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बॉटनार
Updated Sat, 25 Aug 2018 03:00 AM IST
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फोटो सहित
बच्चों के सुरक्षा के लिए वैश्विक स्ट्रीट डिजाइन के सिद्धांत रोहतक में होंगे लागू
- डब्ल्युआरआई और सरकारी विभागों की इंजीनियरों की टीम ने शीला बाइपास पर किया साइट ऑडिट
- बॉटनार सेफर कम्यूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन प्रोजेक्ट के तहत रोहतक में दो वर्ष का टॉयल चल रहा है
- वर्कशॉप में बताया गया कि किस तरह इंजीनियरों के सहयोग से बच्चों का सफर सुरक्षित हो सकता है
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। बॉटनर सेफर कम्यूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन प्रोजेक्ट के तहत रोहतक में वैश्विक स्ट्रीट डिजाइन लागू करने की दिशा में जिला प्रशासन ने कदम बढ़ा दिए हैं। इस संदर्भ में शुक्रवार को महाराज होटल में वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया (डब्ल्युआरआई), जिला प्रशासन और सड़क निर्माण से जुड़ी सरकारी संस्थाओं के इंजीनियरों की एक कार्यशाला हुई। जिसमें बताया गया कि किस तरह इंजीनियर और इंजीनियरिंग के जरिए बच्चों के लिए सड़कों को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है। इसके साथ ही इंजीनियरों के साथ डब्ल्युआरआई के अधिकारियों ने टीमों में बंटकर शहर की सड़कों का ऑडिट किया और बच्चों का सफर सुरक्षित बनाने में आ रहीं अड़चनों का पता लगाया।
कार्यशाला का आयोजन उपायुक्त डा. यश गर्ग की अध्यक्षता में किया गया। इस मौके पर डीएसपी डा. रविंद्र कुमार भी मौजूद रहे। उपायुक्त ने कहा कि बॉटनार प्रोजेक्ट देश में अपनी तरह की पहली योजना है, जो अन्य राज्यों एवं शहरों के लिए मॉडल साबित होगी। उन्होंने सुरक्षित सफर के लिए सड़कों की डिजाइन और इंजीनियरों की भूमिका के महत्व पर जोर दिया। जिससे बच्चों के लिए सुरक्षित सड़कों का बुनियादी ढांचा मिल सके। डब्ल्युआरआई ने परियोजना के लिए पांच स्कूलों का चयन किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत सड़क के वैश्विक डिजाइन के सिद्धांतों को रोहतक में लागू किया जाएगा।
डब्ल्युआरआई के रिसर्च कंसल्टेंट निशांत भटनागर ने बताया कि एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, एचएचआईआईडीसी के इंजीनियरों शामिल रहे। उन्हें पांच टीमों में बांटकर शीला बाईपास चौक की सभी दिशाओं में 500 मीटर तक ऑडिट कराया गया। सभी टीमों ने लौटकर पैदल चलने वालों, साइकिल चलाने वालों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट से चलने वालें, निजी वाहनों से चलने वालों और जमीन के उपयोग पर अपने विचार रखे। अतिक्रमण, साइन बोर्ड, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन, अवैध पार्किंग जैसे कई मुद्दे सामने आई।
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बच्चों के सुरक्षा के लिए वैश्विक स्ट्रीट डिजाइन के सिद्धांत रोहतक में होंगे लागू
- डब्ल्युआरआई और सरकारी विभागों की इंजीनियरों की टीम ने शीला बाइपास पर किया साइट ऑडिट
- बॉटनार सेफर कम्यूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन प्रोजेक्ट के तहत रोहतक में दो वर्ष का टॉयल चल रहा है
- वर्कशॉप में बताया गया कि किस तरह इंजीनियरों के सहयोग से बच्चों का सफर सुरक्षित हो सकता है
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। बॉटनर सेफर कम्यूट फॉर स्कूल चिल्ड्रेन प्रोजेक्ट के तहत रोहतक में वैश्विक स्ट्रीट डिजाइन लागू करने की दिशा में जिला प्रशासन ने कदम बढ़ा दिए हैं। इस संदर्भ में शुक्रवार को महाराज होटल में वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया (डब्ल्युआरआई), जिला प्रशासन और सड़क निर्माण से जुड़ी सरकारी संस्थाओं के इंजीनियरों की एक कार्यशाला हुई। जिसमें बताया गया कि किस तरह इंजीनियर और इंजीनियरिंग के जरिए बच्चों के लिए सड़कों को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है। इसके साथ ही इंजीनियरों के साथ डब्ल्युआरआई के अधिकारियों ने टीमों में बंटकर शहर की सड़कों का ऑडिट किया और बच्चों का सफर सुरक्षित बनाने में आ रहीं अड़चनों का पता लगाया।
कार्यशाला का आयोजन उपायुक्त डा. यश गर्ग की अध्यक्षता में किया गया। इस मौके पर डीएसपी डा. रविंद्र कुमार भी मौजूद रहे। उपायुक्त ने कहा कि बॉटनार प्रोजेक्ट देश में अपनी तरह की पहली योजना है, जो अन्य राज्यों एवं शहरों के लिए मॉडल साबित होगी। उन्होंने सुरक्षित सफर के लिए सड़कों की डिजाइन और इंजीनियरों की भूमिका के महत्व पर जोर दिया। जिससे बच्चों के लिए सुरक्षित सड़कों का बुनियादी ढांचा मिल सके। डब्ल्युआरआई ने परियोजना के लिए पांच स्कूलों का चयन किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत सड़क के वैश्विक डिजाइन के सिद्धांतों को रोहतक में लागू किया जाएगा।
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डब्ल्युआरआई के रिसर्च कंसल्टेंट निशांत भटनागर ने बताया कि एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, एचएचआईआईडीसी के इंजीनियरों शामिल रहे। उन्हें पांच टीमों में बांटकर शीला बाईपास चौक की सभी दिशाओं में 500 मीटर तक ऑडिट कराया गया। सभी टीमों ने लौटकर पैदल चलने वालों, साइकिल चलाने वालों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट से चलने वालें, निजी वाहनों से चलने वालों और जमीन के उपयोग पर अपने विचार रखे। अतिक्रमण, साइन बोर्ड, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन, अवैध पार्किंग जैसे कई मुद्दे सामने आई।
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