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रामपाल के खिलाफ हत्या के मामले में अदालत में गवाही
Updated Fri, 23 Feb 2018 02:28 AM IST
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फ्लैग : रामपाल के खिलाफ हत्या का मामला, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई
हेडिंग : 12 साल से संभाले 40 किलो ईंट-रोड़े और 16 लाठियां लेकर अदालत पहुंची पुलिस
: गवाही देते समय एएसआई ने बोले, यही बरामद किए थे घटनास्थल से
: बचाव पक्ष का वकील बोला, कहीं भी मिल जाएंगे ये रोड़े व लाठी, रामपाल का मार्का है क्या
: अब केस की अगली सुनवाई 16 मार्च को
: 2006 में करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर ग्रामीणों व रामपाल समर्थकों के बीच हुई थी हिंसा
: झज्जर के युवक सोनू की हुई थी गोली लगने से मौत
अमर उजाला ब्यूरो
विजेंद्र कौशिक।
करौंथा के सतलोक आश्रम के संत रामपाल सहित 27 समर्थकों के खिलाफ हत्या के मामले में पुलिस वीरवार को दो कट्टों में भरे 40 किलो ईंट व रोड और 16 लाठियां लेकर कोर्ट पहुंची। केस के प्रथम जांच अधिकारी और अहम गवाह एएसआई रघुबीर सिंह ने 12 साल पहले बरामद सामान की शिनाख्त की।
सरकारी वकील एडवोकेट नरेश कुमार ने बताया कि अदालत के अंदर दाखिल चालान में पुलिस ने साफ किया था कि हिंसा के बाद सदर थाने में तैनात एएसआई रघुबीर सिंह को हिंसा की सूचना मिली। वे पीजीआई पहुंचे, जहां झज्जर जिले के गांव बाघपुर निवासी सोनू का शव मिला, जबकि 57 लोग घायल थे। वहीं पर मृतक के परिजनों व घायलों के बयान दर्ज किए। इसके बाद वे घटनास्थल पर पहुंचे। घटनास्थल की जांच के दौरान आश्रम की छत से ईंट और रोड़े बरामद किए। साथ ही आश्रम के अंदर और बाहर से 16 लाठियां व एक लोहे की राड मिली। सभी को कब्जे में लिया गया। वीरवार को प्रथम गवाह एएसआई रघुबीर ने चालान में दर्ज कराए बयानों को दोहराया।
ऐसी लाठियां हर घर में मिल जातीं: रामपाल का वकील
बचाव पक्ष के वकील वीरेंद्र देशवाल ने गवाह से पूछा, इस तरह के रोड़े व पत्थर कहीं भी सड़क किनारे मिल जाएंगे। साथ ही लाठियां भी घर-घर मिल सकती हैं। ईंट-रोड़े व लाठियों पर रामपाल का मार्का नहीं बना है कि वे आश्रम में ही तैयार की गई हैं। दूसरा, आश्रम की छत पिरामिड टाइप है, जो लोहे की टीन डालकर बनाई गई। उसके ऊपर ईंट व पत्थर नहीं रुक सकते। ऐसे में बरामद ईंट-पत्थर और लाठियों के कोई मायने नहीं हैं।
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वीडियो कांफ्रेंसिंग से लगी रामपाल की हाजिरी, पुलिस नहीं लेकर आई वीसी सिस्टम
उधर, वीरवार को भी पुलिस अदालत के अंदर अपना वीसी सिस्टम नहीं लेकर पहुंची। कोर्ट को जिला अदालत में बने कॉमन वीडियो कांफ्रेंसिंग सिस्टम से माध्यम से रामपाल की हाजिरी लगवानी पड़ी। बता दें कि पिछली सुनवाई पर 12 जनवरी को एडीजे अश्वनी कुमार की कोर्ट ने पुलिस द्वारा वीडियो सिस्टम न लेकर आने पर कड़ी फटकार लगाई थी। साथ ही आदेश दिए थे कि रामपाल को व्यक्तिगत तौर पर 17 जनवरी को अदालत में पेश किया जाए, लेकिन इससे पहले ही पुलिस की तरफ से कानून व्यवस्था का हवाला देकर रामपाल को पेश करने में असमर्थता जाहिर की थी। इसके बावजूद सैकड़ों रामपाल समर्थक रोहतक पहुंच गए थे। वहीं अब केस की अगली सुनवाई 16 मार्च को
यह रहा मामला
संत रामपाल ने सबसे पहले करौंथा में सतलोक आश्रम बनाया था। 2003 के बाद स्वामी दयानंद द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर कथित टिप्पणी को लेकर आर्य समाजियों और रामपाल समर्थकों के बीच तनाव पैदा होने लगा था। 2006 में यह तनाव चरम पर पहुंच गया। करौंथ के सतलोक आश्रम के बाहर सैकड़ों आर्य समाजी व आसपास के ग्रामीण एकत्रित हो गए, जबकि दूसरी तरफ सैकड़ों रामपाल समर्थक आश्रम के अंदर थे। हिंसा में बेरी के नजदीक गांव बाघपुर के युवक सोनू की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने रामपाल सहित 27 लोगों के खिलाफ सदर थाने में हत्या का केस दर्ज किया था, जिसकी आज भी अदालत के अंदर सुनवाई चल रही है।
