{"_id":"610593f18ebc3e67015e1d9a","slug":"boxer-amit-s-father-said-lacked-personal-coach-practice-also-affected-rohtak-news-rtk619582316","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुक्केबाज अमित के पिता बोले - निजी कोच की कमी खली, अभ्यास भी हुआ प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुक्केबाज अमित के पिता बोले - निजी कोच की कमी खली, अभ्यास भी हुआ प्रभावित
विज्ञापन
टोक्यो ओलंपिक में अमित पंघाल के मैच के दौरान रोहतक के मायना गांव में टीवी पर देखते पिता विजेन्द्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोहतक। मायना गांव निवासी विश्व के नंबर एक मुक्केबाज (52 किग्रा) अमित पंघाल शनिवार सुबह अपना ओलंपिक का पहला मैच कोलंबिया के खिलाड़ी से हार गए। अमित के पिता विजेंद्र पंघाल ने हार के बाद कहा कि अमित कि हार का मलाल है, लड़का वर्षों की मेहनत से इस मुकाम तक पहुंचा है, लेकिन हार-जीत खेल का हिस्सा है, अमित को मायूस नहीं होने देंगे, अगले ओलंपिक लिए और अधिक मेहनत करेंगे। इस लेवल पर जाकर खेलना अपने आपमें ही बड़ी बात है।
विजेंद्र पंघाल ने कहा कि अमित के निजी कोच अनिल धनखड़ का साथ न होना भी अमित की हार का कारण प्रतीत होता है। अमित के साथ उनके कोच की कमी खली। अमित ने कोच अनिल धनखड़ को साथ लेकर जाने की कई बार मांग की। इसके लिए सीएम मनोहर लाल से मिलकर आग्रह भी किया और पीएम तक को पत्र भी लिखे, लेकिन कोच अनिल धनखड़ को साथ ले जाने की अनुमति नहीं मिली। इससे टोक्यो में जाने के बाद अमित का अभ्यास भी प्रभावित हुआ है। कोच अनिल धनखड़ के पास अमित ने बचपन से अभ्यास किया है। दोनों एक-दूसरे को अच्छे से जानते हैं, वे साथ जाते तो अमित को इसका फायदा जरूर मिलता।
मैच में हार के बाद लोग मायूस हुए तो अमित के पिता ने बढ़ाया हौसला
शनिवार सुबह साढे़ सात बजे मैच शुरू होने से पहले ही अमित के घर पर लोग जुटने लगे थे। साढ़े सात बजे जैसे ही मैच शुरू हुआ तो माहौल बिल्कुल शांत था और सभी की निगाहें टीवी स्क्रीन पर टिकी हुई थीं। पहले राउंड में अमित ने शानदार खेलते हुए चार एक से राउंड अपने नाम किया। जिसने घर पर मैच देख रहे परिजनों व ग्रामीणों में जोश भर दिया। दूसरा राउंड शुरू हुआ तो अमित थोड़े डिफेंसिव खेलते नजर आए। मैच देख रहे सभी लोगों ने कहा कि यह अमित की रणनीति का हिस्सा है। दूसरे राउंड में अमित को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी मैच देख रहे सभी लोगों को लग रहा था कि अमित अपनी पुरानी रणनीति के तहत तीसरे राउंड में वापसी करेगा। लेकिन तीसरे राउंड में अमित के खेल में वह स्फूर्ति देखने को नहीं मिली और तीसरा राउंड हारने के बाद अमित ने 4-1 से मैच गंवा दिया। इसके बाद वहां बैठे सभी लोग मायूस नजर आए। इसके बाद अमित के पिता ने सभी से कहा कि हार-जीत खेल का हिस्सा है, कोई मायूस न हो, अगली बार और बढ़िया खेलेंगे।
विज्ञापन
मां बोलीं : बेटे के लिए चूरमा अब भी तैयार
अमित की मां ऊषा देवी ने कहा कि बेटे की हार का दुख सभी को ही होता है। लेकिन हार-जीत तो खेल का हिस्सा है। चूरमा पहले भी तैयार था, अब भी तैयार है। बेटे के आने पर अब भी उनका पसंदीदा चूरमा तो खिलाऊंगी ही। अबकी बार इतने बड़े लेवल तक खेलने का अनुभव मिला है। तीन साल बाद फिर ओलंपिक के मैच होंगे, उसके लिए अमित का हौसला बढ़ाऊंगी। अमित को अगले ओलंपिक से पहले भी तीन साल में और भी कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना है।
