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Rohtak News: अंतरराष्ट्रीय इंडो-नेपाल थिएटर फेस्टिवल में रोहतक के कलाकारों ने दर्शकों को गुदगुदाया
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अंतरराष्ट्रीय इंडो-नेपाल थिएटर फेस्टिवल की समापन संध्या पर सप्तक कल्चरल सोसाइटी रोहतक की ओर से
रोहतक। अंतरराष्ट्रीय इंडो-नेपाल थिएटर फेस्टिवल की दूसरी और अंतिम संध्या पर सप्तक कल्चरल सोसाइटी रोहतक का चर्चित नाटक गधे की बारात के कलाकारों ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। कलाकारों ने नाटक के अंत तक दर्शकों को अपने अभिनय से बांधे रखा।
गधे की बारात नाटक का 348वां मंचन सीमा पार आयोजित फेस्टिवल में सराहा गया। नाटक के समन्वयक, फिल्म एवं रंगमंच अभिनेता राज न्यौपाने ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इस फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक सद्भावना को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि संस्कृति ही वह सशक्त माध्यम है, जो दो देशों को आपसी प्रेम, सम्मान और समझ के सूत्र में बांध सकती है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से कलाकारों के साथ-साथ समाज के बीच भी आपसी संवाद को बढ़ावा मिलता है।
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प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य नाटक गधे की बारात अपने सशक्त कथानक और जीवंत अभिनय के माध्यम से दर्शकों को गुदगुदाने में पूरी तरह सफल रहा। मंचन की विशेषता यह रही कि इसमें भारत और नेपाल दोनों देशों के कलाकारों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।
इसमें रोहतक से छह और नेपाल से चार कलाकारों ने मंच साझा किया, जिससे यह प्रस्तुति सांस्कृतिक समन्वय का सजीव उदाहरण बनी।
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गधे की बारात नाटक का 348वां मंचन सीमा पार आयोजित फेस्टिवल में सराहा गया। नाटक के समन्वयक, फिल्म एवं रंगमंच अभिनेता राज न्यौपाने ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इस फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक सद्भावना को मजबूत करना है।
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उन्होंने कहा कि संस्कृति ही वह सशक्त माध्यम है, जो दो देशों को आपसी प्रेम, सम्मान और समझ के सूत्र में बांध सकती है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से कलाकारों के साथ-साथ समाज के बीच भी आपसी संवाद को बढ़ावा मिलता है।
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प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य नाटक गधे की बारात अपने सशक्त कथानक और जीवंत अभिनय के माध्यम से दर्शकों को गुदगुदाने में पूरी तरह सफल रहा। मंचन की विशेषता यह रही कि इसमें भारत और नेपाल दोनों देशों के कलाकारों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।
इसमें रोहतक से छह और नेपाल से चार कलाकारों ने मंच साझा किया, जिससे यह प्रस्तुति सांस्कृतिक समन्वय का सजीव उदाहरण बनी।