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Rohtak News: रोहतक शहर और कोसली में नहीं चला भाजपा का ट्रंप कार्ड, सभी नौ हलकों में मिली हार

Wed, 05 Jun 2024 02:28 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jun 2024 02:28 AM IST
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BJP's trump card did not work in Rohtak city and Kosli, defeat in all nine circles
रोहतक। लोकसभा चुनाव में कोसली और रोहतक शहर में भाजपा का ट्रंप कार्ड नहीं चला। संसदीय क्षेत्र के सभी नौ हलकों में भाजपा कांग्रेस से हार गई। यादव बाहुल्य कोसली हलके से भी दीपेंद्र हुड्डा दो वोट की लीड लेने में कामयाब रहे, जबकि रोहतक शहर से 4 हजार 998 वोट की लीड ली। गढ़ी सांपला-किलोई हर बार की तरह हुड्डा के लिए अजेय दुर्ग साबित हुआ। महम व बेरी से 50 हजार से ज्यादा तो बादली व झज्जर से 40 हजार से ज्यादा की लीड मिली। कलानौर व बहादुरगढ़ शहर में भी कांग्रेस के आगे भाजपा नहीं टिक सकी। अब तीन माह बाद विधानसभा चुनाव होंगे, जिसमें कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधी टक्कर तय है। जजपा जहां मौजूदगी दर्शा नहीं सकी, जबकि इनेलो ने लोकसभा चुनाव ही नहीं लड़ा।
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महम : कांग्रेस को मिली फिर जीत, कुंडू की चुप्पी भी कर गई काम
जिला ही नहीं, प्रदेश की सियासत में महम हलके का अहम स्थान है। 1990 के महम कांड के बाद हलका सियासत के अंदर छाया रहा है। हलके से कांग्रेस को 2004 में 40 हजार, 2009 में 68 हजार, 2014 में 61 हजार व 2019 में 68 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। अबकी बार 2024 में कांग्रेस भाजपा से 53 हजार 310 वोट से आगे रही। खास बात यह रही कि निर्दलीय प्रत्याशी बलराज कुंडू की चुप्पी भी काम कर गई, जो चर्चा का विषय बनी हुई है।
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गढ़ी सांपला-किलोई : 2005 से हुडा परिवार का अजेय दुर्ग बना हलका
2005 से गढ़ी सांपला-किलोई हलका हुड्डा परिवार का सुरक्षित गढ़ बना हुआ है। 19 साल से हुड्डा पिता-पुत्र न तो लोकसभा और न ही विधानसभा चुनाव में हलके से हारे। 2009 में हलके से कांग्रेस को 87 हजार 908 वोट मिले। जबकि 2014 में 82 हजार 564 वोट मिले। 2019 में दीपेंद्र को 92 हजार 606 वोट मिले हैं। जबकि 2024 में 1 लाख 14 हजार वोट मिले हैं। साथ ही दीपेंद्र ने 77 हजार से ज्यादा वोट से लीड ली है। भाजपा कांग्रेस के पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा को तोड़ने के बावजूद गढ़ को नहीं हिला सकी।
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रोहतक शहर : प्रॉपर्टी आईडी से लेकर बिजली व पानी की किल्लत पड़ी भाजपा पर भारी
ताऊ देवीलाल हो या कैप्टन अभिमन्यु व धनखड़, रोहतक शहर ने 1991 से 2014 तक हर बार हुड्डा परिवार को लीड दी। 2014 के बाद शहर का मिजाज बदल गया है। पहला तो विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से सीट छीनी। फिर निगम चुनाव में करारी मात दी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को शहर से 7 हजार की लीड मिली थी, लेकिन 2016 के दंगों के बाद 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस भाजपा से 19 हजार से पीछे रह गई। हुड्डा परिवार ने रोहतक शहर में फिर से मेहनत की। खुद भूपेंद्र सिंह हुड्डा, आशा हुड्डा व दीपेंद्र हुड्डा लगातार गैर जाट परिवारों के संपर्क में रहा। साथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार को बिजली, पानी व सीवरेज जैसे स्थानीय समस्याओं को लेकर घेरा। कांग्रेस 4 हजार 998 वोट की लीड लेने में कामयाब रही।
कलानौर : कांग्रेस ने फिर दी भाजपा को मात
प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का पैतृक गांव बनियानी कलानौर हलके में आता है। हलके से कई बार भाजपा प्रत्याशी विधायक बना है, लेकिन पहले कांग्रेसी करतार देवी और अब शकुंतला खटक जीत हासिल करती आ रही है। 2014 में भाजपा विधानसभा चुनाव में जीतने की दहलीज पर आकर हार गई थी। जबकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हलके ने 33 हजार से ज्यादा की लीड दी थी। 2019 में बाजी पलट गई। भाजपा को हलके से 4311 की लीड मिली है। वहीं, इनेलो को पिछली बार 18 हजार से ज्यादा वोट मिली थी, लेकिन जजपा व इनेलो मिलकर 3500 का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी। 2024 में कांग्रेस ने फिर भाजपा को मात दी और 39 हजार 664 वोट की लीड ली।

