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ताजा खुलासा : चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही दे देती है छात्राओं को हॉस्टल से छुट्टी
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Tue, 27 Oct 2015 02:25 AM IST
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स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफार्मिंग एंड विजुअल आर्ट में महिला कर्मी के उत्पीड़न मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को बाहर जाने की छुट्टी दे देती है। कर्मचारी बाकायदा वार्डन की जगह पर अपने हस्ताक्षर भी कर देती है।
दरअसल, यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल से बाहर जाने के लिए वार्डन की अनुमति लेनी होती है। इसके बाद गेट पर सिक्योरिटी गार्ड एंट्री करता है। लेकिन स्टेट विवि में सबकुछ उल्टा पुल्टा है। प्रबंधन की नींद के कारण अब गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं की सुरक्षा पर भी सवाल उठा रहा है। ‘अमर उजाला’ के हाथ दो छात्राओं द्वारा छुट्टी के लिए दी गई एप्लीकेशन लगी है। इस एप्लीकेशन पर आवेदन के स्थान पर दोनों छात्राओं के तो हस्ताक्षर हैं, लेकिन एक छात्रा की एप्लीकेशन पर हॉस्टल वार्डन के पदनाम की जगह चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी के हस्ताक्षर हैं। दूसरी छात्रा की एप्लीकेशन पर इसी महिला कर्मचारी ने सिक्योरिटी गार्ड के पदनाम पर हस्ताक्षर कर रखे थे। जबकि यह महिला कर्मचारी न तो हॉस्टल वार्डन और न ही सिक्योरिटी गार्ड।
अब यह समझ से परे हैं कि आखिर किस नियम के अनुसार हॉस्टल वार्डन और सिक्योरिटी गार्ड की जगह महिला कर्मचारी ने खुद हस्ताक्षर कर छात्राओं को छुट्टी दी। यदि यह भी मानें कि हॉस्टल वार्डन ने फोन पर बात कर उसे हस्ताक्षर करने के लिए कहा होगा तो भी नियम के अनुसार महिला कर्मचारी एप्लीकेशन पर उनके पदनाम के सामने हस्ताक्षर नहीं कर सकती। बताया तो यह भी जा रहा है कि यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में भी है, लेकिन प्रबंधन चुप्पी साधकर बैठा है।
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पीड़ित को बुलाया यूनिवर्सिटी, डाला समझौते का दबाव
यूनिवर्सिटी की महिला कर्मचारी के साथ हुए शारीरिक उत्पीड़न का मीडिया में खुलासा होते ही प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। आरोप है कि डीन और हॉस्टल वार्डन ने पीड़ित को सोमवार को दिन में कई बार फोन कर समझौते का दबाव डाला। यहां तक कि पीड़ित को यूनिवर्सिटी में भी बुलाकर कहा कि गया आपको नौकरी दे दी गई अब क्या दिक्कत आ रही है। इस मामले में समझौता कर लो। आधा घंटे तक महिला पर दबाव डाला गया, लेकिन पीड़ित ने समझौते से साफ इनकार कर दिया। देर शाम तक पीड़ित को दोबारा से यूनिवर्सिटी में बुलाने के लिए फोन किए गए। यहां तक कि महिला को ले जाने के लिए यूनिवर्सिटी की तरफ से एक व्यक्ति को गाड़ी देकर भी भेजा गया, लेकिन पीड़ित ने मना कर दिया।
मीडिया पर करो कंट्रोल, नेगेटिव को पॉजिटिव में बदलो
यूनिवर्सिटी प्रबंधन पिछले कई दिनों से मामले को दबाने में जुटा था, लेकिन रविवार को डीन, वार्डन और छात्रों समेत 8 पर महिला उत्पीड़न का केस दर्ज होने के बाद मामला अब खुल गया है। सूत्रों की मानें तो यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने दिन में स्टाफ की मीटिंग बुलाई और यहां तक कहा कि मीडिया पर कंट्रोल करो। मीडिया में जो नेगेटिव आ रहा है उसे पॉजिटिव में बदलो। इससे यूनिवर्सिटी की छवि धूमिल हो रही है।
नियमों का किया पालन, इसलिए बनाया साजिश का शिकार : पीड़ित
पीड़ित के अनुसार उसकी नियुक्ति अगस्त में हुई थी। नियुक्ति के बाद पता चला कि गर्ल्स हॉस्टल में किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा। मैने नियमों का पालन किया, जिससे वहां पर कुछ लोगों को जलन हुई। इसके चलते चार दिन बाद ही चार छात्रों ने अभद्र व्यवहार किया और मुझे साजिश का शिकार बनाया।
यूनिवर्सिटी ने की कमेटी गठित
वीसी अश्वनी सब्बरवाल ने मामले में कमेटी गठित कर दी है। बाकायदा इस कमेटी की जानकारी के लिए मीडिया में भी पत्र भेजा गया। इसमें कुलपति ने आश्वासन दिया है कि निष्पक्ष जांच होगी और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
न आरोपियों की गिरफ्तारी, न पूछताछ
