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Rohtak News: चिकित्सा उपकरणों को जीवाणु रहित करने वाली बड़ी मशीनें खराब
Sun, 17 Nov 2024 01:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 17 Nov 2024 01:40 AM IST
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रोहतक। नागरिक अस्पताल में चिकित्सा उपकरणों को जीवाणु रहित करने वाली बड़ी मशीनें खराब पड़ी है।
एक छोटी आटोक्लेव मशीन के सहारे सर्जरी का कार्य चल रहा है। इस एक मशीन पर तीन गुना भार है। यह आटोक्लेव मशीन खराब हो जाती है तो ओटी (ऑपरेशन थिएटर) के ऑपरेशन रुक जाएंगे। जिला नागरिक अस्पताल में आंख की ओटी, इमरजेंसी, सर्जरी, ईएनटी ओटी, गायनी ओटी इस्तेमाल होने वाले हर उपकरण बेंडेज और गाउन आदि को आटोक्लेव की मदद से जीवाणु रहित किया जाता है। रोजाना छोटे बड़े सैकड़ों ऑपरेशन किए जाते हैं। गलती से एक बार भी इन्फेक्टेड उपकरण इस्तेमाल हो जाए तो मरीज की जान पर आ सकती है।
-- -ऑपरेशन थिएटर की रीढ़ की हड्डी होती है ऑटोक्लेव
विशेषज्ञों की माने तो आटोक्लेव के बिना ऑपरेशन से संबंधी किसी प्रकार सर्जरी नहीं की जा सकती है। यह ओटी की रीढ़ की हड्डी होती है। इसके बिना सर्जरी हो ही नहीं सकती है। सर्जरी की गुणवत्ता उपकरण के जीवाणु रहित होने पर है। आटोक्लेव भाप का उपयोग करके मेडिकल उपकरणों को जीवाणु रहित करता है।
-- -बॉक्स
-- -खराब पड़ी है बड़ी आटोक्लेव मशीन
अनुमानित 14 से 16 के बीच एक बड़ी आटोक्लेव मशीन आती है। अभी जो मशीन उपकरणों को जीवाणु रहित करने में उपयोग में लाई जा रही है। वह काफी छोटी है। जो काम बड़ी एक बार कर सकती है। वही कार्य इससे तीन बार में लेना पड़ता है। इससे समय की बर्बादी होती है। साथ ही मशीन पर दबाव बना रहता है। आटोक्लेव की बड़ी करीब दो से तीन मशीनें पड़ी हैं। रिपेयरिंग न कराने के कारण धूल फांक रहीं हैं।
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-- -वर्जन
आटोक्लेव मशीन में कोई समस्या नहीं है। सर्जरी काम सुचारू है। मरीजों को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी।
-डॉ. पुष्पेंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल
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एक छोटी आटोक्लेव मशीन के सहारे सर्जरी का कार्य चल रहा है। इस एक मशीन पर तीन गुना भार है। यह आटोक्लेव मशीन खराब हो जाती है तो ओटी (ऑपरेशन थिएटर) के ऑपरेशन रुक जाएंगे। जिला नागरिक अस्पताल में आंख की ओटी, इमरजेंसी, सर्जरी, ईएनटी ओटी, गायनी ओटी इस्तेमाल होने वाले हर उपकरण बेंडेज और गाउन आदि को आटोक्लेव की मदद से जीवाणु रहित किया जाता है। रोजाना छोटे बड़े सैकड़ों ऑपरेशन किए जाते हैं। गलती से एक बार भी इन्फेक्टेड उपकरण इस्तेमाल हो जाए तो मरीज की जान पर आ सकती है।
विशेषज्ञों की माने तो आटोक्लेव के बिना ऑपरेशन से संबंधी किसी प्रकार सर्जरी नहीं की जा सकती है। यह ओटी की रीढ़ की हड्डी होती है। इसके बिना सर्जरी हो ही नहीं सकती है। सर्जरी की गुणवत्ता उपकरण के जीवाणु रहित होने पर है। आटोक्लेव भाप का उपयोग करके मेडिकल उपकरणों को जीवाणु रहित करता है।
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अनुमानित 14 से 16 के बीच एक बड़ी आटोक्लेव मशीन आती है। अभी जो मशीन उपकरणों को जीवाणु रहित करने में उपयोग में लाई जा रही है। वह काफी छोटी है। जो काम बड़ी एक बार कर सकती है। वही कार्य इससे तीन बार में लेना पड़ता है। इससे समय की बर्बादी होती है। साथ ही मशीन पर दबाव बना रहता है। आटोक्लेव की बड़ी करीब दो से तीन मशीनें पड़ी हैं। रिपेयरिंग न कराने के कारण धूल फांक रहीं हैं।
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आटोक्लेव मशीन में कोई समस्या नहीं है। सर्जरी काम सुचारू है। मरीजों को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी।
-डॉ. पुष्पेंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल