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महंगाई की मार : माल ढुलाई हरियाणा में 8 पैसे, प्रदेश से बाहर 16 पैसे प्रति किलो बढ़ी
Updated Wed, 05 Sep 2018 02:52 AM IST
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ट्रांसपोर्टर्स के साथ लोकल माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर्स ने भी किराये में की बढ़ोत्तरी
थोक बाजार की कीमतों में दिखने लगा अंतर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक । डीजल के दामों में लगातार वृद्धि का असर अब बाजार में दिखने लगा है। ट्रांसपोर्टर्स ने माल ढुलाई भाड़ा 10 से 15 फीसदी तक बढ़ा दिया है। ट्रांसपोर्ट से इंट्रा स्टेट (हरियाणा में) ढुलाई आठ पैसे प्रति किलो तो इंटर स्टेट (हरियाणा से बाहर) 15 पैसे प्रति किलो के हिसाब से बढ़ गई है। माल की ढुलाई भी काफी बढ़ गई है, जिसका असर थोक बाजार में दिखने लगा है।
डीजल के दामों में अप्रैल से लगातार वृद्धि होती जा रही है। जून व जुलाई में मामूली राहत मिली थी। लगातार धीरे-धीरे कीमतें बढ़ने की वजह से मंगलवार को डीजल 72.37 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बढ़ा। वहीं, ट्रांसपोर्ट कारोबार प्रभावित होने लगा। इसके लेकर ट्रांसपोर्टर्स को एक साल के लिए कंपनियों और थोक कारोबारियों से होने वाले कांट्रेक्ट पर रेट बढ़ाने का फैसला लिया। बताते हैं कि थोक कारोबारियों व कंपनियों ने कांस्ट्रेक्ट रेट बढ़ाने से इनकार किया तो ट्रांसपोर्टर्स ने माल ढुलाई करने से इनकार कर दिया। एक सितंबर से ट्रांसपोर्टर्स ने इंट्रा स्टेट माल ढुलाई भाड़ा आठ पैसे प्रति किलो बढ़ा दिया है, जो 88 पैसे हो गया है। वहीं इंटर स्टेट 16 पैसे बढ़ाया है, जो 1.62 रुपये प्रति किलो हो गया है। वहीं, लोकल ढुलाई करने वाले लोडरों ने 50 से 60 रुपये तक की बढ़ोत्तरी कर दी है, जिससे थोक और फुटकर कारोबार पर असर दिखने लगा है। सामानों की कीमतों में उछाल आने लगा है।
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खर्चा निकालना मुश्किल, यही हाल रहा तो करने पड़ेंगे रेट रिवाइज
रोहतक। पेट्रो पदार्थों के दाम बढ़ने पर जब ट्रांसपोर्टर्स से बात की गई तो सबने महंगाई का हवाला देते हुए अपनी परेशानी बताई। उन्होंने ने कहा कि भाड़े में वृद्धि नहीं करते तो दिक्कत होती। यदि फिर रेट बढ़े तो हमें मजबूरन रेट रिवाइज करने पड़ेंगे।
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डीजल के लगातार बढ़ रहे दामों की वजह से ट्रांसपोर्ट का खर्चा निकालना मुश्किल हो रहा था। चूंकि दूसरे राज्यों में माल सप्लाई करने वालों से एक साल का रेट कांट्रेक्ट होता है, इसलिए बढ़ाने में दिक्कत हो रही थी। मगर हालात को देखकर उन्होंने भी कांट्रेक्ट रिवाइज करना शुरू कर दिया है।
-गुरु चरन सिंह, प्रधान ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
जिस तरह से धीरे-धीरे करके डीजल के रेट बढ़ रहे हैं, उससे समझ नहीं आ रहा कि आखिर क्या रेट तय किया जाए। फिलहाल तो 10 फीसदी तक भाड़े में वृद्धि कर दी है। यदि यही हालात रहे तो मजबूरन दोबारा से रेट रिवाइज करने पड़ जाएंगे, अन्यथा आर्थिक स्थिति गड़बड़ा जाएगी।
-गोविंदर सिंह, बिंद्रा कैरियर
हम राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तक ट्रकों से माल की ढुलाई करते हैं। स्थिति यह हो गई थी कि जब ट्रक लौटकर आता था, तो पता चलता था कि मुनाफा होने के बजाए जेब से पैसा जा रहा है। जिसकी वजह से मजबूर होकर माल ढुलाई के रेट को बढ़ाना पड़ा है।
-सुरेंद्र शर्मा, मारुति मोटर्स
डीजल के दाम एक साल के अंदर इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि बड़ा ही मुश्किल हो रहा है ट्रांसपोर्ट का काम करना। खर्चा निकालना मुश्किल हो रहा था, जिसकी वजह से कांट्रैक्ट रेट को बढ़ाना पड़ा है। यदि ऐसा नहीं करते तो मजबूर होकर काम ही बंद करना पड़ता।
नरेंद्र, इंद्रप्रस्थ पैप्सू सर्विस
ये कहना है थोक बाजार के कारोबारियों का
थोक में बाहर से आने वाले माल के दामों की कीमत बढ़ गई है, क्योंकि ट्रांसपोर्टर्स ने भाड़ा बढ़ा दिया है। यही नहीं, माल ढुलाई करने वालों ने भी कीमतों में काफी बढ़ोत्तरी कर दी है।
-ईश्वर, सुरेश नांगलिया किराना स्टोर
अभी तक महम से माल भेजने पर खर्चा 100 रुपये प्रति क्विंटल था। डीजल के रेट बढ़ने की वजह से अब महम तक माल पहुंचाने का भाड़ा 120 और 130 रुपये लिया जा रहा है।
-विनोद कुमार, महमिया बेसन मिल
जब हम बढ़ा हुआ भाड़ा दे रहे हैं, तो यह स्वाभाविक है कि कीमत बढ़ाकर ही बाजार में सामान की बिक्री की जाएगी। कुछ ही दिनों के अंदर बाजार में सामान की कीमतें बढ़ी दिखने लगेंगी।
-राहुल, राधा किशन राजकुमार
अब बाहर से माल ही महंगा आ रहा है। जब व्यापारियों की दुकानों पर माल भेजा जाता है, तो ट्रांसपोर्टर्स बढ़ा किराया ले रहा है। इससे तय है कि सारे खर्चे व लाभ मिलाकर ही बाजार में माल बिकेगा।
-प्रवीन जिंदल, जिंदल ट्रेडिंग कंपनी
अप्रैल से एक तारीख पर प्रति लीटर डीजल के दाम
एक अप्रैल 65.36 रुपये
एक मई 66.72 रुपये
एक जून 70.08 रुपये
एक जुलाई 68.39 रुपये
एक अगस्त 68.86 रुपये
एक सितंबर 71.48 रुपये
दो सितंबर 71.81 रुपये
तीन सितंबर 72.18 रुपये
चार सितंबर 72.37 रुपये
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थोक बाजार की कीमतों में दिखने लगा अंतर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक । डीजल के दामों में लगातार वृद्धि का असर अब बाजार में दिखने लगा है। ट्रांसपोर्टर्स ने माल ढुलाई भाड़ा 10 से 15 फीसदी तक बढ़ा दिया है। ट्रांसपोर्ट से इंट्रा स्टेट (हरियाणा में) ढुलाई आठ पैसे प्रति किलो तो इंटर स्टेट (हरियाणा से बाहर) 15 पैसे प्रति किलो के हिसाब से बढ़ गई है। माल की ढुलाई भी काफी बढ़ गई है, जिसका असर थोक बाजार में दिखने लगा है।
डीजल के दामों में अप्रैल से लगातार वृद्धि होती जा रही है। जून व जुलाई में मामूली राहत मिली थी। लगातार धीरे-धीरे कीमतें बढ़ने की वजह से मंगलवार को डीजल 72.37 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बढ़ा। वहीं, ट्रांसपोर्ट कारोबार प्रभावित होने लगा। इसके लेकर ट्रांसपोर्टर्स को एक साल के लिए कंपनियों और थोक कारोबारियों से होने वाले कांट्रेक्ट पर रेट बढ़ाने का फैसला लिया। बताते हैं कि थोक कारोबारियों व कंपनियों ने कांस्ट्रेक्ट रेट बढ़ाने से इनकार किया तो ट्रांसपोर्टर्स ने माल ढुलाई करने से इनकार कर दिया। एक सितंबर से ट्रांसपोर्टर्स ने इंट्रा स्टेट माल ढुलाई भाड़ा आठ पैसे प्रति किलो बढ़ा दिया है, जो 88 पैसे हो गया है। वहीं इंटर स्टेट 16 पैसे बढ़ाया है, जो 1.62 रुपये प्रति किलो हो गया है। वहीं, लोकल ढुलाई करने वाले लोडरों ने 50 से 60 रुपये तक की बढ़ोत्तरी कर दी है, जिससे थोक और फुटकर कारोबार पर असर दिखने लगा है। सामानों की कीमतों में उछाल आने लगा है।
