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Rohtak News: चिंता...4 साल में दो बड़े रूट पर बस सेवा बंद
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बस अड्डा पर खड़ी रोडवेज की बस। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। रोडवेज डिपो से हर साल अलग-अलग मार्गों पर रोडवेज की बसें कम हो रही हैं। चार साल में दो बड़े रूट जम्मू-कटरा व खाटूश्याम पर रोडवेज बस सेवा बंद हो गई है, वहीं, 10 से अधिक गांवों में भी संचालन कम हो गया है। ऐसे में रोडवेज यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रोडवेज डिपो के बेड़े में करीब 180 बसें हैं। इनमें करीब 39 बसें लीज (किमी स्कीम) की हैं। औसतन इन बसों में 12 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। रोडवेज यूनियनों और कर्मचारियों के अनुसार 15 साल पहले 200 से अधिक बसें होती थीं। वहीं, सहकारी समिति की करीब 52 बसें अब संचालित हो रही हैं, लेकिन इनका समय पर आवागमन न होना, सही मार्ग पर न चलना, यात्रियों के लिए समस्या बन रहा है।
रोडवेज यूनियनों व यात्रियों ने बताया कि चार साल में रोहतक डिपो से जम्मू-कटरा, खाटूश्याम जाने वाली बसें बंद हैं। चंडीगढ़ जाने वाली बसों की संख्या भी कम हो गई है। वहीं, ग्रामीण मार्गों पर भैंसवाल, कारोर, चुलियाणा, झज्जर, चंडीगढ़, सोनीपत, गिझी-अटालय, कटवाड़ा, खिड़वाली मार्ग पर भी रोडवेज की बसों की संख्या कम हुई है। वहीं, दिल्ली व सिरसा मार्ग पर भी पहले से करीब 50 प्रतिशत बसों की संख्या कम हो गई है।
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बेडे़ में डेढ़ माह में शामिल होंगी 30 सामान्य बसें
रोडवेज कर्मशाला प्रबंधक सुरेंद्र सिवाच ने बताया कि डिपो में नई बसें शामिल होनी हैं। करीब 20 सामान्य बसें मिलना प्रस्तावित हैं, जो करीब डेढ़ माह में डिपो को मिल जाएंगी। साथ ही, 10 एसी बसें भी जल्द ही डिपो में पहुंचेंगी। ऐसे में कुल मिलाकर नई बसों की संख्या 30 हो जाएगी।-- -- -- -- -- --
शहर से 18 किमी दूर चुलियाणा में नहीं बस सेवा
चुलियाणा निवासी सोमबीर ने बताया कि शहर से करीब 18 किलोमीटर दूर उनका गांव है। ग्रामीणों को अपने कार्य के लिए शहर आना-जाना पड़ता है। कई बार लिखित पत्र भी दिया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसके साथ ही, कारोर गांव में बस की सुविधा नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय पांच-दस दिन के लिए बस चलने के बाद बंद हो गई थी।
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सभी मार्गों पर पहले की तरह सही ढंग से बसें संचालित हो रही हैं। जिन बड़े मार्गों पर यात्रियों की संख्या कम रही थी, वहां राजस्व न होने से बसें बंद की गई हैं।
- कुलदीप सिंह, मुख्य निरीक्षक, रोडवेज
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सरकार रोडवेज के निजीकरण पर तुली हुई है। आमजन की मांग सिर्फ रोडवेज की बस है। हर साल अलग-अलग बसों का बंद किया जाना चिंताजनक है।
- सुमेर सिवाच, राज्य महासचिव, रोडवेज वर्कर्स यूनियन।
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गांव में कोरोनाकाल से पहले बसों का संचालन सही था। दोपहर को भी बस का आवागमन होता था। अब निरंतर चलने वाली बस भी समय अनुसार नहीं चल रही है। कई बार तो बस आती ही नहीं।
- रोहित जांगड़ा, मोरखेड़ी।
