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Rohtak News: उद्योगों के लिए सरकारी योजनाओं की पहुंच और नई तकनीक जरूरी
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रोहतक। एमएसएमई की चुनौतियों और संभावनाओं पर अमर उजाला की तरफ से आयोजित कॉन्क्लेव में उद्यमियों के बीच दो वर्गों में पैनल चर्चा भी हुई। पहले पैनल डिस्कशन में एमएसएमई के भविष्य, सरकारी योजनाओं तक पहुंच और तत्काल तकनीक की जरूरत उभर कर सामने आई। वहीं, दूसरे पैनल में ढांचागत सुविधाओं की कमी, मेक इन इंडिया कॉन्सेप्ट, युवाओं के लिए नए उद्यम शुरू करने की चुनौतियां मुख्य रहीं।
पैनल संचालक एमडीयू के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार, महेश महावर व पैनल सदस्यों ने उद्यमियों के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासा शांत की। मंच संचालन डॉ. कपिल कौशिक ने किया।
पहले पैनल में फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष प्रवीण गर्ग ने कहा, पिछले 8 साल में अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का सहयोग रहा है। इंडस्ट्री बढ़ेगी तो अर्थव्यवस्था भी बढ़ेगी। युवाओं के लिए इंडस्ट्री में भविष्य उज्ज्वल है।
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आईएमटी उद्योग वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जोगिंद्र नांदल ने सरकारी योजनाओं से अवगत कराते हुए कहा वे पिछले 40 साल से इंडस्ट्री चला रहे हैं। जागरूकता की कमी से ही योजनाओं का लाभ उद्यमियों तक नहीं पहुंचता है। प्रसार के जरिए सरकार की योजनाओं को लाभ पात्रों तक पहुंचाया जा सकता है। सरकार के अनेक प्रोविजन है लेकिन उनकी सभी को जानकारी नहीं है।
ग्रेटर हिसार चेंबर ऑफ कॉमर्स के संस्थापक नितिन गोयल ने तकनीक व एआई के संदर्भ में कहा कि एमएसएमई को जुगाड़ कहा जाता है। वास्तव में ऐसा नहीं है। एमएसएमई को सकारात्मक रूप में लेने की जरूरत है। यह उद्योगों के विकास में सही मार्गदर्शन करेगा। इसमें नई तनकनीक, प्लान व मार्केटिंग का बड़ा योगदान है।
दूसरे पैनल में संचालक महेश महावर ने इंडस्ट्री में चुनौती व अवसर पर सवाल किया। आईएमटी उद्योग वेलफेयर एसोसिएशन रोहतक सचिव संदीप नांदल ने परिस्थित व अवसर पर कहा कि मेक इन इंडिया के लिए देश बढ़ रहा है। मेक इंडिया पर काम करेंगे तो हम पर टैरिफ का असर नहीं पड़ेगा। लोगों का रुझान व मेक इन इंडिया का प्रचलन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। उद्याेगों में संरचनात्मक ढांचे की कमी रही। इसमें बिजली, पानी, सीवर की समस्या मुख्य है।
खरखौदा इंडस्ट्री के प्रधान राजीव दाहिया ने कहा कि सरकारी नौकरी को दिमाग से निकाल देना चाहिए। देश को सबसे बड़ा उत्पादक बनाने में युवाओं का योगदान रहेगा। युवाओं को अपना उद्यम शुरू करने की जानकारी नहीं है। संबंधित विभागों को शिक्षण संस्थाओं में जाकर जागरूकता फैलानी चाहिए। एमएसएमई को समझने के लिए चर्चा जरूरी है।
असंगठित उद्योगों ने थोड़ा-थोड़ा करके उद्योगों को दिया बढ़ावा
जीएसटी विशेषज्ञ अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि असंगठित उद्योगों ने थोड़ा-थोड़ा काम करके ही बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया है। सरकार को फुटवियर पर जीएसटी बढ़ाकर वापस 12 प्रतिशत कर देना चाहिए। हिसार से उद्यमी सुमित्रा ने निजी अनुभव साझा करते हुए युवाओं को स्वरोजगार अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इंसान चाहे तो कुछ भी कर सकता है। वह खुद इसकी उदाहरण हैं। महिलाएं घर से निकलें। अपना काम शुरू करें। अपने प्रयास से वर्तमान में पांच हजार महिलाओं को रोजगार मुहैया कराया है। उनके उद्यमशील बनाने की राह भी प्रशस्त की है। यह केवल इच्छा शक्ति से ही संभव हुआ है।
