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Rohtak News: 500 फीट का विशालकाय चित्र...प्रतीकों के जरिए कहता है भारत की कहानी
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एमडीयू के टैगोर ऑडिटोरियम में लगाया गणतंत्र दिवस के लिए तैयार विशाल चित्र। स्रोत : एमडीयू
करिश्मा रंगा
रोहतक। एमडीयू के दृश्य कला विभाग ने गणतंत्र दिवस समारोह के लिए करीब 500 वर्ग फुट क्षेत्रफल का 40 फीट लंबा और 14 फीट ऊंचा विशालकाय चित्र तैयार किया है। यह कलाकृति केवल एक चित्र नहीं बल्कि राष्ट्र, संस्कृति, किसान, सैनिक और युवा चेतना की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है।
विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने बताया कि चित्र निर्माण में जर्मनी से उच्च गुणवत्ता वाले रंगों का भी प्रयोग किया गया है जो 500 साल तक फीके नहीं पड़ेंगे। करीब 20 लीटर रंगों का उपयोग किया गया है।
इसके साथ ही इंदौर से मजबूत कैनवास से मंगाया गया। चित्र की भव्यता बढ़ाने के लिए गोल्डन कलर फॉइल का भी प्रयोग किया गया। नौ विद्यार्थियों ने इस चित्र को तैयार करने के लिए लगातार 12 घंटे तक मेहनत करते हुए रात 2 बजे तक कार्य किया।
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तिरंगा और भारत माता से झलकती राष्ट्रीय चेतना
चित्र के शीर्ष भाग में पूर्ण ऊंचाई पर लहराता राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। इसके साथ दर्शाई गई भारत माता राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा और मातृशक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। तिरंगे के ऊपर अंतरिक्ष में स्थित ध्वज भारत की वैज्ञानिक प्रगति और वैश्विक पहचान को दर्शाता है। सुनहरी गेहूं की बालियां, चिड़िया स्वतंत्रता, शांति और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। कमल पुष्प भारतीय दर्शन, पवित्रता और निरंतर विकास का संकेत देता है।
सशस्त्र बलों की ताकत और संवेदनशीलता
चित्र के निचले हिस्से में भारतीय सशस्त्र बलों थल सेना, नौसेना और वायुसेना को दर्शाया गया है। शांत और संकल्पित चेहरों के माध्यम से बलिदान, अनुशासन और देश की सुरक्षा का संदेश दिया गया है। सैनिक के हाथों पर बैठी सुनहरी चिड़िया यह दर्शाती है कि भारत की शक्ति केवल शौर्य में ही नहीं मानवीय संवेदनाओं में भी निहित है। गेहूं की बालियां और किसान भारत की कृषि परंपरा, अन्नदाता के सम्मान और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूती से प्रस्तुत करते हैं।
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रोहतक। एमडीयू के दृश्य कला विभाग ने गणतंत्र दिवस समारोह के लिए करीब 500 वर्ग फुट क्षेत्रफल का 40 फीट लंबा और 14 फीट ऊंचा विशालकाय चित्र तैयार किया है। यह कलाकृति केवल एक चित्र नहीं बल्कि राष्ट्र, संस्कृति, किसान, सैनिक और युवा चेतना की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है।
विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने बताया कि चित्र निर्माण में जर्मनी से उच्च गुणवत्ता वाले रंगों का भी प्रयोग किया गया है जो 500 साल तक फीके नहीं पड़ेंगे। करीब 20 लीटर रंगों का उपयोग किया गया है।
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इसके साथ ही इंदौर से मजबूत कैनवास से मंगाया गया। चित्र की भव्यता बढ़ाने के लिए गोल्डन कलर फॉइल का भी प्रयोग किया गया। नौ विद्यार्थियों ने इस चित्र को तैयार करने के लिए लगातार 12 घंटे तक मेहनत करते हुए रात 2 बजे तक कार्य किया।
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तिरंगा और भारत माता से झलकती राष्ट्रीय चेतना
चित्र के शीर्ष भाग में पूर्ण ऊंचाई पर लहराता राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। इसके साथ दर्शाई गई भारत माता राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा और मातृशक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। तिरंगे के ऊपर अंतरिक्ष में स्थित ध्वज भारत की वैज्ञानिक प्रगति और वैश्विक पहचान को दर्शाता है। सुनहरी गेहूं की बालियां, चिड़िया स्वतंत्रता, शांति और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। कमल पुष्प भारतीय दर्शन, पवित्रता और निरंतर विकास का संकेत देता है।
सशस्त्र बलों की ताकत और संवेदनशीलता
चित्र के निचले हिस्से में भारतीय सशस्त्र बलों थल सेना, नौसेना और वायुसेना को दर्शाया गया है। शांत और संकल्पित चेहरों के माध्यम से बलिदान, अनुशासन और देश की सुरक्षा का संदेश दिया गया है। सैनिक के हाथों पर बैठी सुनहरी चिड़िया यह दर्शाती है कि भारत की शक्ति केवल शौर्य में ही नहीं मानवीय संवेदनाओं में भी निहित है। गेहूं की बालियां और किसान भारत की कृषि परंपरा, अन्नदाता के सम्मान और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूती से प्रस्तुत करते हैं।