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दो भाइयों ने धोखाधड़ी कर 15 लाख रुपये ठगे
Updated Sat, 01 Jul 2017 01:59 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। खेड़ी महम निवासी दो भाइयों ने एक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी करके उससे 15 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने मकान बेचने के नाम पर पीड़ित से 15 लाख रुपये एडवांस ले लिए। इसके बाद मकान किसी अन्य को बेच दिया। इस संबंध में सिविल लाइन थाने मेें आरोपी सुधाकर और उसके भाई सतप्रिय के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
पुलिस को दी शिकायत में महम के वार्ड नंबर 9 निवासी सुरेंद्र ने बताया कि 28 दिसंबर 2015 को उसने महम के खेड़ी निवासी सुधाकर से मकान खरीदा था। यह मकान अमृत कॉलोनी में है। यह सौदा दस लाख रुपये में तय हुआ था। इस पर सुरेंद्र ने सुधाकर को नौ लाख रुपये बयाने के तौर पर दिए थे। बाकी रजिस्ट्री के समय देने की बात तय हुई थी।
रजिस्ट्री करवाने का समय 28 जून 2017 तय हुआ था। सुरेंद्र का आरोप है कि सुधाकर ने 7 दिसंबर 2016 को यह मकान भैणी चंद्रपाल की अनीता को बेच दिया। जब सुरेंद्र को पूरे मामले का पता चला तो उसने अपने रुपये मांगे। लेकिन सुधाकर ने न तो रुपये दिये और न ही मकान। सुरेंद्र का आरोप है कि सुधाकर के भाई ने भी धोखाधड़ी करके उससे छह लाख रुपये हड़प लिए। 15 मार्च 2016 को सुधाकर के भाई सतप्रिय से भी एक मकान का सौदा हुआ था। इसकी कीमत आठ लाख रुपये तय हुई थी।
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उसने सतप्रिय को छह लाख रुपये बयाना के तौर पर दिए थे। इसकी रजिस्ट्री भी 28 जून 2017 को होनी थी, लेकिन सतप्रिय ने भी 5 अक्तूबर 2016 को करौंथा की अमरजीत को मकान बेच दिया। दोनों भाइयों ने सुरेंद्र से धोखाधड़ी करके 15 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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रोहतक। खेड़ी महम निवासी दो भाइयों ने एक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी करके उससे 15 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने मकान बेचने के नाम पर पीड़ित से 15 लाख रुपये एडवांस ले लिए। इसके बाद मकान किसी अन्य को बेच दिया। इस संबंध में सिविल लाइन थाने मेें आरोपी सुधाकर और उसके भाई सतप्रिय के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
पुलिस को दी शिकायत में महम के वार्ड नंबर 9 निवासी सुरेंद्र ने बताया कि 28 दिसंबर 2015 को उसने महम के खेड़ी निवासी सुधाकर से मकान खरीदा था। यह मकान अमृत कॉलोनी में है। यह सौदा दस लाख रुपये में तय हुआ था। इस पर सुरेंद्र ने सुधाकर को नौ लाख रुपये बयाने के तौर पर दिए थे। बाकी रजिस्ट्री के समय देने की बात तय हुई थी।
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रजिस्ट्री करवाने का समय 28 जून 2017 तय हुआ था। सुरेंद्र का आरोप है कि सुधाकर ने 7 दिसंबर 2016 को यह मकान भैणी चंद्रपाल की अनीता को बेच दिया। जब सुरेंद्र को पूरे मामले का पता चला तो उसने अपने रुपये मांगे। लेकिन सुधाकर ने न तो रुपये दिये और न ही मकान। सुरेंद्र का आरोप है कि सुधाकर के भाई ने भी धोखाधड़ी करके उससे छह लाख रुपये हड़प लिए। 15 मार्च 2016 को सुधाकर के भाई सतप्रिय से भी एक मकान का सौदा हुआ था। इसकी कीमत आठ लाख रुपये तय हुई थी।
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उसने सतप्रिय को छह लाख रुपये बयाना के तौर पर दिए थे। इसकी रजिस्ट्री भी 28 जून 2017 को होनी थी, लेकिन सतप्रिय ने भी 5 अक्तूबर 2016 को करौंथा की अमरजीत को मकान बेच दिया। दोनों भाइयों ने सुरेंद्र से धोखाधड़ी करके 15 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।