अमित ने मां से फोन पर हाथ में झटका लगने की बात कही
मां ऊषा देवी ने फोन पर अमित से पूछा कि क्या बात आज कुछ तकलीफ में दिख रहा था। तो अमित ने हाथ में झटका लगने की बात कही, लेकिन बाद में कहा कि घर आकर सारी बात बताऊंगा। ऊषा देवी ने बताया कि अमित चोट के बारे में घर ज्यादा बताता नहीं, लेकिन मैच के दौरान उनको आशंका है कि अमित के हाथ में झटका लगा है।
विज्ञापन
विजेंद्र पंघाल ने कहा कि अमित के निजी कोच अनिल धनखड़ का साथ न होना भी अमित की हार का कारण प्रतीत होता है। अमित के साथ उनके कोच की कमी खली। अमित ने कोच अनिल धनखड़ को साथ लेकर जाने की कई बार मांग की। इसके लिए सीएम मनोहर लाल से मिलकर आग्रह भी किया और पीएम तक को पत्र भी लिखे, लेकिन कोच अनिल धनखड़ को साथ ले जाने की अनुमति नहीं मिली। इससे टोक्यो में जाने के बाद अमित का अभ्यास भी प्रभावित हुआ है। कोच अनिल धनखड़ के पास अमित ने बचपन से अभ्यास किया है। दोनों एक-दूसरे को अच्छे से जानते हैं, वे साथ जाते तो अमित को इसका फायदा जरूर मिलता।
विज्ञापन
मैच में हार के बाद लोग मायूस हुए तो अमित के पिता ने बढ़ाया हौसला
शनिवार सुबह साढे़ सात बजे मैच शुरू होने से पहले ही अमित के घर पर लोग जुटने लगे थे। साढ़े सात बजे जैसे ही मैच शुरू हुआ तो माहौल बिल्कुल शांत था और सभी की निगाहें टीवी स्क्रीन पर टिकी हुई थीं। पहले राउंड में अमित ने शानदार खेलते हुए चार एक से राउंड अपने नाम किया। जिसने घर पर मैच देख रहे परिजनों व ग्रामीणों में जोश भर दिया। दूसरा राउंड शुरू हुआ तो अमित थोड़े डिफेंसिव खेलते नजर आए। मैच देख रहे सभी लोगों ने कहा कि यह अमित की रणनीति का हिस्सा है। दूसरे राउंड में अमित को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी मैच देख रहे सभी लोगों को लग रहा था कि अमित अपनी पुरानी रणनीति के तहत तीसरे राउंड में वापसी करेगा। लेकिन तीसरे राउंड में अमित के खेल में वह स्फूर्ति देखने को नहीं मिली और तीसरा राउंड हारने के बाद अमित ने 4-1 से मैच गंवा दिया। इसके बाद वहां बैठे सभी लोग मायूस नजर आए। इसके बाद अमित के पिता ने सभी से कहा कि हार-जीत खेल का हिस्सा है, कोई मायूस न हो, अगली बार और बढ़िया खेलेंगे।
विज्ञापन
मां बोलीं : बेटे के लिए चूरमा अब भी तैयार
अमित की मां ऊषा देवी ने कहा कि बेटे की हार का दुख सभी को ही होता है। लेकिन हार-जीत तो खेल का हिस्सा है। चूरमा पहले भी तैयार था, अब भी तैयार है। बेटे के आने पर अब भी उनका पसंदीदा चूरमा तो खिलाऊंगी ही। अबकी बार इतने बड़े लेवल तक खेलने का अनुभव मिला है। तीन साल बाद फिर ओलंपिक के मैच होंगे, उसके लिए अमित का हौसला बढ़ाऊंगी। अमित को अगले ओलंपिक से पहले भी तीन साल में और भी कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना है।
अमित ने मां से फोन पर हाथ में झटका लगने की बात कही
मां ऊषा देवी ने फोन पर अमित से पूछा कि क्या बात आज कुछ तकलीफ में दिख रहा था। तो अमित ने हाथ में झटका लगने की बात कही, लेकिन बाद में कहा कि घर आकर सारी बात बताऊंगा। ऊषा देवी ने बताया कि अमित चोट के बारे में घर ज्यादा बताता नहीं, लेकिन मैच के दौरान उनको आशंका है कि अमित के हाथ में झटका लगा है।