगली सुनवाई के दौरान बाबा रामदेव पर देशद्रोह का केस दर्ज करने और एसपी, डीएसपी की ओर से कोर्ट में पेश किये गये जवाब पर बहस होगी। बता दें कि 6 अप्रैल-2016 को कोर्ट ने कार्रवाई की रिपोर्ट एसपी को पेश करने के आदेश दिये थे, लेकिन एसपी ने अपनी जगह डीएसपी को रिपोर्ट लेकर भेज दिया। इस कारण एसपी और डीएसपी को कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया गया था।
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कोर्ट की ओर से जारी अवमानना के नोटिस के जवाब में रोहतक के तत्कालीन एसपी शशांक आनंद और डीएसपी डा. रविंद्र ने सशर्त माफी मांगी है। एसपी ने जवाब में माना है कि उन्होंने अपनी जगह डीएसपी को रिपोर्ट लेकर कोर्ट भेजा था। अब अगली सुनवाई पर दोनों की तरफ से पेश किये गये जवाब पर बहस होगी।
- एडवोकेट ओपी चुग, शिकायत कर्ता के वकील
यह है मामला
करीब ढाई माह पहले नई अनाज मंडी में सद्भावना सम्मेलन में स्वामी रामदेव ने कहा था कि यदि कानून नहीं होता तो वे भारत माता की जय नहीं बोलने वालाें का सिर काट देते। मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सुभाष बतरा ने एसपी को शिकायत देकर मांग की कि बाबा रामदेव पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में देशद्रोह का केस दर्ज किया जाए। सुनवाई नहीं होने के कारण पूर्व मंत्री ने कोर्ट में याचिका लगा दी। कोर्ट ने एसपी को जांच करके रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए। 23 मई को हुई सुनवाई में डीएसपी ने कोर्ट में जाकर रिपोर्ट पेश की। इस पर कोर्ट ने चेतावनी दी और कहा कि खुद एसपी को कोर्ट में रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसके बाद एसपी ने 10 दिन का समय मांगा था और सुनवाई 3 जून को तय की थी। तीन जून को भी एसपी रिपोर्ट लेकर पेश नहीं हुए। एसपी ने जाट आरक्षण आंदोलन की चेतावनी के कारण कानून व्यवस्था बनाने में व्यस्त होने की बात कही और वे कोर्ट नहीं पहुंच सके। फिर डीएसपी ने रिपोर्ट पेश की थी।