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पर्यावरण बचाने के लिए अपनाएं 9-आर मंत्र
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प्रोफेसर डॉ. राजेश धनखड़।
- फोटो : RohtakCity
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तपती धरती। क्षीण होती ओजोन परत और गड़बड़ाता पर्यावरण संतुलन। हमें लगातार संभलने के संकेत दे रहे हैं। बाढ़, भूकंप, सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएं पर्यावरण संरक्षण को चेतावनी दे रहे हैं। इसके बावजूद हम लापरवाह बने हुए हैं। हमें पर्यावरण बचाना है तो 9-आर मंत्र अपनाना होगा। इसमें री-थिंक, री-ड्यूस, री-यूज, री-साइकिल, रिपेयर, री-गिफ्ट, रिफ्यूज, रेंट, रॉट शामिल हैं। इको सिस्टम री-स्टोर करने लिए यही बेहतर कदम हैं। इसीलिए डब्ल्यूएचओ ने भी इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का थीम इको सिस्टम रिस्टोरेशन दिया है। इसका अर्थ है परिस्थिति तंत्र की बहाली। यह चिंतन पर्यावरणविद व वैज्ञानिकों का है। शुक्रवार को पर्यावरण दिवस के संबंध में अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में ये बातें सामने आई।
पर्यावरणविद व पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे इको सिस्टम को री-स्टोर करना होगा। यही समय की भी मांग है। संसाधनों का अत्यधिक दोहन रोकना होगा। हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई आने वाले समय में कोरोना में बनी ऑक्सीजन किल्लत की तरह मुश्किल पैदा कर सकती है। इसीलिए डब्ल्यूएचओ ने इस बार इको सिस्टम री-स्टोरेशन थीम दिया है। इसके तहत काम करते हुए अपने पर्यावरण को मजबूत बनाना होगा। इस कड़ी में अनेक कदम उठाने की जरूरत है। इसमें पौधरोपण, शहर को हराभरा बनाना, इको भवन बनाना, प्लास्टिक प्रयोग से परहेज, प्लास्टिक के बजाय री-साइकिल यूज पर जोर देना, संसाधन संरक्षण, हर काम के लिए कागज प्रयोग करने के बजाय डिजिट बनना व बिजली-पानी का संरक्षण शामिल है।
एक्यूआई आज रहा 122
कोरोना महामारी और लॉकडाउन पर्यावरण की लिहाज से बेहतर नजर आ रहा है। लॉकडाउन में वाहनों का कम प्रयोग होने, फैक्टरियां बंद होने से हवा की गुणवत्ता में सुधार आया है। शुक्रवार को एक्यूआई 122 रहा। हवा में सूक्ष्म धूल कण यानी पीएम 2.5 का स्तर कम हुआ है। इससे अस्थमा व सांस के रोगियों को ही नहीं, सभी को राहत मिली है। जबकि आम दिनों में एक्यूआई या प्रदूषण का स्तर 400 से 450 के आसपास रहता है। फसलों के अवशेष जलने के समय तो यह 500 से ऊपर पहुंच जाता है। प्रदूषण विभाग के मुताबिक, 31 दिसंबर 2020 को प्रदूषण का स्तर 370 रहा। जबकि तीन नवंबर 2019 को प्रदूषण का स्तर 498 दर्ज किया गया। इसी साल तीन जून को यह स्तर 254 था।
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एमडीयू में गतिविधियां आज
पर्यावरण दिवस पर एमडीयू समेत अन्य संस्थानों में शनिवार को विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। एमडीयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग में भी व्याख्यान व अन्य गतिविधियों का आयोजन होगा। यहां पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति पर चिंतन के साथ समाधान पर भी विचार रखे जाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए 9-आर मंत्र अपनाना बेहतर है। पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। कोरोना कॉल में लॉकडाउन ने हमें पर्यावरण की स्थिति करीब से दिखाई है। इस दौरान वाहनों व फैक्ट्रियों के बंद होने से प्रदूषण का स्तर बेहतर बना है। जबकि सामान्य दिनों में यह खतरनाक स्तर पर बढ़ जाता है।
-डॉ. राजेश धनखड़, वरिष्ठ प्रोफेसर, पर्यावरण विज्ञान विभाग, एमडीयू
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पर्यावरणविद व पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे इको सिस्टम को री-स्टोर करना होगा। यही समय की भी मांग है। संसाधनों का अत्यधिक दोहन रोकना होगा। हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई आने वाले समय में कोरोना में बनी ऑक्सीजन किल्लत की तरह मुश्किल पैदा कर सकती है। इसीलिए डब्ल्यूएचओ ने इस बार इको सिस्टम री-स्टोरेशन थीम दिया है। इसके तहत काम करते हुए अपने पर्यावरण को मजबूत बनाना होगा। इस कड़ी में अनेक कदम उठाने की जरूरत है। इसमें पौधरोपण, शहर को हराभरा बनाना, इको भवन बनाना, प्लास्टिक प्रयोग से परहेज, प्लास्टिक के बजाय री-साइकिल यूज पर जोर देना, संसाधन संरक्षण, हर काम के लिए कागज प्रयोग करने के बजाय डिजिट बनना व बिजली-पानी का संरक्षण शामिल है।
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एक्यूआई आज रहा 122
कोरोना महामारी और लॉकडाउन पर्यावरण की लिहाज से बेहतर नजर आ रहा है। लॉकडाउन में वाहनों का कम प्रयोग होने, फैक्टरियां बंद होने से हवा की गुणवत्ता में सुधार आया है। शुक्रवार को एक्यूआई 122 रहा। हवा में सूक्ष्म धूल कण यानी पीएम 2.5 का स्तर कम हुआ है। इससे अस्थमा व सांस के रोगियों को ही नहीं, सभी को राहत मिली है। जबकि आम दिनों में एक्यूआई या प्रदूषण का स्तर 400 से 450 के आसपास रहता है। फसलों के अवशेष जलने के समय तो यह 500 से ऊपर पहुंच जाता है। प्रदूषण विभाग के मुताबिक, 31 दिसंबर 2020 को प्रदूषण का स्तर 370 रहा। जबकि तीन नवंबर 2019 को प्रदूषण का स्तर 498 दर्ज किया गया। इसी साल तीन जून को यह स्तर 254 था।
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एमडीयू में गतिविधियां आज
पर्यावरण दिवस पर एमडीयू समेत अन्य संस्थानों में शनिवार को विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। एमडीयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग में भी व्याख्यान व अन्य गतिविधियों का आयोजन होगा। यहां पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति पर चिंतन के साथ समाधान पर भी विचार रखे जाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके लिए 9-आर मंत्र अपनाना बेहतर है। पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। कोरोना कॉल में लॉकडाउन ने हमें पर्यावरण की स्थिति करीब से दिखाई है। इस दौरान वाहनों व फैक्ट्रियों के बंद होने से प्रदूषण का स्तर बेहतर बना है। जबकि सामान्य दिनों में यह खतरनाक स्तर पर बढ़ जाता है।
-डॉ. राजेश धनखड़, वरिष्ठ प्रोफेसर, पर्यावरण विज्ञान विभाग, एमडीयू