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रोहतक लोकसभा चुनाव : भाजपा के दम और हुड्डा की पकड़ की परख आज

Sat, 25 May 2024 06:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 25 May 2024 06:27 AM IST
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BJP's strength and Hooda's hold will be tested today
विजेंद्र कौशिकरोहतक। लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सबसे हॉट सीट रोहतक के मतदाता भाजपा के दम व हुड्डा पिता-पुत्र की पकड़ को आज परखेंगे। तीन जिलों के नौ हलकों में फैले लोकसभा क्षेत्र में भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है। मौजूदगी दिखाने के लिए जजपा भी जोर लगा रही है। 18 लाख 89 हजार 844 मतदाता तय करेंगे रोहतक का विजेता कौन रहेगा।
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प्रदेश के अंदर राजनीति को क्षेत्र के हिसाब से छह भागों में बांटा जाता है। एक तरफ पंचकूला से लेकर पानीपत तक जीटी रोड बेल्ट है। इससे आगे देशवाली बेल्ट है, जिसमें रोहतक, झज्जर व सोनीपत जिला आता है। फरीदाबाद से लेकर नारनौल तक यादव बाहुल्य दक्षिण हरियाणा है। भिवानी, हिसार व सिरसा बागड़ी बेल्ट में आते हैं, जबकि जींद, कैथल व फतेहाबाद का इलाका बांगर बेल्ट कहलाता है। इसके अलावा फरीदाबाद व पलवल का क्षेत्र है, जो यूपी से सटा है। देशवाली बेल्ट के अंदर हुड्डा का दबदबा माना जाता है।
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हुड्डा परिवार के लिए वाटरलू से कम नहीं चुनाव
1952 से 2019 तक के चुनावी आंकड़े देखें तो हुड्डा परिवार से नौ बार सांसद चुने गए हैं, जबकि दो चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जबकि प्रदेश के उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल को तीन बार भूपेंद्र सिंह हुड्डा हराकर जीत की हैट्रिक लगा चुके। 1952 व 1957 में रणबीर सिंह हुड्डा, 1991, 1996, 1998 व 2004 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा व 2005, 2009 व 2014 में दीपेंद्र हुड्डा ने जीत हासिल की। 1999 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा व 2019 में दीपेंद्र हुड्डा चुनाव हार गए थे। 2024 में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस के अंदर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद को मुख्यमंत्री पद के दावेदार बताते हैं। ऐसे में रोहतक सीट जीतना उनके लिए बेहद अहम है।
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भाजपा के लिए भी मूंछ का सवाल बनी सीट
कांग्रेस की तरह भाजपा के लिए भी रोहतक सीट मूंछ का सवाल बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनीपत के गोहाना व अमित शाह ने झज्जर में रैली की, जबकि जेपी नड्डा ने रोहतक शहर में रोड शो किया। नितिन गडकरी कोसली, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी समरगोपालपुर, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बहादुरगढ़, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहनलाल यादव कोसली में जनसभा की। ऐसे में रोहतक की हार व जीत भाजपा के केंद्रीय नेताओं के लिए भी मायने रखेगी।

कोसली रहा ट्रंप कार्ड, पांच हलकों में जीतकर भी हारी थी कांग्रेस
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नौ में से पांच हलकों में भी जीतकर हार गई थी, क्योंकि कोसली ट्रंप कार्ड साबित हुआ था। महम, गढ़ी सांपला-किलोई, बेरी, बादली व झज्जर में लीड हासिल की, जबकि भाजपा कोसली, रोहतक शहर, कलानौर व बहादुरगढ़ में विजयी रही थी। सबसे ज्यादा लीड भाजपा को कोसली हलके से मिली थी, जो 74 हजार से ज्यादा रही थी। यही भाजपा प्रत्याशी की जीत का आधार बनी। महम, गढ़ी सांपला व बेरी से अच्छी लीड लेने के बावजूद कांग्रेस पीछे रह गई थी। रोहतक शहर में भी कांग्रेस ने काफी पसीना बहाया है। अब देखना है मतदाताओं पर कितना प्रभाव पड़ेगा। अब की बार दोनों दलों में नई रणनीति के तहत भीषण गर्मी में पसीना बहाया है। अब मतदाता विजेता तय करेगा।
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