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सख्ती से बदली सोच, गूंजी बेटियों की किलकारी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 16 Mar 2017 12:59 AM IST
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राजनीति और खेलों से लेकर शिक्षा, सेना व पुलिस में दबदबा रखने वाले रोहतक जिले ने बेटियां बचाने में भी प्रदेश में पताका फहराई है। गांवों में गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग और शहरों में भ्रूण लिंग जांच करने वाले नर्सिंग होम संचालकों पर सख्ती के चलते लोगों की सोच बदली तो जिले में पिछले साल की अपेक्षा इस साल 46 बेटियां ज्यादा पैदा हुईं। बेटियों की किलकारियां गूंजने से लिंगानुपात में साल 2016 में सबसे ज्यादा सुधार हुआ तो सीएम मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को सोनीपत में डीसी अतुल कुमार को सम्मानित किया। डीसी को महेंद्रगढ़ का डीसी रहते हुए भी लिंगानुपात में सुधार के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
साल 2011 में लड़कों की अपेक्षा कम होती लड़कियों की संख्या की वजह से प्रदेश की पूरे देश में आलोचना हुई थी। रोहतक जिले में एक हजार लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या 813 पर पहुंच गई थी। हालांकि इसके बाद सुधार हुआ लेकिन गति धीमी रही। साल 2012 में 822, वर्ष 2013 में 827 तक ही लिंगानुपात हो पाया। भाजपा की सरकार बनने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर प्रदेश में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाया गया। खट्टर सरकार की सख्ती के चलते साल 2015 में एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 859 पर पहुंच गई। जबकि साल 2016 में एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 905 पर पहुंच गई। यह सुधार प्रतिशत प्रदेश में सबसे अधिक बताया जा रहा है।
गांवों में ट्रैकिंग सिस्टम रहा असरदार
बेटियों को बचाने के लिए डीसी अतुल कुमार ने साल 2016 में विशेष प्लानिंग बनाई। डीसी ने बताया कि आंगनबाड़ी वर्कर को हिदायत दी गई कि वे अपने क्षेत्र के प्रत्येक गांव में गर्भवती महिलाओं का रिकार्ड एकत्रित करें। हर माह महिला के स्वास्थ्य का रिकार्ड दर्ज करें। अगर कोई गर्भवती महिला स्वास्थ्य कर्मी के पास आकर चेकअप नहीं करवाती है तो आंगनबाड़ी वर्कर उसके घर जाकर पूछताछ करें। पता लगाएं कि आखिर महिला अपने हेल्थ की जांच क्यों नहीं करवा रही है। मामले की गहराई में जाने का प्रयास करें। अगर गर्भपात हुआ तो उसकी सूचना सीएमओ या जिला उपायुक्त को दी जाए। ऐसी स्थिति में गर्भवती महिला व उसके परिवार पर असर पड़ा। यह बात लोगों में घर कर गई कि शासन व प्रशासन की ओर से नजर रखी जा रही है। इसके साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। महिला एवं बाल विकास के माध्यम से महिलाओं और ग्रामीणों को समझाया गया कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।
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शहर में सख्ती बनी हथियार
गांवों के अंदर लिंग जांच की सुविधाएं नहीं हैं। ज्यादातर निजी अस्पताल व नर्सिंग होम शहर में हैं। ऐसे में जिला स्वास्थ्य विभाग ने लगातार छापेमारी की। दिल्ली और यूपी में जाकर लिंग जांच व गर्भपात करने वाले डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की। एक बार सीएमओ दीपा जांखड़ और डिप्टी सीएमओ कुलदीप सिंह रात के समय बस में बैठकर गाजियाबाद पहुंचे और गिरोह को काबू किया। इस तरह प्रशासन बेटियों को बचाने में कामयाब रहा।
छह साल में पहली बार लंबी छलांग
जिले में छह साल में लिंगानुपात में बेहतर सुधार दर्ज किया गया है। अब एक हजार लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या 905 हो गई है। इससे पहले सुधार तो हुआ, लेकिन आशाजनक प्रगति नहीं हो पा रही थी। इस बार सरकार की सख्ती और लोगों में बढ़ती जागरूकता के चलते यह कामयाबी मिली है।
वर्ष लड़कियों की संख्या
2016 905
2015 859
2014 854
2013 827
2012 822
2011 813
(स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक हजार लड़काें पर लड़कियों की संख्या)