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बहादुरगढ़ : इनेलो-जजपा का वोट बैंक कांग्रेस की तरफ खिसका
झज्जर जिले के बहादुरगढ़ हलके में शहर के अलावा आसपास के गांव भी आते हैं। इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष नफेसिंह राठी की हत्या के बाद पार्टी ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा, जबकि जजपा प्रत्याशी को ज्यादा समर्थन नहीं मिल सका। दोनों दलों का वोट बैंक कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा की तरफ खिसक गया। 2019 में कांग्रेस ने बहादुरगढ़ हलके से लीड लेने के लिए पूरा जोर लगा रखा था, लेकिन कांग्रेसियों के बीच की तनातनी कई बार उभरकर सामने आई। भाजपा 5 हजार 630 वोटों की बढ़त लेने में कामयाब रही थी। अबकी बार बाजी पलट गई। कांग्रेस हलके से 21 हजार 641 वोट से आगे रही।
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बादली : धनखड़ के हलके में फिर मात खा गई भाजपा
2014 साल पहले विधानसभा चुनाव में जिस बादली हलके ने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धनखड़ को विधायक बनाया था। साथ ही लोकसभा चुनाव में 38 हजार से ज्यादा वोट दी थी। 2019 में कांग्रेस हलके से 11 हजार वोट से लीड लेने में कामयाब रही, जो 2024 में और ज्यादा बढ़ गई। ग्रामीण बाहुल्य हलके में कांग्रेस 46 हजार 947 वोट से लीड लेने में कामयाब रही।

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झज्जर : हुड्डा परिवार ने लगाया पूरा दम, श्वेता हुड्डा भी उतरी प्रचार में
हुड्डा सरकार में शिक्षा मंत्री रही गीता भुक्कल झज्जर हलके से विधायक हैं। पांच साल पहले कांग्रेस ने भाजपा से हलके से मात्र 4 हजार 649 वोट की लीड ली थी। अबकी बार वापसी के लिए कांग्रेस ने पूरा जोर लगा दिया। रोहतक के साथ दीपेंद्र हुड्डा ने झज्जर शहर पर फोकस किया। खुद उनकी पत्नी श्वेता हुड्डा स्थानीय विधायक गीता भुक्कल के साथ प्रचार करती नजर आईं। ऐसे में कांग्रेस को अबकी बार हलके से अच्छी खासी बढ़त मिल रही है। 2014 में कांग्रेस को 22 हजार की लीड मिली थी। अबकी लीड 43 हजार 385 तक पहुंच गई।
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बेरी : बेरी बन रहा कांग्रेस का दूसरा गढ़, दोगुनी हुई लीड
जाट बाहुल्य बेरी हलका कांग्रेस के लिए गढ़ी सांपला-किलोई हलके की तरह गढ़ बन गया है। पांच साल पहले हार के बावजूद दीपेंद्र हुड्डा ने बेरी हलके से 25 हजार से ज्यादा वोटों की लीड ली थी। जो 2014 में 27 हजार से ज्यादा लीड थी। 2024 में भी दीपेंद्र को पूरा समर्थन मिला है। 2019 की तरह अब भी इनेलो व जजपा को संयुक्त तौर पर हलके से ज्यादा समर्थन नहीं मिल सका। जबकि 2014 में 14 हजार 422 वोट मिले थे। हलके से विधायक रघुबीर कादियान कांग्रेस राज में विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं। 2024 में हलके से कांग्रेस को 55 हजार 644 की लीड मिली है।


कोसली : कोसली में रोचक हुआ मुकाबला, दो वोट से हार गए अरविंद शर्मा
भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद कोसली हलके से थी। क्योंकि 2019 में भाजपा प्रत्याशी डॉक्टर अरविंद शर्मा को हलके से 74 हजार की लीड मिली थी। अबकी बार भी हलके से एक लाख के करीब लीड का टारगेट रखा गया था। इसके लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन लाल यादव से लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की जनसभा करवाई। साथ ही गुरुग्राम से प्रत्याशी राव इंद्रजीत भी आए। फिर भी भाजपा को उम्मीद के मुताबिक वोट नहीं मिल सकी। पार्टी लीड तो दूर 2 वोट से पीछे रह गई।

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नौ हलकों में यूं आगे रहे दीपेंद्र हुड्डा

हलका कांग्रेस भाजपा लीड
गढ़ी सांपला-किलोई 1, 14583 37 हजार 341 77 हजार 242
महम 94 हजार 123 40 हजार 813 53 हजार 310
कलानौर 89 हजार 322 49 हजार 658 39 हजार 664
रोहतक शहर 61 हजार 734 56 हजार 736 4 हजार 998
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बेरी 86 हजार 755 31 हजार 111 55 हजार 644
झज्जर शहर 82 हजार 682 39 हजार 297 43 हजार 385
बादली 83 हजार 979 37 हजार 32 46 हजार 947
बहादुरगढ़ 80 हजार 655 59 हजार 14 21 हजार 641
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कोसली 83 हजार 422 83 हजार 420 2

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रोहतक लोकसभा से विजेताओं डाले गए मतों का प्रतिशत
1951 रणबीर हुड्डा कांग्रेस 42.7
1957 रणबीर हुड्डा कांग्रेस 38.3
1962 लहरी सिंह जनसंघ 44.7
1967 रणधीर सिंह कांग्रेस 48.6
1971 मुख्तार सिंह भारतीय जनसंघ 43.5
1977 शेर सिंह भारतीय लोकदल 80.3
1980 स्वामी इंद्रवेश भारतीय जनता पार्टी (एएस) 50.8
1984 हरद्वारी लाल कांग्रेस 48.4
1989 देवीलाल हलोदरा 63.0
1991 भूपेंद्र हुड्डा कांग्रेस 42.7
1996 भूपेंद्र हुड्डा कांग्रेस 30.7
1998 भूपेंद्र हुड्डा कांग्रेस 38.2
1999 कैप्टन इंद्र सिंह इनेलो 57.9
2004 भूपेंद्र हुड्डा कांग्रेस 49.0
2005 दीपेंद्र हुड्डा कांग्रेस 66.0
2009 दीपेंद्र हुड्डा कांग्रेस 70.0
2014 दीपेंद्र हुड्डा कांग्रेस 46.9
2019 अरविंद शर्मा भाजपा 47.1
2024 दीपेंद्र हुड्डा, कांग्रेस 62.78 अपडेट संभव
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