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Rohtak News: लाइसेंस गुम होने पर क्लेम नहीं रोक सकती कंपनी, पीड़ित परिवार को 15 लाख मुआवजा ब्याज दिया जाए
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने निर्णय दिया है कि ड्राइविंग लाइसेंस गुम होने पर बीमा कंपनी मुआवजा राशि नहीं रोक सकती। महम चौबीसी के गांव फरमाणा बाहदशाहपुर के युवक नवीन के परिजनों को 15 लाख रुपये रुपये मुआवजा नौ प्रतिशत ब्याज सहित दे। इसके लिए आयोग ने बीमा कंपनी को 15 दिन का समय दिया है।
आयोग के मुताबिक, फरमाणा गांव निवासी दिलबाग सिंह ने अगस्त 2019 को याचिका दायर की थी कि उसके बेटे नवीन ने स्कूटी ले रखी थी, जिसका निजी कंपनी से इंश्योरेंस करवाया था। जनवरी 2018 में नवीन अपने दोस्त विपिन के साथ फरमाणा से गुरुग्राम जा रहा था। रास्ते में धौड़ गांव के नजदीक कैंटर की टक्कर में नवीन व विपिन घायल हो गए। उनको अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां नवीन की मौत हो गई।
झज्जर जिले के दुजाना पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी को मुआवजे के लिए आवेदन किया, लेकिन कंपनी ने यह कहकर मुआवजा देने से इन्कार कर दिया कि नवीन के पास सड़क हादसे के समय ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। पीड़ित ने दुजाना थाने में डीडीआर दर्ज करवाई कि नवीन लाइसेंस अपने पास जेब में रखता था, जो हादसे के दौरान गुम हो गया। आयोग से मांग की कि उसे 15 लाख रुपये की बीमा राशि ब्याज सहित, 25 हजार रुपये हर्जाना व 5500 रुपये कानूनी खर्च दिलवाया जाए। आयोग ने बीमा कंपनी से जवाब मांगा। कंपनी ने कहा कि नवीन की मौत के संबंध में कोई सूचना या अपेक्षित दस्तावेज शिकायतकर्ता ने नहीं दिए। न ही नवीन के पास दुर्घटना के समय वैध ड्राइविंग लाइसेंस था।
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दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आयोग ने निर्णय दिया है कि नवीन के पिता ने डीडीआर दर्ज करवा दी थी कि हादसे के समय ड्राइविंग लाइसेंस नवीन की जेब में था, जो गुम हो गया। दूसरा, सड़क हादसा दूसरे वाहन चालक की लापरवाही से हुआ है। केस में बीमा की शर्त पूरी होती है। ऐसे में नवीन के परिवार को 15 लाख रुपये की मुआवजा राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित दी जाए। 5 हजार रुपये हर्जाना व 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दिए जाएं।
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आयोग के मुताबिक, फरमाणा गांव निवासी दिलबाग सिंह ने अगस्त 2019 को याचिका दायर की थी कि उसके बेटे नवीन ने स्कूटी ले रखी थी, जिसका निजी कंपनी से इंश्योरेंस करवाया था। जनवरी 2018 में नवीन अपने दोस्त विपिन के साथ फरमाणा से गुरुग्राम जा रहा था। रास्ते में धौड़ गांव के नजदीक कैंटर की टक्कर में नवीन व विपिन घायल हो गए। उनको अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां नवीन की मौत हो गई।
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झज्जर जिले के दुजाना पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी को मुआवजे के लिए आवेदन किया, लेकिन कंपनी ने यह कहकर मुआवजा देने से इन्कार कर दिया कि नवीन के पास सड़क हादसे के समय ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। पीड़ित ने दुजाना थाने में डीडीआर दर्ज करवाई कि नवीन लाइसेंस अपने पास जेब में रखता था, जो हादसे के दौरान गुम हो गया। आयोग से मांग की कि उसे 15 लाख रुपये की बीमा राशि ब्याज सहित, 25 हजार रुपये हर्जाना व 5500 रुपये कानूनी खर्च दिलवाया जाए। आयोग ने बीमा कंपनी से जवाब मांगा। कंपनी ने कहा कि नवीन की मौत के संबंध में कोई सूचना या अपेक्षित दस्तावेज शिकायतकर्ता ने नहीं दिए। न ही नवीन के पास दुर्घटना के समय वैध ड्राइविंग लाइसेंस था।
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दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आयोग ने निर्णय दिया है कि नवीन के पिता ने डीडीआर दर्ज करवा दी थी कि हादसे के समय ड्राइविंग लाइसेंस नवीन की जेब में था, जो गुम हो गया। दूसरा, सड़क हादसा दूसरे वाहन चालक की लापरवाही से हुआ है। केस में बीमा की शर्त पूरी होती है। ऐसे में नवीन के परिवार को 15 लाख रुपये की मुआवजा राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित दी जाए। 5 हजार रुपये हर्जाना व 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दिए जाएं।