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दुष्कर्म का केस दर्ज हुआ तो नौकरी गई, बेटी का रिश्ता टूटा, दो साल बाद कोर्ट से बरी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 06 Oct 2016 01:13 AM IST
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सांपला की महिला ने जयपुर के सरकारी कर्मचारी पर लगाया था आरोप
- फोटो : Demo Pic
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दुष्कर्म का केस दर्ज होने के बाद सरकारी नौकरी चली गई। बेटी का रिश्ता टूट गया। लेकिन उसी केस में अदालत से बरी होने के बाद उनकी समझ में नहीं आया कि कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करें। बलात्कार का आरोप लगने के बाद करीब दो साल तक सामाजिक अपमान झेलने वाले राजस्थान के जयपुर स्थित काला डेरा निवासी भूरामल को मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोनिया गोयल की अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार सांपला की एक 42 वर्षीय पूर्व फौजी की पत्नी ने भूरामल के खिलाफ वर्ष 2014 में कोर्ट में इस्तगासा दायर किया था। महिला ने भूरामल पर धोखाधड़ी, दुष्कर्म, शादी का झांसा देना सहित अन्य आरोप लगाये थे। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर भूरामल के खिलाफ विभिन्न धाराओं मे केस दर्ज किया गया था।
दूसरी तरफ भूरामल ने भी महिला के खिलाफ एक दीवानी मुकदमा जयपुर कोर्ट में डाल रखा था। भूरामल ने बताया था कि महिला के पति फौज में थे। वह राजस्थान के बाड़मेर में रहते थे। वर्ष 2008 में उनकी मौत हो गई। इसके बाद वर्ष 2009 में महिला बाड़मेर से सांपला आ गई थी। भूरामल का कहना था कि सांपला में मकान बनाने के लिए महिला ने उससे तीन लाख 25 हजार रुपये लिए थे। मकान की रजिस्ट्री के दस्तावेज गिरवी रखे थे। महिला का कहना था कि वह किस्तों में रुपये वापस करेगी। मगर कई साल तक महिला ने न तो किस्त जमा की न ही मूल धन वापस किया। इस पर भूरामल ने वकील के माध्यम से महिला को कई नोटिस भेजे, लेकिन महिला ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद भूरामल ने उसके खिलाफ जयपुर कोर्ट मेें वर्ष 2012 में अर्जी लगाकर केस दर्ज करवाया था। आरोप था कि इसी के चलते महिला ने भूरामल पर केस दर्ज करवाया था। पुलिस ने जब मामले की जांच की तो चालान में केवल दुष्कर्म और अश्लीलता की धाराओं को शामिल किया था। पूरे मुकदमे की सुनवाई के बाद भूरामल के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला। इस पर कोर्ट ने उन्हेें निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया।
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केस दो साल तक कोर्ट में चला, लेकिन आज सभी के सामने सचाई आ गई। भूरामल को झूठे आरोपों से मुक्ति मिल गई है। अब वह सम्मान के साथ अपनी नौकरी कर सकते हैं। दो साल तक उन्होंने बहुत सामाजिक अपमान सहन किया। आरोप लगने के बाद उनकी नौकरी तक चली गई थी।
- एडवोकेट डॉ. दीपक भारद्वाज आरोपी के वकील
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अदालत में चले अभियोग के अनुसार सांपला की एक 42 वर्षीय पूर्व फौजी की पत्नी ने भूरामल के खिलाफ वर्ष 2014 में कोर्ट में इस्तगासा दायर किया था। महिला ने भूरामल पर धोखाधड़ी, दुष्कर्म, शादी का झांसा देना सहित अन्य आरोप लगाये थे। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर भूरामल के खिलाफ विभिन्न धाराओं मे केस दर्ज किया गया था।
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दूसरी तरफ भूरामल ने भी महिला के खिलाफ एक दीवानी मुकदमा जयपुर कोर्ट में डाल रखा था। भूरामल ने बताया था कि महिला के पति फौज में थे। वह राजस्थान के बाड़मेर में रहते थे। वर्ष 2008 में उनकी मौत हो गई। इसके बाद वर्ष 2009 में महिला बाड़मेर से सांपला आ गई थी। भूरामल का कहना था कि सांपला में मकान बनाने के लिए महिला ने उससे तीन लाख 25 हजार रुपये लिए थे। मकान की रजिस्ट्री के दस्तावेज गिरवी रखे थे। महिला का कहना था कि वह किस्तों में रुपये वापस करेगी। मगर कई साल तक महिला ने न तो किस्त जमा की न ही मूल धन वापस किया। इस पर भूरामल ने वकील के माध्यम से महिला को कई नोटिस भेजे, लेकिन महिला ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद भूरामल ने उसके खिलाफ जयपुर कोर्ट मेें वर्ष 2012 में अर्जी लगाकर केस दर्ज करवाया था। आरोप था कि इसी के चलते महिला ने भूरामल पर केस दर्ज करवाया था। पुलिस ने जब मामले की जांच की तो चालान में केवल दुष्कर्म और अश्लीलता की धाराओं को शामिल किया था। पूरे मुकदमे की सुनवाई के बाद भूरामल के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला। इस पर कोर्ट ने उन्हेें निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया।
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केस दो साल तक कोर्ट में चला, लेकिन आज सभी के सामने सचाई आ गई। भूरामल को झूठे आरोपों से मुक्ति मिल गई है। अब वह सम्मान के साथ अपनी नौकरी कर सकते हैं। दो साल तक उन्होंने बहुत सामाजिक अपमान सहन किया। आरोप लगने के बाद उनकी नौकरी तक चली गई थी।
- एडवोकेट डॉ. दीपक भारद्वाज आरोपी के वकील