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Rohtak News: अरावली वन क्षेत्र की पहाड़ियों पर फेंका जा रहा बायोमेडिकल कचरा

Tue, 24 Jun 2025 12:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Tue, 24 Jun 2025 12:08 AM IST
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Biomedical waste is being dumped on the hills of Aravali forest area
फोटो : 12बासदूदा की पहाड़ी पर फेंका बायोमेडिकल कचरा। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। अरावली वन क्षेत्र से लगते कुंड, मनेठी, बासदूदा की पहाड़ी समेत अन्य गांवों में फेंका जा रहा बायोमेडिकल कचरा पर्यावरण और पशुओं के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। कचरे में इस्तेमाल की गई सीरिंज, दवा की खाली बोतलें समेत अन्य संक्रामक सामग्री आदि हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। साथ ही इस कचरे के खाने से पशुओं की जान जाने का खतरा बना रहता है।
बायो मेडिकल कचरा का निस्तारण करने के मानक होते हैं लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है। अरावली वन क्षेत्र से सटे कुंड, मनेठी और बासदूदा की पहाड़ी पर फेंका गया बायोमेडिकल कचरा आसपास के क्षेत्रों की निजी क्लीनिक और छोटे निजी अस्पतालों का बताया जा रहा है।
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यहां लगातार बायोमेडिकल कचरा फेंकने से काफी क्षेत्रफल में कूड़ा फैला है। यहां कचरा फेंकने पर न तो वन विभाग अंकुश लगा सका है और न ही प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई की जा रही है।
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पर्यावरण प्रेमी राजेश कुमार ने बताया कि अगर कोई पशु इस कचरे को खा ले तो, उसकी मौत हो सकती है। इस पर प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए, यह काफी चिंता का विषय है। विषैले रसायन और खतरनाक पदार्थ वन्य जीव को नुकसान पहुंचा सकते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदूषित कर सकते हैं।

बायोमेडिकल कचरा से हो सकती है यह बीमारी

बायोमेडिकल कचरे को इंसिनरेटर (उच्च तापमान पर भस्म करने वाला संयंत्र) में नष्ट करना जरूरी होता है। सामान्य तापमान में इसे जलाकर खत्म नहीं किया जा सकता है। अगर बायोमेडिकल कचरे को 1,150 डिग्री सेल्सियस के निर्धारित तापमान पर भस्म नहीं किया जाता है तो यह लगातार डायोक्सिन और फ्यूरान्स जैसे आर्गेनिक प्रदूषण पैदा करता है, जिनसे कैंसर, प्रजनन और विकास संबंधी परेशानियां पैदा हो सकती हैं। रोग प्रतिरोधक प्रणाली और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ सकता है। यह मधुमेह का कारण भी बन सकता है।

बायोमेडिकल कचरा निस्तारण के ये हैं नियम

बायोमेडिकल कचरे को तीन अलग-अलग रंग के डिस्पोजल बैगों या डिब्बों में रखा जाता है, ताकि निष्पादन में आसानी हो। लाल बैग में सिर्फ सूखा कचरा रुई, गंदी पट्टी, प्लास्टर आदि रखा जाता है। पीले बैग में गीला मेडिकल कचरा, बायोप्सी, मानव अंगों का अपशिष्ट आदि रखा जाताहै। काले बैग में सूई, ब्लेड, कांच की बोतलें, इंजेक्शन आदि रखे जाते हैं। पीला बैग में जलाने वाला और लाल बैग में रिसाइकिल वाला कचरा रखा जाता है। बायोमेडिकल वेस्टेज को सुरक्षित तरीके से ट्रीटमेंट प्लांट में भेजना होता है। जहां तीन बैगों के कचरे को हाइड्रोक्लोराइड एसिड से साफ किया जाता है जिससे कीटाणु मर जाएं। अस्पताल में ही कचरे से निपटने के लिए व्यवस्था होनी जरूरी है। नहीं तो किसी संस्था के साथ टाइअप करना होता है। नियम तोड़ने पर सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।


वर्जन

जिन क्षेत्रों में बायो मेडिकल कचरा डालने की बात कही जा रही है, वहां पर आते-जाते लोग कचरा फेंक रहे हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद आसपास की पंचायतों को जागरूक किया जाएगा। जो कचरा फेंकते हुए पाया जाएगा उस पर कार्रवाई होगी। पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाने दिया जाएगा।-जितेंद्र, वन रेंज अधिकारी।
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