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पैनल संचालक एमडीयू के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार, महेश महावर व पैनल सदस्यों ने उद्यमियों के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासा शांत की। मंच संचालन डॉ. कपिल कौशिक ने किया।
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पहले पैनल में फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष प्रवीण गर्ग ने कहा, पिछले 8 साल में अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का सहयोग रहा है। इंडस्ट्री बढ़ेगी तो अर्थव्यवस्था भी बढ़ेगी। युवाओं के लिए इंडस्ट्री में भविष्य उज्ज्वल है।
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आईएमटी उद्योग वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जोगिंद्र नांदल ने सरकारी योजनाओं से अवगत कराते हुए कहा वे पिछले 40 साल से इंडस्ट्री चला रहे हैं। जागरूकता की कमी से ही योजनाओं का लाभ उद्यमियों तक नहीं पहुंचता है। प्रसार के जरिए सरकार की योजनाओं को लाभ पात्रों तक पहुंचाया जा सकता है। सरकार के अनेक प्रोविजन है लेकिन उनकी सभी को जानकारी नहीं है।
ग्रेटर हिसार चेंबर ऑफ कॉमर्स के संस्थापक नितिन गोयल ने तकनीक व एआई के संदर्भ में कहा कि एमएसएमई को जुगाड़ कहा जाता है। वास्तव में ऐसा नहीं है। एमएसएमई को सकारात्मक रूप में लेने की जरूरत है। यह उद्योगों के विकास में सही मार्गदर्शन करेगा। इसमें नई तनकनीक, प्लान व मार्केटिंग का बड़ा योगदान है।
दूसरे पैनल में संचालक महेश महावर ने इंडस्ट्री में चुनौती व अवसर पर सवाल किया। आईएमटी उद्योग वेलफेयर एसोसिएशन रोहतक सचिव संदीप नांदल ने परिस्थित व अवसर पर कहा कि मेक इन इंडिया के लिए देश बढ़ रहा है। मेक इंडिया पर काम करेंगे तो हम पर टैरिफ का असर नहीं पड़ेगा। लोगों का रुझान व मेक इन इंडिया का प्रचलन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। उद्याेगों में संरचनात्मक ढांचे की कमी रही। इसमें बिजली, पानी, सीवर की समस्या मुख्य है।
खरखौदा इंडस्ट्री के प्रधान राजीव दाहिया ने कहा कि सरकारी नौकरी को दिमाग से निकाल देना चाहिए। देश को सबसे बड़ा उत्पादक बनाने में युवाओं का योगदान रहेगा। युवाओं को अपना उद्यम शुरू करने की जानकारी नहीं है। संबंधित विभागों को शिक्षण संस्थाओं में जाकर जागरूकता फैलानी चाहिए। एमएसएमई को समझने के लिए चर्चा जरूरी है।
असंगठित उद्योगों ने थोड़ा-थोड़ा करके उद्योगों को दिया बढ़ावा
जीएसटी विशेषज्ञ अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि असंगठित उद्योगों ने थोड़ा-थोड़ा काम करके ही बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया है। सरकार को फुटवियर पर जीएसटी बढ़ाकर वापस 12 प्रतिशत कर देना चाहिए। हिसार से उद्यमी सुमित्रा ने निजी अनुभव साझा करते हुए युवाओं को स्वरोजगार अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इंसान चाहे तो कुछ भी कर सकता है। वह खुद इसकी उदाहरण हैं। महिलाएं घर से निकलें। अपना काम शुरू करें। अपने प्रयास से वर्तमान में पांच हजार महिलाओं को रोजगार मुहैया कराया है। उनके उद्यमशील बनाने की राह भी प्रशस्त की है। यह केवल इच्छा शक्ति से ही संभव हुआ है।