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फिर एक बालिका बची वधू होने से
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 17 Jul 2016 02:22 AM IST
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एक बालिका फिर वधू होने से बच गई। शनिवार को मायना गांव में बाल संरक्षण अधिकारी और पुलिस कर्मियों की टीम ने एक नाबालिग लड़की की शादी रुकवा दी। लड़की को 16 साल होने में एक माह बाकी था, लेकिन अभिभावकों ने उसका रिश्ता तय कर दिया था। हालांकि, इसके पीछे मुख्य वजह पिता का कैंसर पीड़ित होना बताया जा रहा है। पिता जिम्मेदारी से जल्द मुक्त होना चाहते थे, इसलिए बेटी की शादी करा रहे थे। जानकारों का कहना है कि ग्रामिणों को नियमों की जानकारी नहीं होेने के चलते ऐसे मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं।
शनिवार को मायना गांव में एक नाबालिग लड़की की शादी होनी थी। इसके लिए लड़के और लड़की पक्ष के लोगों ने पूरी तैयारी कर रखी थी। इसी बीच जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंद्र कौर को इसकी सूचना मिली। मामले की जांच के लिए वह एएसआई हवाकौर, एएसआई राजपाल और कांस्टेबल शर्मिला को साथ गांव पहुंची। लड़की के उम्र संबंधी कागजात की जांच की गई, तो पाया गया कि लड़की अभी 16 वर्ष की भी नहीं हुई है। वह गांव के एक सरकारी स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती है। परिजनों ने बताया कि लड़की के पिता कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं। इसलिए कटवाड़ा गांव के लड़के के साथ 16 जुलाई को शादी कराई जा रही है। इसके बाद टीम ने लड़कों के परिजनों से बात की और बारात रुकवाई। वर पक्ष ने कहा कि केवल 5 से 7 व्यक्ति पहुंचकर गोद भराई की रस्म को पूरा करेंगे। शादी लड़का-लड़की के बालिग होने के बाद कराई जाएगी। इसके लिए उनसे लिखित में शपथपत्र लिया गया। परिजनों ने बताया कि बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी नहीं थी। पता होता तो शादी नहीं करते।
कम उम्र में शादी के होते हैं दुष्परिणाम
जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंद्र कौर ने बताया कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है। इसे समाज में जागरूकता के माध्यम से खत्म किया जा सकता है। हमारे समाज में लड़कियों को बोझ समझने वाली सोच ज्यादा है। लोग लड़कियों की जल्द शादी करके जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं। उन्हें नहीं पता है कि कम उम्र में शादी के कारण उनके जल्दी बच्चे पैदा हो जाते हैं। वह परिवार को भी नहीं संभाल पाती हैं। उनके शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं।
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शनिवार को मायना गांव में एक नाबालिग लड़की की शादी होनी थी। इसके लिए लड़के और लड़की पक्ष के लोगों ने पूरी तैयारी कर रखी थी। इसी बीच जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंद्र कौर को इसकी सूचना मिली। मामले की जांच के लिए वह एएसआई हवाकौर, एएसआई राजपाल और कांस्टेबल शर्मिला को साथ गांव पहुंची। लड़की के उम्र संबंधी कागजात की जांच की गई, तो पाया गया कि लड़की अभी 16 वर्ष की भी नहीं हुई है। वह गांव के एक सरकारी स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती है। परिजनों ने बताया कि लड़की के पिता कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं। इसलिए कटवाड़ा गांव के लड़के के साथ 16 जुलाई को शादी कराई जा रही है। इसके बाद टीम ने लड़कों के परिजनों से बात की और बारात रुकवाई। वर पक्ष ने कहा कि केवल 5 से 7 व्यक्ति पहुंचकर गोद भराई की रस्म को पूरा करेंगे। शादी लड़का-लड़की के बालिग होने के बाद कराई जाएगी। इसके लिए उनसे लिखित में शपथपत्र लिया गया। परिजनों ने बताया कि बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी नहीं थी। पता होता तो शादी नहीं करते।
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कम उम्र में शादी के होते हैं दुष्परिणाम
जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंद्र कौर ने बताया कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है। इसे समाज में जागरूकता के माध्यम से खत्म किया जा सकता है। हमारे समाज में लड़कियों को बोझ समझने वाली सोच ज्यादा है। लोग लड़कियों की जल्द शादी करके जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं। उन्हें नहीं पता है कि कम उम्र में शादी के कारण उनके जल्दी बच्चे पैदा हो जाते हैं। वह परिवार को भी नहीं संभाल पाती हैं। उनके शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं।
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