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फ्लैग : रामपाल के खिलाफ हत्या का मामला, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई
हेडिंग : 12 साल से संभाले 40 किलो ईंट-रोड़े और 16 लाठियां लेकर अदालत पहुंची पुलिस
: गवाही देते समय एएसआई ने बोले, यही बरामद किए थे घटनास्थल से
: बचाव पक्ष का वकील बोला, कहीं भी मिल जाएंगे ये रोड़े व लाठी, रामपाल का मार्का है क्या
: अब केस की अगली सुनवाई 16 मार्च को
: 2006 में करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर ग्रामीणों व रामपाल समर्थकों के बीच हुई थी हिंसा
: झज्जर के युवक सोनू की हुई थी गोली लगने से मौत
अमर उजाला ब्यूरो
विजेंद्र कौशिक।
करौंथा के सतलोक आश्रम के संत रामपाल सहित 27 समर्थकों के खिलाफ हत्या के मामले में पुलिस वीरवार को दो कट्टों में भरे 40 किलो ईंट व रोड और 16 लाठियां लेकर कोर्ट पहुंची। केस के प्रथम जांच अधिकारी और अहम गवाह एएसआई रघुबीर सिंह ने 12 साल पहले बरामद सामान की शिनाख्त की।
सरकारी वकील एडवोकेट नरेश कुमार ने बताया कि अदालत के अंदर दाखिल चालान में पुलिस ने साफ किया था कि हिंसा के बाद सदर थाने में तैनात एएसआई रघुबीर सिंह को हिंसा की सूचना मिली। वे पीजीआई पहुंचे, जहां झज्जर जिले के गांव बाघपुर निवासी सोनू का शव मिला, जबकि 57 लोग घायल थे। वहीं पर मृतक के परिजनों व घायलों के बयान दर्ज किए। इसके बाद वे घटनास्थल पर पहुंचे। घटनास्थल की जांच के दौरान आश्रम की छत से ईंट और रोड़े बरामद किए। साथ ही आश्रम के अंदर और बाहर से 16 लाठियां व एक लोहे की राड मिली। सभी को कब्जे में लिया गया। वीरवार को प्रथम गवाह एएसआई रघुबीर ने चालान में दर्ज कराए बयानों को दोहराया।
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ऐसी लाठियां हर घर में मिल जातीं: रामपाल का वकील
बचाव पक्ष के वकील वीरेंद्र देशवाल ने गवाह से पूछा, इस तरह के रोड़े व पत्थर कहीं भी सड़क किनारे मिल जाएंगे। साथ ही लाठियां भी घर-घर मिल सकती हैं। ईंट-रोड़े व लाठियों पर रामपाल का मार्का नहीं बना है कि वे आश्रम में ही तैयार की गई हैं। दूसरा, आश्रम की छत पिरामिड टाइप है, जो लोहे की टीन डालकर बनाई गई। उसके ऊपर ईंट व पत्थर नहीं रुक सकते। ऐसे में बरामद ईंट-पत्थर और लाठियों के कोई मायने नहीं हैं।
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वीडियो कांफ्रेंसिंग से लगी रामपाल की हाजिरी, पुलिस नहीं लेकर आई वीसी सिस्टम
उधर, वीरवार को भी पुलिस अदालत के अंदर अपना वीसी सिस्टम नहीं लेकर पहुंची। कोर्ट को जिला अदालत में बने कॉमन वीडियो कांफ्रेंसिंग सिस्टम से माध्यम से रामपाल की हाजिरी लगवानी पड़ी। बता दें कि पिछली सुनवाई पर 12 जनवरी को एडीजे अश्वनी कुमार की कोर्ट ने पुलिस द्वारा वीडियो सिस्टम न लेकर आने पर कड़ी फटकार लगाई थी। साथ ही आदेश दिए थे कि रामपाल को व्यक्तिगत तौर पर 17 जनवरी को अदालत में पेश किया जाए, लेकिन इससे पहले ही पुलिस की तरफ से कानून व्यवस्था का हवाला देकर रामपाल को पेश करने में असमर्थता जाहिर की थी। इसके बावजूद सैकड़ों रामपाल समर्थक रोहतक पहुंच गए थे। वहीं अब केस की अगली सुनवाई 16 मार्च को
यह रहा मामला
संत रामपाल ने सबसे पहले करौंथा में सतलोक आश्रम बनाया था। 2003 के बाद स्वामी दयानंद द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर कथित टिप्पणी को लेकर आर्य समाजियों और रामपाल समर्थकों के बीच तनाव पैदा होने लगा था। 2006 में यह तनाव चरम पर पहुंच गया। करौंथ के सतलोक आश्रम के बाहर सैकड़ों आर्य समाजी व आसपास के ग्रामीण एकत्रित हो गए, जबकि दूसरी तरफ सैकड़ों रामपाल समर्थक आश्रम के अंदर थे। हिंसा में बेरी के नजदीक गांव बाघपुर के युवक सोनू की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने रामपाल सहित 27 लोगों के खिलाफ सदर थाने में हत्या का केस दर्ज किया था, जिसकी आज भी अदालत के अंदर सुनवाई चल रही है।