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गरीबों के छोटे आशियानों को खरीदकर बना लीं बड़ी ‘हवेलियां’
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शहर के कुछ लोगों ने गरीबों के छोटे-छोटे आशियानों को खरीदकर बड़ी ‘हवेलियां’ बना ली हैं। प्रॉपर्टी आईडी बनाने के दौरान निगम के मुख्य कराधान अधिकारी (जेडटीओ) ने हाउसिंग बोर्ड कॉलोनियों में खेल पकड़ा है। उन्होंने हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को ऐसे सभी लोगों की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उधर, निगम का कहना है कि सर्वे के दौरान विभाग को मकान का एक दरवाजा मिला, जबकि रजिस्ट्री में जितने मकान, उतने ही दरवाजे दिखाए गए हैं। इसकी वजह से तमाम लोगों को प्रॉपर्टी आईडी बनाने में दिक्कत आ रही हैं।
हुडा के जितने भी सेक्टर बनते हैं, उनमें हरियाणा हाउसिंग बोर्ड बीपीएस, गरीब और मध्यमवर्ग के लोगों के लिए मकान बनाता है। धनवानों को मांग के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री करता है। नियमानुसार हाउसिंग बोर्ड बीपीएल परिवार के लिए 35 गज, गरीबों के लिए 40 गज और मध्यमवर्ग के लिए 51 गज जमीन पर मकान बनाकर देता है। इनको खरीदकर बड़ा मकान बनाना नियम विरुद्ध है। नगर निगम हर प्रॉपर्टी की आईडी बना रहा है, जिसके तहत अभी तक करीब 10 हजार प्रॉपर्टी की आईडी बनाने में दिक्कत आ रही थी। निगम आयुक्त ने ज्वाइंट कमिश्नर के साथ एक कमेटी गठित की, जिसमें त्वरित रूप से समस्याओं का निदान किया जा सके। निगम के मुख्य कराधान अधिकारी जगदीश ने बताया कि कई प्रॉपर्टी की आईडी बनाते समय सॉफ्टवेयर डाटा फीड नहीं कर रहा है। जब सर्वे की रिपोर्ट देखी गई तो मौके पर एक ही गेट होना मिला। इसके बाद प्रॉपर्टी स्वामियों से रजिस्ट्री मंगाई गई तो खुलासा हुआ कि किसी ने दो तो किसी ने तीन छोटे-छोटे मकान खरीदकर बड़ा मकान बना लिया है। चूंकि सॉफ्टवेयर में दो या तीन गेट हैं और निगम के सर्वे में एक गेट मिलने की वजह से आईडी नहीं बन रही थी। कराधान अधिकारी ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड में कई मकानों को मिलाकर बड़ा मकान बनाना नियमविरुद्ध हैं। इसलिए सभी फाइलें हाउसिंग बोर्ड अधिकार के पास भेज दी गई हैं। जब तक वहां से कार्रवाई नहीं की जाएगी तब तक प्रॉपर्टी आईडी नहीं बनाई जा सकती है।
वहीं, हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के अधिशासी अभियंता अनिल वर्मा ने बताया कि हाउसिंह बोर्ड में कई मकान खरीदकर एक नहीं बनाया जा सकता है। यदि निगम ने ऐसे मामले पकड़कर भेजे हैं, तो निश्चित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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हुडा के जितने भी सेक्टर बनते हैं, उनमें हरियाणा हाउसिंग बोर्ड बीपीएस, गरीब और मध्यमवर्ग के लोगों के लिए मकान बनाता है। धनवानों को मांग के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री करता है। नियमानुसार हाउसिंग बोर्ड बीपीएल परिवार के लिए 35 गज, गरीबों के लिए 40 गज और मध्यमवर्ग के लिए 51 गज जमीन पर मकान बनाकर देता है। इनको खरीदकर बड़ा मकान बनाना नियम विरुद्ध है। नगर निगम हर प्रॉपर्टी की आईडी बना रहा है, जिसके तहत अभी तक करीब 10 हजार प्रॉपर्टी की आईडी बनाने में दिक्कत आ रही थी। निगम आयुक्त ने ज्वाइंट कमिश्नर के साथ एक कमेटी गठित की, जिसमें त्वरित रूप से समस्याओं का निदान किया जा सके। निगम के मुख्य कराधान अधिकारी जगदीश ने बताया कि कई प्रॉपर्टी की आईडी बनाते समय सॉफ्टवेयर डाटा फीड नहीं कर रहा है। जब सर्वे की रिपोर्ट देखी गई तो मौके पर एक ही गेट होना मिला। इसके बाद प्रॉपर्टी स्वामियों से रजिस्ट्री मंगाई गई तो खुलासा हुआ कि किसी ने दो तो किसी ने तीन छोटे-छोटे मकान खरीदकर बड़ा मकान बना लिया है। चूंकि सॉफ्टवेयर में दो या तीन गेट हैं और निगम के सर्वे में एक गेट मिलने की वजह से आईडी नहीं बन रही थी। कराधान अधिकारी ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड में कई मकानों को मिलाकर बड़ा मकान बनाना नियमविरुद्ध हैं। इसलिए सभी फाइलें हाउसिंग बोर्ड अधिकार के पास भेज दी गई हैं। जब तक वहां से कार्रवाई नहीं की जाएगी तब तक प्रॉपर्टी आईडी नहीं बनाई जा सकती है।
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वहीं, हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के अधिशासी अभियंता अनिल वर्मा ने बताया कि हाउसिंह बोर्ड में कई मकान खरीदकर एक नहीं बनाया जा सकता है। यदि निगम ने ऐसे मामले पकड़कर भेजे हैं, तो निश्चित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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