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डॉ. गुरप्रीत कौर को एनएनएफ गोल्ड मैडल अवार्ड
Rohtak
Updated Wed, 18 Dec 2013 05:49 AM IST
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रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के शिशु रोग विभाग की पीजी छात्रा डॉ. गुरप्रीत कौर को नेशनल नीयोनेटोलोजी फोरम द्वारा 13 से 15 दिसंबर तक हैदराबाद में आयोजित हुई 33 वीं वार्षिक कांफ्रेंस नीओकोन- 2013 में एनएनएफ गोल्ड मैडल अवार्ड से नवाजा गया है। कुलपति डॉ. एसएस सांगवान, कार्यकारी कुलसचिव डॉ. अशोक चौहान, कार्यकारी निदेशक डॉ. सुषमा सूद, शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला ने डॉ. गुरप्रीत कौर को बधाई दी।
डॉ. गठवाला ने बताया कि नीओकोन-2013 में पीजीआईएमएस की तरफ से डॉ. गुरप्रीत ने इस कांफ्रेंस में हिस्सा लिया और अपना पेपर प्रस्तुत किया। डॉ. गुरप्रीत ने बताया कि जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों में इंफेक्शन होने का खतरा अधिक रहता है, जिससे बच्चा बीमारियों की चपेट में आ जाता है। उन्होंने ऐसे बच्चों मेें गाय के दूध से निकाला गया बोवाईन लैक्टोफैरिन का प्रयोग करके अधिकतर शिशुओं में इंफेक्शन का स्तर कम होता हुआ देखा। डॉ. गुरप्रीत ने बताया कि उन्होंने करीब 120 बच्चों पर इस रिसर्च को करके देखा, जिसका परिणाम काफी अच्छा आया। इसके चलते उन्होंने अपने इस पेपर को नेशनल नियोनोटोलोजी फोरम में भेजा, जिस पर पूरे देश से केवल तीन पेपरों का चयन किया गया। जिसमें दिल्ली, मुंबई और रोहतक रहे। उन्होंने बताया कि नीओकोन-2013 में जब अपने इस पेपर को प्रस्तुत किया तो उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा गया। उन्होंने इसका श्रेय कुलपति डॉ. एसएस सांगवान और विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला को दिया।
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डॉ. गठवाला ने बताया कि नीओकोन-2013 में पीजीआईएमएस की तरफ से डॉ. गुरप्रीत ने इस कांफ्रेंस में हिस्सा लिया और अपना पेपर प्रस्तुत किया। डॉ. गुरप्रीत ने बताया कि जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों में इंफेक्शन होने का खतरा अधिक रहता है, जिससे बच्चा बीमारियों की चपेट में आ जाता है। उन्होंने ऐसे बच्चों मेें गाय के दूध से निकाला गया बोवाईन लैक्टोफैरिन का प्रयोग करके अधिकतर शिशुओं में इंफेक्शन का स्तर कम होता हुआ देखा। डॉ. गुरप्रीत ने बताया कि उन्होंने करीब 120 बच्चों पर इस रिसर्च को करके देखा, जिसका परिणाम काफी अच्छा आया। इसके चलते उन्होंने अपने इस पेपर को नेशनल नियोनोटोलोजी फोरम में भेजा, जिस पर पूरे देश से केवल तीन पेपरों का चयन किया गया। जिसमें दिल्ली, मुंबई और रोहतक रहे। उन्होंने बताया कि नीओकोन-2013 में जब अपने इस पेपर को प्रस्तुत किया तो उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा गया। उन्होंने इसका श्रेय कुलपति डॉ. एसएस सांगवान और विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला को दिया।
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