लिंगानुपात में सुधार जिले के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास, आंगनबाड़ी, सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रयासों का नतीजा है। प्रदेश में सबसे ज्यादा लिंगानुपात में सुधार रोहतक जिले में हुआ है। साल 2015 की अपेक्षा साल 2016 में लड़कों की अपेक्षा 46 बेटियों ने ज्यादा जन्म लिया है। आगे भी प्रशासन की सख्ती, सतर्कता और जागरूकता अभियान जारी रहेगी।
- अतुल कुमार, जिला उपायुक्त
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साल 2011 में लड़कों की अपेक्षा कम होती लड़कियों की संख्या की वजह से प्रदेश की पूरे देश में आलोचना हुई थी। रोहतक जिले में एक हजार लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या 813 पर पहुंच गई थी। हालांकि इसके बाद सुधार हुआ लेकिन गति धीमी रही। साल 2012 में 822, वर्ष 2013 में 827 तक ही लिंगानुपात हो पाया। भाजपा की सरकार बनने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर प्रदेश में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाया गया। खट्टर सरकार की सख्ती के चलते साल 2015 में एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 859 पर पहुंच गई। जबकि साल 2016 में एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 905 पर पहुंच गई। यह सुधार प्रतिशत प्रदेश में सबसे अधिक बताया जा रहा है।
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गांवों में ट्रैकिंग सिस्टम रहा असरदार
बेटियों को बचाने के लिए डीसी अतुल कुमार ने साल 2016 में विशेष प्लानिंग बनाई। डीसी ने बताया कि आंगनबाड़ी वर्कर को हिदायत दी गई कि वे अपने क्षेत्र के प्रत्येक गांव में गर्भवती महिलाओं का रिकार्ड एकत्रित करें। हर माह महिला के स्वास्थ्य का रिकार्ड दर्ज करें। अगर कोई गर्भवती महिला स्वास्थ्य कर्मी के पास आकर चेकअप नहीं करवाती है तो आंगनबाड़ी वर्कर उसके घर जाकर पूछताछ करें। पता लगाएं कि आखिर महिला अपने हेल्थ की जांच क्यों नहीं करवा रही है। मामले की गहराई में जाने का प्रयास करें। अगर गर्भपात हुआ तो उसकी सूचना सीएमओ या जिला उपायुक्त को दी जाए। ऐसी स्थिति में गर्भवती महिला व उसके परिवार पर असर पड़ा। यह बात लोगों में घर कर गई कि शासन व प्रशासन की ओर से नजर रखी जा रही है। इसके साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। महिला एवं बाल विकास के माध्यम से महिलाओं और ग्रामीणों को समझाया गया कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।
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शहर में सख्ती बनी हथियार
गांवों के अंदर लिंग जांच की सुविधाएं नहीं हैं। ज्यादातर निजी अस्पताल व नर्सिंग होम शहर में हैं। ऐसे में जिला स्वास्थ्य विभाग ने लगातार छापेमारी की। दिल्ली और यूपी में जाकर लिंग जांच व गर्भपात करने वाले डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की। एक बार सीएमओ दीपा जांखड़ और डिप्टी सीएमओ कुलदीप सिंह रात के समय बस में बैठकर गाजियाबाद पहुंचे और गिरोह को काबू किया। इस तरह प्रशासन बेटियों को बचाने में कामयाब रहा।
छह साल में पहली बार लंबी छलांग
जिले में छह साल में लिंगानुपात में बेहतर सुधार दर्ज किया गया है। अब एक हजार लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या 905 हो गई है। इससे पहले सुधार तो हुआ, लेकिन आशाजनक प्रगति नहीं हो पा रही थी। इस बार सरकार की सख्ती और लोगों में बढ़ती जागरूकता के चलते यह कामयाबी मिली है।
वर्ष लड़कियों की संख्या
2016 905
2015 859
2014 854
2013 827
2012 822
2011 813
(स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक हजार लड़काें पर लड़कियों की संख्या)
लिंगानुपात में सुधार जिले के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास, आंगनबाड़ी, सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रयासों का नतीजा है। प्रदेश में सबसे ज्यादा लिंगानुपात में सुधार रोहतक जिले में हुआ है। साल 2015 की अपेक्षा साल 2016 में लड़कों की अपेक्षा 46 बेटियों ने ज्यादा जन्म लिया है। आगे भी प्रशासन की सख्ती, सतर्कता और जागरूकता अभियान जारी रहेगी।
- अतुल कुमार, जिला उपायुक्त