{"_id":"6458174adf8ec3673606b637","slug":"anamika-first-in-poetry-competition-nisha-second-rohtak-news-c-17-roh1020-146167-2023-05-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: काव्य स्पर्धा में अनामिका प्रथम, निशा द्वितीय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: काव्य स्पर्धा में अनामिका प्रथम, निशा द्वितीय
विज्ञापन
ऑनलाइन काव्य प्रतियोगिता से जुडे़ प्रतिभागी । विज्ञप्ति
रोहतक। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कवि रवींद्रनाथ टैगोर की 162वीं जयंती पर रविवार को राष्ट्रीय स्तरीय ऑनलाइन काव्य प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। गौड़ ब्राह्मण डिग्री कॉलेज के अंग्रेजी विभाग की ओर से यह आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यक्रम संयोजक एवं कॉलेज प्राचार्य डॉ. जयपाल शर्मा ने की। प्रतियोगिता में महाराजा अग्रसेन कॉलेज झज्जर की छात्रा अनामिका प्रथम, टीकाराम कॉलेज सोनीपत की छात्रा निशा द्वितीय और मेजबान कॉलेज का छात्र हर्ष तृतीय रहा।
स्पर्धा में महाराजा अग्रसेन कॉलेज झज्जर की छात्रा अनामिका प्रथम, टीकाराम कॉलेज सोनीपत की छात्रा निशा द्वितीय व गौड़ ब्राह्मण डिग्री कॉलेज का छात्र हर्ष तृतीय रहा। प्राचार्य ने कहा कि टैगोर दुनिया के अकेले ऐसे कवि हैं, जिनकी दो कृतियां, दो देशों की राष्ट्रगान बनीं। भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता’ और बांग्लादेश का ‘आमार सोनार बांग्ला’ है। उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर ने साहित्य, शिक्षा, संगीत, कला, रंगमंच और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अनूठी प्रतिभा का परिचय दिया। अपने मानवतावादी दृष्टिकोण के कारण वे सही मायनों में विश्व कवि बने। वे ‘गुरुदेव’ के नाम से लोकप्रिय हुए। गुरुदेव के काव्य के मानवतावाद ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई। दुनिया की तमाम भाषाओं में उनकी रचनाओं को पसंद किया जाता है। वे चाहते थे कि विद्यार्थियों को प्रकृति के सानिध्य में अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने इसी सोच को मूर्त रूप देने के लिए शांति निकेतन की स्थापना की।
विज्ञापन
आयोजन सचिव एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू शर्मा ने कहा कि प्रतियोगिता में विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने काव्य पाठ किया। उन्होंने कहा कि टैगोर एक ऐसे कवि थे जो विश्व बंधुत्व की भावना में यकीन रखते थे। उन्होंने अपनी लेखनी व कला के जरिए अंतरराष्ट्रीय भाईचारे का प्रचार-प्रसार किया। निर्णायक मंडल में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ जेके शर्मा, महाराजा अग्रसेन महिला महाविद्यालय झज्जर की अंग्रेजी विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष चाहर रही।
सह सचिव डॉ. कपिल कौशिक ने कार्यक्रम के अंत में सबका आभार व्यक्त किया। इस मौके पर डॉ. मनीषा खासा, नीरज वत्स, डॉ. मंजू नांदल, सुमन शर्मा मौजूद रही।
विज्ञापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यक्रम संयोजक एवं कॉलेज प्राचार्य डॉ. जयपाल शर्मा ने की। प्रतियोगिता में महाराजा अग्रसेन कॉलेज झज्जर की छात्रा अनामिका प्रथम, टीकाराम कॉलेज सोनीपत की छात्रा निशा द्वितीय और मेजबान कॉलेज का छात्र हर्ष तृतीय रहा।
विज्ञापन
स्पर्धा में महाराजा अग्रसेन कॉलेज झज्जर की छात्रा अनामिका प्रथम, टीकाराम कॉलेज सोनीपत की छात्रा निशा द्वितीय व गौड़ ब्राह्मण डिग्री कॉलेज का छात्र हर्ष तृतीय रहा। प्राचार्य ने कहा कि टैगोर दुनिया के अकेले ऐसे कवि हैं, जिनकी दो कृतियां, दो देशों की राष्ट्रगान बनीं। भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता’ और बांग्लादेश का ‘आमार सोनार बांग्ला’ है। उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर ने साहित्य, शिक्षा, संगीत, कला, रंगमंच और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अनूठी प्रतिभा का परिचय दिया। अपने मानवतावादी दृष्टिकोण के कारण वे सही मायनों में विश्व कवि बने। वे ‘गुरुदेव’ के नाम से लोकप्रिय हुए। गुरुदेव के काव्य के मानवतावाद ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई। दुनिया की तमाम भाषाओं में उनकी रचनाओं को पसंद किया जाता है। वे चाहते थे कि विद्यार्थियों को प्रकृति के सानिध्य में अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने इसी सोच को मूर्त रूप देने के लिए शांति निकेतन की स्थापना की।
विज्ञापन
आयोजन सचिव एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू शर्मा ने कहा कि प्रतियोगिता में विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने काव्य पाठ किया। उन्होंने कहा कि टैगोर एक ऐसे कवि थे जो विश्व बंधुत्व की भावना में यकीन रखते थे। उन्होंने अपनी लेखनी व कला के जरिए अंतरराष्ट्रीय भाईचारे का प्रचार-प्रसार किया। निर्णायक मंडल में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ जेके शर्मा, महाराजा अग्रसेन महिला महाविद्यालय झज्जर की अंग्रेजी विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष चाहर रही।
सह सचिव डॉ. कपिल कौशिक ने कार्यक्रम के अंत में सबका आभार व्यक्त किया। इस मौके पर डॉ. मनीषा खासा, नीरज वत्स, डॉ. मंजू नांदल, सुमन शर्मा मौजूद रही।