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करीब पांच महीने से बस का संचालन बंद है। शहर के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में जाने वाले विद्यार्थियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
- राजबीर, कारोर।
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रोहतक। रोडवेज डिपो से हर साल अलग-अलग मार्गों पर रोडवेज की बसें कम हो रही हैं। चार साल में दो बड़े रूट जम्मू-कटरा व खाटूश्याम पर रोडवेज बस सेवा बंद हो गई है, वहीं, 10 से अधिक गांवों में भी संचालन कम हो गया है। ऐसे में रोडवेज यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रोडवेज डिपो के बेड़े में करीब 180 बसें हैं। इनमें करीब 39 बसें लीज (किमी स्कीम) की हैं। औसतन इन बसों में 12 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। रोडवेज यूनियनों और कर्मचारियों के अनुसार 15 साल पहले 200 से अधिक बसें होती थीं। वहीं, सहकारी समिति की करीब 52 बसें अब संचालित हो रही हैं, लेकिन इनका समय पर आवागमन न होना, सही मार्ग पर न चलना, यात्रियों के लिए समस्या बन रहा है।
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रोडवेज यूनियनों व यात्रियों ने बताया कि चार साल में रोहतक डिपो से जम्मू-कटरा, खाटूश्याम जाने वाली बसें बंद हैं। चंडीगढ़ जाने वाली बसों की संख्या भी कम हो गई है। वहीं, ग्रामीण मार्गों पर भैंसवाल, कारोर, चुलियाणा, झज्जर, चंडीगढ़, सोनीपत, गिझी-अटालय, कटवाड़ा, खिड़वाली मार्ग पर भी रोडवेज की बसों की संख्या कम हुई है। वहीं, दिल्ली व सिरसा मार्ग पर भी पहले से करीब 50 प्रतिशत बसों की संख्या कम हो गई है।
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बेडे़ में डेढ़ माह में शामिल होंगी 30 सामान्य बसें
रोडवेज कर्मशाला प्रबंधक सुरेंद्र सिवाच ने बताया कि डिपो में नई बसें शामिल होनी हैं। करीब 20 सामान्य बसें मिलना प्रस्तावित हैं, जो करीब डेढ़ माह में डिपो को मिल जाएंगी। साथ ही, 10 एसी बसें भी जल्द ही डिपो में पहुंचेंगी। ऐसे में कुल मिलाकर नई बसों की संख्या 30 हो जाएगी।
शहर से 18 किमी दूर चुलियाणा में नहीं बस सेवा
चुलियाणा निवासी सोमबीर ने बताया कि शहर से करीब 18 किलोमीटर दूर उनका गांव है। ग्रामीणों को अपने कार्य के लिए शहर आना-जाना पड़ता है। कई बार लिखित पत्र भी दिया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसके साथ ही, कारोर गांव में बस की सुविधा नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय पांच-दस दिन के लिए बस चलने के बाद बंद हो गई थी।
सभी मार्गों पर पहले की तरह सही ढंग से बसें संचालित हो रही हैं। जिन बड़े मार्गों पर यात्रियों की संख्या कम रही थी, वहां राजस्व न होने से बसें बंद की गई हैं।
- कुलदीप सिंह, मुख्य निरीक्षक, रोडवेज
सरकार रोडवेज के निजीकरण पर तुली हुई है। आमजन की मांग सिर्फ रोडवेज की बस है। हर साल अलग-अलग बसों का बंद किया जाना चिंताजनक है।
- सुमेर सिवाच, राज्य महासचिव, रोडवेज वर्कर्स यूनियन।
गांव में कोरोनाकाल से पहले बसों का संचालन सही था। दोपहर को भी बस का आवागमन होता था। अब निरंतर चलने वाली बस भी समय अनुसार नहीं चल रही है। कई बार तो बस आती ही नहीं।
- रोहित जांगड़ा, मोरखेड़ी।
करीब पांच महीने से बस का संचालन बंद है। शहर के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में जाने वाले विद्यार्थियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
- राजबीर, कारोर।