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कई महिलाओं की मांग हो गई सूनी, आम लोग भी रंजिश की आग में झुलस गए
Updated Sun, 29 Apr 2018 02:24 AM IST
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कई महिलाओं की मांग हुई सूनी, आम लोग भी रंजिश की आग में झुलसे
-12 से अधिक विधवाएं गांव मे हरकर किसी तरह कर रही परिवार का पालन पोषण
- रंजिश वाले परिवारों के साथ बैठना भी ग्रामीणों को पड़ा भारी
महबूब अली
रोहतक।
कारौर गांव की रंजिश में अब तक 12 से अधिक महिलाओं की जहां मांग सूनी हो गई। वहीं रंजिश वाले परिवारों के साथ बैठने वाले तीन लोग भी काल के गाल में समा गए। एक परिवार में तो कमाने वाला सदस्य नहीं रहा था शादीशुदा बहन ने खुद ही परिवार के पालन पोषण का जिम्मा लिया। अधिक तर पीड़ित परिवार बच्चों को दहशत के कारण दिल्ली या फिर बाहरी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर है।
कारौर गांव का नाम सुनते ही लोग कांप उठते है। यहां पर दशकों से चली आ रही रंजिश में अब तक अनिल व आनंद पक्ष के 18 लोगो की मौत हो चुकी है। वहीं तीन ऐसे लोग भी काल के गाल मे समा गए, जिनका रंजिश से कोई लेना देना नहीं था। गांव की रोशनी दीपावली वाले दिन राजेश के घर पर बैठी थी। इसी बीच विपक्षियों ने हमला बोल दिया था। जिसमें रोशनी की मौत हो गई थी। जबकि रोशनी का दोनों परिवारों से कोई लेना देना नहीं था। इसी तरह जेल से लौटते समय श्रीभगवान, उसके भाई व चिड़ी गांव के फौजी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जबकि फौजी का दोनों परिवारों से कोई लेना देना नहीं था। इसी तरह आनंद के यहां पर काम करने वाले दिलबाग की भी हत्या कर दी गई थी।
रंजिश में हत्या के चलते आनंद की पत्नी मुकेश, तिलकराम की पत्नी कमला, जय भगवान की पत्नी कमलेश, राजेश, छज्जाराम, रामनिवास व उसे दो भाईयों समेत 12 से अधिक महिलाओं की मांग पतियों की हत्या के कारण सूनी हो चुकी है। गांव में रह रहे परिवार रंजिश के कारण बच्चों को दिल्ली या फिर हरियाणा के विभिन्न स्थानों पर पढाई करा रहे है। ताकि बच्चों तक रंजिश की आग न पहुंच सके।
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खुद ही भाई के परिवार का सहारा बन गई सुदेश
रंजिश के कारण कारौर में पूर्व सरपंच राजेश की पत्नी रानी व गांव की महिला रोशन की हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि इसके बाद हत्या के मामले में राजेश भी जेल में सजा काट रहे है। परिवार में बेटी छोटी, आरती, बेटा आशीष व आदर्श है। राजेश की बहन सुदेश ने परिवार के पालन पोषण करने की ठान ली। खुद गांव में रहकर सुदेश ही परिवार का पालन पोषण कर रही है। सुदेश के पिता बीएसएफ में तैनात है।
घटना के समय कार में दुबक थी आनंद की पत्नी
आनंद की पत्नी मुकेश ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा है कि पति के साथ कार में सवार होकर वह भी खेतों में जा रही थी। इसी बीच दो कार सवारों ने उन दोनेां की कार को घेर लिया। पति की बेल्ट में ही उसका लाइसेंसी हथियार था। इसके बाद बदमाशों ने गोली चलानी शुरु कर दी। पति असलाह लेकर खेतों की तरफ दौड़ने लगे तथा वह कार में ही छिप गई। बीस लोगों ने पति की खेतों में ही गोलियों से भूनकर हत्या कर दी तथा मौके से फरार हो गए। दावा किया कि जेल में बंद अनिल, संदीप ने ही हत्याकांड को अंजाम दिलवाया। पुलिस जांच में जुट गई है।
इनके खिलाफ दर्ज किया गया मुकदमा
अनिल, संदीप जठेली, पलडा निवासी अक्षय, सम्पत, नाहरा निवासी पवन, बसोदी निवासी प्रदीप, राजू, कारौर निवासी जयप्रकाश, जय भगवान, बलजीत, विकास, अंकित, मोहित, प्रदीप, कुकी, संदीप, विकास, राजकुमार, रोहित समेत बीस के खिलाफ।
मम्मी मेरे पापा कहा है
आनंद की मौत के बाद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। उसका मासूम पुत्र नीशू तो बारबार पापा को ही पुकार रहा है। आनंद के भाई धर्मपाल ने बताया कि अंशूल व निशू का रो रो कर भी बुरा हाल है। नीशू को नहीं पता है कि अब उसके पापा दस दुनिया में नहीं रहे है। हर किसी की आंखें नीशू को देखकर नम हो रही है।