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खर्चा निकालना मुश्किल, यही हाल रहा तो करने पड़ेंगे रेट रिवाइज
रोहतक। पेट्रो पदार्थों के दाम बढ़ने पर जब ट्रांसपोर्टर्स से बात की गई तो सबने महंगाई का हवाला देते हुए अपनी परेशानी बताई। उन्होंने ने कहा कि भाड़े में वृद्धि नहीं करते तो दिक्कत होती। यदि फिर रेट बढ़े तो हमें मजबूरन रेट रिवाइज करने पड़ेंगे।
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डीजल के लगातार बढ़ रहे दामों की वजह से ट्रांसपोर्ट का खर्चा निकालना मुश्किल हो रहा था। चूंकि दूसरे राज्यों में माल सप्लाई करने वालों से एक साल का रेट कांट्रेक्ट होता है, इसलिए बढ़ाने में दिक्कत हो रही थी। मगर हालात को देखकर उन्होंने भी कांट्रेक्ट रिवाइज करना शुरू कर दिया है।
-गुरु चरन सिंह, प्रधान ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
जिस तरह से धीरे-धीरे करके डीजल के रेट बढ़ रहे हैं, उससे समझ नहीं आ रहा कि आखिर क्या रेट तय किया जाए। फिलहाल तो 10 फीसदी तक भाड़े में वृद्धि कर दी है। यदि यही हालात रहे तो मजबूरन दोबारा से रेट रिवाइज करने पड़ जाएंगे, अन्यथा आर्थिक स्थिति गड़बड़ा जाएगी।
-गोविंदर सिंह, बिंद्रा कैरियर
हम राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तक ट्रकों से माल की ढुलाई करते हैं। स्थिति यह हो गई थी कि जब ट्रक लौटकर आता था, तो पता चलता था कि मुनाफा होने के बजाए जेब से पैसा जा रहा है। जिसकी वजह से मजबूर होकर माल ढुलाई के रेट को बढ़ाना पड़ा है।
-सुरेंद्र शर्मा, मारुति मोटर्स
डीजल के दाम एक साल के अंदर इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि बड़ा ही मुश्किल हो रहा है ट्रांसपोर्ट का काम करना। खर्चा निकालना मुश्किल हो रहा था, जिसकी वजह से कांट्रैक्ट रेट को बढ़ाना पड़ा है। यदि ऐसा नहीं करते तो मजबूर होकर काम ही बंद करना पड़ता।
नरेंद्र, इंद्रप्रस्थ पैप्सू सर्विस
ये कहना है थोक बाजार के कारोबारियों का
थोक में बाहर से आने वाले माल के दामों की कीमत बढ़ गई है, क्योंकि ट्रांसपोर्टर्स ने भाड़ा बढ़ा दिया है। यही नहीं, माल ढुलाई करने वालों ने भी कीमतों में काफी बढ़ोत्तरी कर दी है।
-ईश्वर, सुरेश नांगलिया किराना स्टोर
अभी तक महम से माल भेजने पर खर्चा 100 रुपये प्रति क्विंटल था। डीजल के रेट बढ़ने की वजह से अब महम तक माल पहुंचाने का भाड़ा 120 और 130 रुपये लिया जा रहा है।
-विनोद कुमार, महमिया बेसन मिल
जब हम बढ़ा हुआ भाड़ा दे रहे हैं, तो यह स्वाभाविक है कि कीमत बढ़ाकर ही बाजार में सामान की बिक्री की जाएगी। कुछ ही दिनों के अंदर बाजार में सामान की कीमतें बढ़ी दिखने लगेंगी।
-राहुल, राधा किशन राजकुमार
अब बाहर से माल ही महंगा आ रहा है। जब व्यापारियों की दुकानों पर माल भेजा जाता है, तो ट्रांसपोर्टर्स बढ़ा किराया ले रहा है। इससे तय है कि सारे खर्चे व लाभ मिलाकर ही बाजार में माल बिकेगा।
-प्रवीन जिंदल, जिंदल ट्रेडिंग कंपनी
अप्रैल से एक तारीख पर प्रति लीटर डीजल के दाम
एक अप्रैल 65.36 रुपये
एक मई 66.72 रुपये
एक जून 70.08 रुपये
एक जुलाई 68.39 रुपये
एक अगस्त 68.86 रुपये
एक सितंबर 71.48 रुपये
दो सितंबर 71.81 रुपये
तीन सितंबर 72.18 रुपये
चार सितंबर 72.37 रुपये