{"_id":"621a8984d050013865733c1f","slug":"business-should-not-be-education-governor-rohtak-news-rtk6396024116","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यापार नहीं होनी चाहिए शिक्षा : राज्यपाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्यापार नहीं होनी चाहिए शिक्षा : राज्यपाल
विज्ञापन
एमडीयू के टैगोर सभागार में आयोजित विद्वत सम्मलेन कार्यक्रम में पहुंचे राज्यपाल बंडारू दत्तात्?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोहतक। स्वामी दयानंद सरस्वती ने समाज को नई दिशा दी। वे सच्चे राष्ट्रवादी थे। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीति व रूढ़ियों को दूर करने का संकल्प लिया और आर्य समाज की स्थापना की। यह कहना है राज्यपाल एवं कुलाधिपति बंडारू दत्तात्रेय का। वे शनिवार को महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में आयोजित विद्वत सम्मेलन में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि आर्य समाज संस्था नहीं, एक आंदोलन है। वेद ही संपत्ति है। वेद ही सत्य, धर्म व अहिंसा है। स्वामीजी ने शिक्षा को प्राथमिकता दी। शिक्षा व्यापार नहीं होनी चाहिए। यह बुद्धि को बढ़ाती है। विद्या ग्रहण करके ही भावी पीढ़ी देश की उन्नति में सहभागी बन सकती है। इसलिए नई शिक्षा नीति को रोजगारोन्मुखी व नैतिक मूल्य आधारित बनाया है।
राज्यपाल ने कहा कि वेद हमारे देश व हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है। इसके बगैर देश की पूंजी बेकार है। वेदों पर शोध होना चाहिए। एमडीयू कुलपति वेदों के शोध पर ध्यान दें। यहां से शोध के जरिये दुनिया को रोशन करने वाला कुछ दें। वेदों को आधार मानकर नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा जरूरी है। इसी कड़ी में नई शिक्षा नीति में एमबीबीएस, इंजीनियरिंग की पढ़ाई मातृ भाषा में कराने का प्रावधान किया है। हमारा विज्ञान, सामाजिक, बायोलॉजी, गणित, केमिस्ट्री सब अंग्रेजी में है। मैं अंग्रेजी के खिलाफ नहीं हूं, मगर मैं अंग्रेजी का गुलाम नहीं बनना चाहता था। अंग्रेज से भी अच्छी अंग्रेजी बोलूंगा, मगर मातृ भाषा का कभी अपमान नहीं करूंगा। पंडित मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिंदू विवि की स्थापना की। वे मानव निर्माण को प्रोत्साहित करते थे। इसी को बढ़ावा देने की जरूरत है। उनके सिद्धांतों व विचारों को अपनाते हुए भारत का नवनिर्माण करें। हम अपनी जड़ों को न भूलें। इससे जुड़े रहें। विद्यार्थियों को अनुशासन व चरित्र से समझौता नहीं करना चाहिए। एमडीयू के विद्यार्थी पढ़ाई के बाद स्वामी दयानंद के प्रचारक बनें। उनके विचारों को फैलाएं। यहीं उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
विज्ञापन
आर्य समाजी एवं सीकर के सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने स्वामी दयानंद को महामानव बताते हुए कहा कि स्वामी दयानंद ने स्वदेशी की भावना को राष्ट्र में सुदृढ़ किया। उन्होंने अंधविश्वास, पाखंड व अज्ञानता के खिलाफ समाज में अलख जगाई। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष स्वामी आर्यवेश ने महर्षि दयानंद सरस्वती को समग्र क्रांति का पुरोधा बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद के शिक्षा दर्शन में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी गई। विश्वविद्यालयों में नैतिक मूल्यों की शिक्षा विद्यार्थियों को दिए जाने की जरूरत है।
सम्मेलन में बीज वक्तव्य गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के पूर्व कुलपति डॉ. सुरेंद्र कुमार ने दिया। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती के शिक्षा दर्शन पर प्रकाश डालते हुए स्वामी दयानंद को नवजागरण का प्रतीक पुरुष बताया।
सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को स्वामी दयानंद के शिक्षा दर्शन से प्रेरणा लेेते हुए चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने कहा कि शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा भाव की विशेष जरूरत है। स्वामी दयानंद की जनसेवा की भावना से शिक्षा व स्वास्थ्य जगत को प्रेरणा लेनी चाहिए।
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि स्वामी दयानंद का जीवन व कार्य प्रेरणादायी हैं। विवि में वैदिक अध्ययन केंद्र, महर्षि दयानंद सरस्वती शोध पीठ व योग अध्ययन केन्द्र की स्थापना कर महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों व दर्शन को प्रचारित-प्रसारित किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन विवि के वैदिक अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. सुरेंद्र कुमार ने किया। आभार प्रदर्शन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. राजकुुमार ने किया।
