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निजी अस्पताल प्रबंधन के अड़ियल रवैये ने ले ली कारगिल शहीद की विधवा की जान
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
पैसे कमाने के चक्कर में निजी अस्पताल प्रबंधन अब मानवता को दरकिनार करने लगे हैं। एक बेटा मां के इलाज की गुहार लगाता रहा, लेकिन प्रबंधन आधार कार्ड की मांग करता रहा। अस्पताल के इस अड़ियल रुख के चलते कारगिल शहीद की विधवा की जान चली गई। वहीं पुलिस का कहना है कि एक महिला इलाज के लिए आई थी, लेकिन शिकायत नहीं दी गई है।
महलाना गांव निवासी लक्ष्मण दास कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। उनकी पत्नी शकुंतला कई दिन से बीमार थी। उनका बेटा पवन इलाज के लिए मां को लेकर कई अस्पतालों में गया था। बाद में जब शहर स्थिति आर्मी कार्यालय में गए तो वहां उन्हें पैनल में शामिल शहर के निजी अस्पताल में ले जाने को कहा गया। पवन अपनी मां को लेकर निजी अस्पताल में पहुंचा था। जब वह अस्पताल में लेकर पहुंचा तो अस्पताल प्रबंधन ने आधार कार्ड मांगा। आरोप है कि आधार कार्ड न देने पर अस्पताल प्रबंधन ने इलाज नहीं शुरू किया। उसने मोबाइल में मौजूद आधार कार्ड की फोटो दिखाया और आधार कार्ड नंबर बताया तो उसे मानने से अस्पताल प्रबंधन ने मना कर दिया। शहीद का बेटा मां के इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा। बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन अपनी बात पर अड़ा रहा। इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को मौके पर बुला लिया। आरोप है कि पुलिस भी उसे ही धमकाने लगी। मां की बिगड़ती हालत देख उसे दूसरे अस्पताल में ले जाने लगा। रास्ते में शहीद की पत्नी ने दम तोड़ दिया। सिक्का चौकी इंचार्ज कृष्ण का कहना है कि एक महिला इलाज के लिए आई थी। लेकिन कोई शिकायत नहीं दी गयी है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी।
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सोनीपत।
पैसे कमाने के चक्कर में निजी अस्पताल प्रबंधन अब मानवता को दरकिनार करने लगे हैं। एक बेटा मां के इलाज की गुहार लगाता रहा, लेकिन प्रबंधन आधार कार्ड की मांग करता रहा। अस्पताल के इस अड़ियल रुख के चलते कारगिल शहीद की विधवा की जान चली गई। वहीं पुलिस का कहना है कि एक महिला इलाज के लिए आई थी, लेकिन शिकायत नहीं दी गई है।
महलाना गांव निवासी लक्ष्मण दास कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। उनकी पत्नी शकुंतला कई दिन से बीमार थी। उनका बेटा पवन इलाज के लिए मां को लेकर कई अस्पतालों में गया था। बाद में जब शहर स्थिति आर्मी कार्यालय में गए तो वहां उन्हें पैनल में शामिल शहर के निजी अस्पताल में ले जाने को कहा गया। पवन अपनी मां को लेकर निजी अस्पताल में पहुंचा था। जब वह अस्पताल में लेकर पहुंचा तो अस्पताल प्रबंधन ने आधार कार्ड मांगा। आरोप है कि आधार कार्ड न देने पर अस्पताल प्रबंधन ने इलाज नहीं शुरू किया। उसने मोबाइल में मौजूद आधार कार्ड की फोटो दिखाया और आधार कार्ड नंबर बताया तो उसे मानने से अस्पताल प्रबंधन ने मना कर दिया। शहीद का बेटा मां के इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा। बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन अपनी बात पर अड़ा रहा। इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को मौके पर बुला लिया। आरोप है कि पुलिस भी उसे ही धमकाने लगी। मां की बिगड़ती हालत देख उसे दूसरे अस्पताल में ले जाने लगा। रास्ते में शहीद की पत्नी ने दम तोड़ दिया। सिक्का चौकी इंचार्ज कृष्ण का कहना है कि एक महिला इलाज के लिए आई थी। लेकिन कोई शिकायत नहीं दी गयी है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी।
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