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दो साल की जद्दोजहद के बाद 2005 में आए चार पाकिस्तानियों को भारत की नागरिकता
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after two years problem pakistani citizen approve indian
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रोहतक। एक तरफ जहां देश में सीएए व एनआरसी के विरोध में जगह-जगह हिंसा हो रही है। वहीं दूसरी तरफ डेढ़ दशक से जिले के गांव मदीना में रह रहे पाकिस्तान से आए हंसराज का परिवार राहत महसूस कर रहा है। शनिवार को मदीना से रोहतक शहर सांसद अरविंद शर्मा से मिलने पहुंचे हंसराज ने बताया कि उसे परिवार के चार सदस्यों के लिए भारतीय नागरिकता लेने में दो साल लग गए। क्योंकि नागरिका से जुड़े नियम काफी जटिल थे। अब नागरिकता संशोधन एक्ट से परिवार के बचे आठ सदस्यों को जल्दी नागरिकता मिल जाएगी।
हंसराज ने बताया कि वह परिवार सहित 2005 में टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। पाकिस्तान में उसकी तीन किले जमीन थी, जिसे वह छोड़कर परिवार सहित आ गया। क्योंकि वहां पर उनकी जान सुरक्षित नहीं थी। भारत आने के बाद वह रोहतक के मदीना गांव में आ गया, जहां खेतों में मजदूरी करने लगे। उस समय परिवार में चार सदस्य थे, जिनमें लश्कर दास, हंसदास, सुगरा व मां मारो देवी। 2017 में चारों ने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया। उस समय शर्त थी कि पाकिस्तान से परिवार 11 साल पहले भारत आया हो। अब 4 दिसंबर 2019 को जिला प्रशासन ने चारों को नागरिकता दी है। अब परिवार में 12 सदस्य हैं। बचे आठ सदस्यों को नए कानून के तहत नागरिकता दिलवाएंगे, क्योंकि सीएए (नागरिकता संशोधन एक्ट) के बनने से अब नागरिका लेना आसान हो गया है। वहीं, सांसद डॉ अरविंद शर्मा ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल हर प्रकार से देश और नागरिक हित में है। क्योंकि यह कानून पाकिस्तान में जुल्म सहने वाले परिवारों को राहत प्रदान करता है। बावजूद इसके कुछ लोग बहकावे में आकर हिंसा कर रहे हैं। सरकार ने ऐसे लोगों से निपटना शुरू कर दिया है। यूपी व कुछ अन्य राज्यों ने तो दंगा फसाद करने वाले लोगों से ही नुकसान की भरपाई करने की बात कही है। उन्होंने आमजन का आह्वान करते हुए कहा कि यह देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है। उपद्रवी का न कोई धर्म होता है न जाति होती है और इस प्रकार के लोग किसी अन्य के हाथों का खिलौना बन कर इस प्रकार के कृत्य करते हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इसलिए किसी भी प्रकार के बहकावे व अफवाहों से बचें।
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हंसराज ने बताया कि वह परिवार सहित 2005 में टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। पाकिस्तान में उसकी तीन किले जमीन थी, जिसे वह छोड़कर परिवार सहित आ गया। क्योंकि वहां पर उनकी जान सुरक्षित नहीं थी। भारत आने के बाद वह रोहतक के मदीना गांव में आ गया, जहां खेतों में मजदूरी करने लगे। उस समय परिवार में चार सदस्य थे, जिनमें लश्कर दास, हंसदास, सुगरा व मां मारो देवी। 2017 में चारों ने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया। उस समय शर्त थी कि पाकिस्तान से परिवार 11 साल पहले भारत आया हो। अब 4 दिसंबर 2019 को जिला प्रशासन ने चारों को नागरिकता दी है। अब परिवार में 12 सदस्य हैं। बचे आठ सदस्यों को नए कानून के तहत नागरिकता दिलवाएंगे, क्योंकि सीएए (नागरिकता संशोधन एक्ट) के बनने से अब नागरिका लेना आसान हो गया है। वहीं, सांसद डॉ अरविंद शर्मा ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल हर प्रकार से देश और नागरिक हित में है। क्योंकि यह कानून पाकिस्तान में जुल्म सहने वाले परिवारों को राहत प्रदान करता है। बावजूद इसके कुछ लोग बहकावे में आकर हिंसा कर रहे हैं। सरकार ने ऐसे लोगों से निपटना शुरू कर दिया है। यूपी व कुछ अन्य राज्यों ने तो दंगा फसाद करने वाले लोगों से ही नुकसान की भरपाई करने की बात कही है। उन्होंने आमजन का आह्वान करते हुए कहा कि यह देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है। उपद्रवी का न कोई धर्म होता है न जाति होती है और इस प्रकार के लोग किसी अन्य के हाथों का खिलौना बन कर इस प्रकार के कृत्य करते हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इसलिए किसी भी प्रकार के बहकावे व अफवाहों से बचें।
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