विश्वविद्यालय की प्रथम महिला डॉ. शरणजीत कौर, रजिस्ट्रार प्रो. गुलशन लाल तनेजा, कुलपति के सलाहकार प्रो. एके राजन, पं बीडीएस स्वास्थ्य विज्ञान विवि की कुलपति प्रो. अनिता सक्सेना, पंडित लख्मी चंद सुपवा के कुलपति गजेंद्र चौहान, बाबा मस्तनाथ विवि के कुलपति प्रो. आरके यादव, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, कुलसचिव डॉ. किरण कंबोज समेत विवि के डीन, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, रोहतक के प्रबुद्ध नागरिक, आर्य समाज संगठनों के प्रतिनिधि, एनएसएस व वाईआरसी वालंटियर्स मौजूद रहे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आर्य समाज संस्था नहीं, एक आंदोलन है। वेद ही संपत्ति है। वेद ही सत्य, धर्म व अहिंसा है। स्वामीजी ने शिक्षा को प्राथमिकता दी। शिक्षा व्यापार नहीं होनी चाहिए। यह बुद्धि को बढ़ाती है। विद्या ग्रहण करके ही भावी पीढ़ी देश की उन्नति में सहभागी बन सकती है। इसलिए नई शिक्षा नीति को रोजगारोन्मुखी व नैतिक मूल्य आधारित बनाया है।
विज्ञापन
राज्यपाल ने कहा कि वेद हमारे देश व हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है। इसके बगैर देश की पूंजी बेकार है। वेदों पर शोध होना चाहिए। एमडीयू कुलपति वेदों के शोध पर ध्यान दें। यहां से शोध के जरिये दुनिया को रोशन करने वाला कुछ दें। वेदों को आधार मानकर नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा जरूरी है। इसी कड़ी में नई शिक्षा नीति में एमबीबीएस, इंजीनियरिंग की पढ़ाई मातृ भाषा में कराने का प्रावधान किया है। हमारा विज्ञान, सामाजिक, बायोलॉजी, गणित, केमिस्ट्री सब अंग्रेजी में है। मैं अंग्रेजी के खिलाफ नहीं हूं, मगर मैं अंग्रेजी का गुलाम नहीं बनना चाहता था। अंग्रेज से भी अच्छी अंग्रेजी बोलूंगा, मगर मातृ भाषा का कभी अपमान नहीं करूंगा। पंडित मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिंदू विवि की स्थापना की। वे मानव निर्माण को प्रोत्साहित करते थे। इसी को बढ़ावा देने की जरूरत है। उनके सिद्धांतों व विचारों को अपनाते हुए भारत का नवनिर्माण करें। हम अपनी जड़ों को न भूलें। इससे जुड़े रहें। विद्यार्थियों को अनुशासन व चरित्र से समझौता नहीं करना चाहिए। एमडीयू के विद्यार्थी पढ़ाई के बाद स्वामी दयानंद के प्रचारक बनें। उनके विचारों को फैलाएं। यहीं उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
विज्ञापन
आर्य समाजी एवं सीकर के सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने स्वामी दयानंद को महामानव बताते हुए कहा कि स्वामी दयानंद ने स्वदेशी की भावना को राष्ट्र में सुदृढ़ किया। उन्होंने अंधविश्वास, पाखंड व अज्ञानता के खिलाफ समाज में अलख जगाई। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष स्वामी आर्यवेश ने महर्षि दयानंद सरस्वती को समग्र क्रांति का पुरोधा बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद के शिक्षा दर्शन में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी गई। विश्वविद्यालयों में नैतिक मूल्यों की शिक्षा विद्यार्थियों को दिए जाने की जरूरत है।
सम्मेलन में बीज वक्तव्य गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के पूर्व कुलपति डॉ. सुरेंद्र कुमार ने दिया। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती के शिक्षा दर्शन पर प्रकाश डालते हुए स्वामी दयानंद को नवजागरण का प्रतीक पुरुष बताया।
सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को स्वामी दयानंद के शिक्षा दर्शन से प्रेरणा लेेते हुए चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने कहा कि शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा भाव की विशेष जरूरत है। स्वामी दयानंद की जनसेवा की भावना से शिक्षा व स्वास्थ्य जगत को प्रेरणा लेनी चाहिए।
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि स्वामी दयानंद का जीवन व कार्य प्रेरणादायी हैं। विवि में वैदिक अध्ययन केंद्र, महर्षि दयानंद सरस्वती शोध पीठ व योग अध्ययन केन्द्र की स्थापना कर महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों व दर्शन को प्रचारित-प्रसारित किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन विवि के वैदिक अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. सुरेंद्र कुमार ने किया। आभार प्रदर्शन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. राजकुुमार ने किया।
विश्वविद्यालय की प्रथम महिला डॉ. शरणजीत कौर, रजिस्ट्रार प्रो. गुलशन लाल तनेजा, कुलपति के सलाहकार प्रो. एके राजन, पं बीडीएस स्वास्थ्य विज्ञान विवि की कुलपति प्रो. अनिता सक्सेना, पंडित लख्मी चंद सुपवा के कुलपति गजेंद्र चौहान, बाबा मस्तनाथ विवि के कुलपति प्रो. आरके यादव, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, कुलसचिव डॉ. किरण कंबोज समेत विवि के डीन, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, रोहतक के प्रबुद्ध नागरिक, आर्य समाज संगठनों के प्रतिनिधि, एनएसएस व वाईआरसी वालंटियर्स मौजूद रहे।