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-12 से अधिक विधवाएं गांव मे हरकर किसी तरह कर रही परिवार का पालन पोषण
- रंजिश वाले परिवारों के साथ बैठना भी ग्रामीणों को पड़ा भारी
महबूब अली
रोहतक।
कारौर गांव की रंजिश में अब तक 12 से अधिक महिलाओं की जहां मांग सूनी हो गई। वहीं रंजिश वाले परिवारों के साथ बैठने वाले तीन लोग भी काल के गाल में समा गए। एक परिवार में तो कमाने वाला सदस्य नहीं रहा था शादीशुदा बहन ने खुद ही परिवार के पालन पोषण का जिम्मा लिया। अधिक तर पीड़ित परिवार बच्चों को दहशत के कारण दिल्ली या फिर बाहरी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर है।
कारौर गांव का नाम सुनते ही लोग कांप उठते है। यहां पर दशकों से चली आ रही रंजिश में अब तक अनिल व आनंद पक्ष के 18 लोगो की मौत हो चुकी है। वहीं तीन ऐसे लोग भी काल के गाल मे समा गए, जिनका रंजिश से कोई लेना देना नहीं था। गांव की रोशनी दीपावली वाले दिन राजेश के घर पर बैठी थी। इसी बीच विपक्षियों ने हमला बोल दिया था। जिसमें रोशनी की मौत हो गई थी। जबकि रोशनी का दोनों परिवारों से कोई लेना देना नहीं था। इसी तरह जेल से लौटते समय श्रीभगवान, उसके भाई व चिड़ी गांव के फौजी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जबकि फौजी का दोनों परिवारों से कोई लेना देना नहीं था। इसी तरह आनंद के यहां पर काम करने वाले दिलबाग की भी हत्या कर दी गई थी।
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रंजिश में हत्या के चलते आनंद की पत्नी मुकेश, तिलकराम की पत्नी कमला, जय भगवान की पत्नी कमलेश, राजेश, छज्जाराम, रामनिवास व उसे दो भाईयों समेत 12 से अधिक महिलाओं की मांग पतियों की हत्या के कारण सूनी हो चुकी है। गांव में रह रहे परिवार रंजिश के कारण बच्चों को दिल्ली या फिर हरियाणा के विभिन्न स्थानों पर पढाई करा रहे है। ताकि बच्चों तक रंजिश की आग न पहुंच सके।
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खुद ही भाई के परिवार का सहारा बन गई सुदेश
रंजिश के कारण कारौर में पूर्व सरपंच राजेश की पत्नी रानी व गांव की महिला रोशन की हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि इसके बाद हत्या के मामले में राजेश भी जेल में सजा काट रहे है। परिवार में बेटी छोटी, आरती, बेटा आशीष व आदर्श है। राजेश की बहन सुदेश ने परिवार के पालन पोषण करने की ठान ली। खुद गांव में रहकर सुदेश ही परिवार का पालन पोषण कर रही है। सुदेश के पिता बीएसएफ में तैनात है।
घटना के समय कार में दुबक थी आनंद की पत्नी
आनंद की पत्नी मुकेश ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा है कि पति के साथ कार में सवार होकर वह भी खेतों में जा रही थी। इसी बीच दो कार सवारों ने उन दोनेां की कार को घेर लिया। पति की बेल्ट में ही उसका लाइसेंसी हथियार था। इसके बाद बदमाशों ने गोली चलानी शुरु कर दी। पति असलाह लेकर खेतों की तरफ दौड़ने लगे तथा वह कार में ही छिप गई। बीस लोगों ने पति की खेतों में ही गोलियों से भूनकर हत्या कर दी तथा मौके से फरार हो गए। दावा किया कि जेल में बंद अनिल, संदीप ने ही हत्याकांड को अंजाम दिलवाया। पुलिस जांच में जुट गई है।
इनके खिलाफ दर्ज किया गया मुकदमा
अनिल, संदीप जठेली, पलडा निवासी अक्षय, सम्पत, नाहरा निवासी पवन, बसोदी निवासी प्रदीप, राजू, कारौर निवासी जयप्रकाश, जय भगवान, बलजीत, विकास, अंकित, मोहित, प्रदीप, कुकी, संदीप, विकास, राजकुमार, रोहित समेत बीस के खिलाफ।
मम्मी मेरे पापा कहा है
आनंद की मौत के बाद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। उसका मासूम पुत्र नीशू तो बारबार पापा को ही पुकार रहा है। आनंद के भाई धर्मपाल ने बताया कि अंशूल व निशू का रो रो कर भी बुरा हाल है। नीशू को नहीं पता है कि अब उसके पापा दस दुनिया में नहीं रहे है। हर किसी की आंखें नीशू को देखकर नम हो रही है।