मामले में अभी न तो किसी की गिरफ्तारी की गई है और न ही आरोपियों से पूछताछ की। हालांकि दिन भर यूनिवर्सिटी में रहकर हॉस्टल की लड़कियों से जानकारी जरूर ली गई। डीएसपी पुष्पा खत्री ने बताया कि हॉस्टल में मौजूद अन्य लड़कियों के भी बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पीड़ित की तरफ से मिली शिकायत के आधार पर ही जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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दरअसल, यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल से बाहर जाने के लिए वार्डन की अनुमति लेनी होती है। इसके बाद गेट पर सिक्योरिटी गार्ड एंट्री करता है। लेकिन स्टेट विवि में सबकुछ उल्टा पुल्टा है। प्रबंधन की नींद के कारण अब गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं की सुरक्षा पर भी सवाल उठा रहा है। ‘अमर उजाला’ के हाथ दो छात्राओं द्वारा छुट्टी के लिए दी गई एप्लीकेशन लगी है। इस एप्लीकेशन पर आवेदन के स्थान पर दोनों छात्राओं के तो हस्ताक्षर हैं, लेकिन एक छात्रा की एप्लीकेशन पर हॉस्टल वार्डन के पदनाम की जगह चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी के हस्ताक्षर हैं। दूसरी छात्रा की एप्लीकेशन पर इसी महिला कर्मचारी ने सिक्योरिटी गार्ड के पदनाम पर हस्ताक्षर कर रखे थे। जबकि यह महिला कर्मचारी न तो हॉस्टल वार्डन और न ही सिक्योरिटी गार्ड।
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अब यह समझ से परे हैं कि आखिर किस नियम के अनुसार हॉस्टल वार्डन और सिक्योरिटी गार्ड की जगह महिला कर्मचारी ने खुद हस्ताक्षर कर छात्राओं को छुट्टी दी। यदि यह भी मानें कि हॉस्टल वार्डन ने फोन पर बात कर उसे हस्ताक्षर करने के लिए कहा होगा तो भी नियम के अनुसार महिला कर्मचारी एप्लीकेशन पर उनके पदनाम के सामने हस्ताक्षर नहीं कर सकती। बताया तो यह भी जा रहा है कि यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में भी है, लेकिन प्रबंधन चुप्पी साधकर बैठा है।
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पीड़ित को बुलाया यूनिवर्सिटी, डाला समझौते का दबाव
यूनिवर्सिटी की महिला कर्मचारी के साथ हुए शारीरिक उत्पीड़न का मीडिया में खुलासा होते ही प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। आरोप है कि डीन और हॉस्टल वार्डन ने पीड़ित को सोमवार को दिन में कई बार फोन कर समझौते का दबाव डाला। यहां तक कि पीड़ित को यूनिवर्सिटी में भी बुलाकर कहा कि गया आपको नौकरी दे दी गई अब क्या दिक्कत आ रही है। इस मामले में समझौता कर लो। आधा घंटे तक महिला पर दबाव डाला गया, लेकिन पीड़ित ने समझौते से साफ इनकार कर दिया। देर शाम तक पीड़ित को दोबारा से यूनिवर्सिटी में बुलाने के लिए फोन किए गए। यहां तक कि महिला को ले जाने के लिए यूनिवर्सिटी की तरफ से एक व्यक्ति को गाड़ी देकर भी भेजा गया, लेकिन पीड़ित ने मना कर दिया।
मीडिया पर करो कंट्रोल, नेगेटिव को पॉजिटिव में बदलो
यूनिवर्सिटी प्रबंधन पिछले कई दिनों से मामले को दबाने में जुटा था, लेकिन रविवार को डीन, वार्डन और छात्रों समेत 8 पर महिला उत्पीड़न का केस दर्ज होने के बाद मामला अब खुल गया है। सूत्रों की मानें तो यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने दिन में स्टाफ की मीटिंग बुलाई और यहां तक कहा कि मीडिया पर कंट्रोल करो। मीडिया में जो नेगेटिव आ रहा है उसे पॉजिटिव में बदलो। इससे यूनिवर्सिटी की छवि धूमिल हो रही है।
नियमों का किया पालन, इसलिए बनाया साजिश का शिकार : पीड़ित
पीड़ित के अनुसार उसकी नियुक्ति अगस्त में हुई थी। नियुक्ति के बाद पता चला कि गर्ल्स हॉस्टल में किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा। मैने नियमों का पालन किया, जिससे वहां पर कुछ लोगों को जलन हुई। इसके चलते चार दिन बाद ही चार छात्रों ने अभद्र व्यवहार किया और मुझे साजिश का शिकार बनाया।
यूनिवर्सिटी ने की कमेटी गठित
वीसी अश्वनी सब्बरवाल ने मामले में कमेटी गठित कर दी है। बाकायदा इस कमेटी की जानकारी के लिए मीडिया में भी पत्र भेजा गया। इसमें कुलपति ने आश्वासन दिया है कि निष्पक्ष जांच होगी और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
न आरोपियों की गिरफ्तारी, न पूछताछ
मामले में अभी न तो किसी की गिरफ्तारी की गई है और न ही आरोपियों से पूछताछ की। हालांकि दिन भर यूनिवर्सिटी में रहकर हॉस्टल की लड़कियों से जानकारी जरूर ली गई। डीएसपी पुष्पा खत्री ने बताया कि हॉस्टल में मौजूद अन्य लड़कियों के भी बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पीड़ित की तरफ से मिली शिकायत के आधार पर ही जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।