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वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत जीतकर लौटी मंजू का जोरदार स्वागत

Thu, 17 Oct 2019 02:57 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 17 Oct 2019 02:57 AM IST
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Boxer Manju, sports
रोहतक। अपनी पहली ही वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर इतिहास बनाने वाली गांव रिठाल की मंजू का बुधवार को रोहतक पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। सबसे पहले मंजू ने गांव के तालाब किनारे बॉक्सिंग रिंग में जाकर माथा टेका। इसके बाद मंजू अपने घर पर पहुंची, जहां मां ईशवंती ने आरती उतारकर बेटी का स्वागत किया।
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तीन से 13 अक्तूबर तक रूस के उलान उदे शहर में हुई वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जिले के रिठाल की 19 वर्षीय बॉक्सर मंजू ने 48 किलो भारवर्ग में देश का प्रतिनिधित्व किया। पहली बार वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसी स्पर्धा खेल रही मंजू ने रजत पदक जीतकर बॉक्सर मैरीकॉम के रिकार्ड की बराबरी कर ली। मंजू का स्वदेश लौटने के बाद बुधवार सुबह तिलियार झील पर स्वागत किया गया। यहां से सुबह साढ़े 11 बजे मंजू को फूलों व नोटों की माला पहनाकर खुली जीप में बैठाकर पहले कोच साहब सिंह के घर ले जाया गया। यहां पर मंजू की आरती उतारकर स्वागत किया गया। इसके बाद मंजू को खुली जीप में गांव ले जाया गया। शाम साढ़े पांच बजे घर पहुंचने पर सबसे पहले मंजू ने गांव के तालाब किनारे अपने बॉक्सिंग रिंग पर माथा टेका।
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क्वार्टर फाइनल जीतते ही लगा, बदल गई है जिंदगी : मंजू
मंजू ने बताया कि चैंपियनशिप में जब उसका मुकाबला उनके भारवर्ग की नंबर वन बॉक्सर के साथ तो वह नर्वस थी। उसने कोच साहब सिंह व परिवार के सदस्यों से बात की। इसके बाद मुझे हौसला मिला। क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतते ही मुझे लगा कि अब से मेरी जिंदगी बदल गई है। इसके बाद मुझे लगा कि अब मैं गोल्ड पक्का जीतूंगी, लेकिन चैंपियनशिप में रजत पदक ही जीत पाई। मंजू ने बताया कि जब एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप की ट्रायल के बाद भारतीय टीम में मेरा चयन नहीं हुआ तो मैं निराश हो गई थी। इस दौरान कोच साहब सिंह ने हौसला बढ़ाया। पिता का देहांत हुआ तक उसके परिवार के हालात बिगड़ गए थे। उस समय भी कोच साहब सिंह ही परिवार का सहारा बने।
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गांव के तालाब किनारे बने रिंग में तैयारी कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंची मंजू
मंजू ने गांव के तालाब किनारे बनाए गए रिंग में 2012 के आसपास तैयारी शुरू की थी। उस दौरान कोच साहब सिंह बिना सुविधाओं के खिलाड़ियों को वहां कोचिंग दे रहे थे। इसके बाद कोच रोहतक शहर में रहने थे। यहां भी उन्होंने मंजू समेत अन्य खिलाड़ियों को घर के पास ही एक नीम के पेड़ पर पंचिंग बैग टांग कर कोचिंग दी थी। कोच साहब सिंह ने बताया कि उनके यहां से सात महिला और दो पुरुष खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं। इनमें मंजू, जॉनी फौगाट, निशा, मनीषा, शिक्षा, कीर्ति, स्वीटि व लड़कों में अंकित नरवाल व प्रदीप फौगाट शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें किसी भी सरकार से अभी तक बॉक्सिंग रिंग तक भी नहीं मिला है। अभी भी खिलाड़ी बिना बॉक्सिंग रिंग के ही अभ्यास करते हैं।

मंजू के स्वागत के लिए पहुंचे भाजपाई और कांग्रेसी
देश का नाम रोशन कर लौटी मंजू का गांव रिठाल गढ़ी सांपला-किलोई हलके में आता है। पांच दिन बाद वोटिंग होनी हैं। ऐसे में जब मंजू बुधवार सुबह रोहतक पहुंची तो भाजपा व कांग्रेसी भी पहुंचे। मंजू के स्वागत समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की धर्मपत्नी आशा हुड्डा, भाजपा से गढ़ी-सांपला-किलोई हलके के विधायक प्रत्याशी सतीश नांदल के बेटे संचित नांदल और रामकरण हुड्डा पहुंचे थे।
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