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एचआईवी पीड़िता की मौत, अनाथ बच्चियों को भेजा आश्रम
Updated Wed, 25 Jul 2018 02:44 AM IST
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एचआईवी पीड़िता की मौत, अनाथ बच्चियों को भेजा आश्रम
- दोनों बेटियों को निजी आश्रम भेजा गया
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआई में उपचाराधीन सोनीपत की एचआईवी पीड़िता ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। इसके चलते उसकी दोनों बेटियों को शहर के निजी आश्रम में भिजवा दिया गया। महिला की देखभाल कर रही एनजीओ ने संस्थान पर आरोप जड़ा है कि महिला को न तो सीनियर डॉक्टरों ने देखा और न ही अंदर से दवा उपलब्ध कराई गई।
मेडिसन वार्ड में उपचाराधीन एचआईवी पीड़िता ने मंगलवार को अपने एचआईवी पीड़ित पति की मौत के दस दिन बाद दम तोड़ दिया है। महिला की देखभाल कर रही विहान केयर एंड स्पोर्ट सेंटर के पदाधिकारी की मानें तो यदि संस्थान के सीनियर डॉक्टर मरीज का सही समय पर उपचार करते तो आज दो बेटियां अनाथ नहीं होती। महिला को पहले कई दिन दाखिल नहीं किया गया, जब प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद दाखिल किया गया तो अंदर दवा तक के लाले पड़ गए। महिला के उपचार का खर्च भी एनजीओ ने उठाया, जबकि प्रशासन दावा करता है कि सरकार की ओर से एचआईवी पीड़ित को निशुल्क उपचार दिया जाता है। मुंह में छाले तक की दवा संस्थान में डॉक्टरों ने बाहर से मंगाई है। वहीं आरोप जड़ा गया कि महिला की मौत के बाद कोई स्ट्रेचर तक देने को तैयार नहीं था कि शव को शवगृह तक पहुंचा दिया जाए।
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- दोनों बेटियों को निजी आश्रम भेजा गया
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआई में उपचाराधीन सोनीपत की एचआईवी पीड़िता ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। इसके चलते उसकी दोनों बेटियों को शहर के निजी आश्रम में भिजवा दिया गया। महिला की देखभाल कर रही एनजीओ ने संस्थान पर आरोप जड़ा है कि महिला को न तो सीनियर डॉक्टरों ने देखा और न ही अंदर से दवा उपलब्ध कराई गई।
मेडिसन वार्ड में उपचाराधीन एचआईवी पीड़िता ने मंगलवार को अपने एचआईवी पीड़ित पति की मौत के दस दिन बाद दम तोड़ दिया है। महिला की देखभाल कर रही विहान केयर एंड स्पोर्ट सेंटर के पदाधिकारी की मानें तो यदि संस्थान के सीनियर डॉक्टर मरीज का सही समय पर उपचार करते तो आज दो बेटियां अनाथ नहीं होती। महिला को पहले कई दिन दाखिल नहीं किया गया, जब प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद दाखिल किया गया तो अंदर दवा तक के लाले पड़ गए। महिला के उपचार का खर्च भी एनजीओ ने उठाया, जबकि प्रशासन दावा करता है कि सरकार की ओर से एचआईवी पीड़ित को निशुल्क उपचार दिया जाता है। मुंह में छाले तक की दवा संस्थान में डॉक्टरों ने बाहर से मंगाई है। वहीं आरोप जड़ा गया कि महिला की मौत के बाद कोई स्ट्रेचर तक देने को तैयार नहीं था कि शव को शवगृह तक पहुंचा दिया जाए।
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