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मां के हत्यारे पिता को बचाने के लिए बेटे की दी गवाही नहीं आई काम
Updated Sat, 05 May 2018 02:16 AM IST
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पत्नी के शव के पास नहीं मिला पति, अदालत ने माना हत्यारा, आजीवन कारावास
- परिस्थितियां बनी गवाह, बेटे द्वारा पिता को बचाने के लिए दी गई गवाही भी कोर्ट ने नहीं मानी
- 2013 में घर पर फर्श के ऊपर लहूलुहान हालत में मिला था महिला सरोज का शव
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पांच साल पहले जनता कॉलोनी में मकान बेचने को लेकर हुए झगड़े में पत्नी सरोज की हत्या के आरोपी पति सोमदत्त को अदालत ने दोषी माना है। शुक्रवार को सेशन जज संत प्रकाश की कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर 2 साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
पुलिस के मुताबिक पांच अक्तूबर 2013 को जींद जिले के गांव नंदगढ़ निवासी 52 वर्षीय रोहताश ने शिवाजी कालोनी थाने में शिकायत दी थी कि वह दिल्ली में व्यापार करता है। 1987 में बहन सरोज की शादी जनता कालोनी निवासी सोमदत्त के साथ हुई थी। सरोज के तीन लड़के हैं, कमल, पंकज व राहुल। कमल व राहुल जहां दिल्ली में पढ़ते हैं, जबकि पंकज अपने माता-पिता के साथ रहता है। सोमदत्त कोई काम नहीं करता था। साथ ही शराब पीकर अक्सर सरोज के साथ झगड़ा करता था। सोमदत्त मकान बेचना चाहता था, लेकिन सरोज ऐसा करने से मना करती थी। वारदात की रात उसका भानजा चंडीगढ़ गया हुआ था। 5 अक्तूबर 2013 की सुबह सूचना मिली कि सोमदत्त ने अपनी पत्नी सरोज का कत्ल कर दिया और मौके से फरार है। वह रोहतक परिवार के साथ पहुंचा। सरोज का शव फर्श पर लहूलुहान हालत में पड़ा था। शरीर पर जगह-जगह चोटों के निशान थे। उसे पूरी तरह से पता किया। उसकी बहन का कत्ल उसके पति सोमदत्त ने मकान न बेचने देने की वजह से किया है। पुलिस ने सोमदत्त के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर डेढ़ माह बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।
हालात बने खुद सबूत
सरकारी वकील गजेंद्र फौगाट ने बताया कि सरोज के बेटे पंकज ने पहले पुलिस को बयान दिए थे कि वारदात की रात वह चंडीगढ़ था। सुबह उसके दोस्त का फोन आया कि उसकी मां का कत्ल हो गया है। जब उसे अदालत में गवाही के लिए कहा तो बातचीत में लगा कि वह सही गवाही नहीं देगा। इस कारण पीड़ित पक्ष की तरफ से उसकी गवाही न कराने का निर्णय लिया गया। इसके बाद सोमदत्त का बेटा आरोपी पक्ष की तरफ से अदालत में पेश हुआ। गवाही दी कि वारदात की रात उसका पिता चंडीगढ़ में उसके साथ था। किसी अनजान शख्स ने उसकी मां का कत्ल किया है। अदालत ने बेटे की गवाही नहीं मानी। साथ ही सुबह पत्नी के शव के पास पति के न मिलने, दाह संस्कार शामिल न होने और डेढ़ माह बाद पुलिस की गिरफ्त में आने जैसी परिस्थितियों को अहम माना। साथ ही सोमदत्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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- परिस्थितियां बनी गवाह, बेटे द्वारा पिता को बचाने के लिए दी गई गवाही भी कोर्ट ने नहीं मानी
- 2013 में घर पर फर्श के ऊपर लहूलुहान हालत में मिला था महिला सरोज का शव
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पांच साल पहले जनता कॉलोनी में मकान बेचने को लेकर हुए झगड़े में पत्नी सरोज की हत्या के आरोपी पति सोमदत्त को अदालत ने दोषी माना है। शुक्रवार को सेशन जज संत प्रकाश की कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर 2 साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
पुलिस के मुताबिक पांच अक्तूबर 2013 को जींद जिले के गांव नंदगढ़ निवासी 52 वर्षीय रोहताश ने शिवाजी कालोनी थाने में शिकायत दी थी कि वह दिल्ली में व्यापार करता है। 1987 में बहन सरोज की शादी जनता कालोनी निवासी सोमदत्त के साथ हुई थी। सरोज के तीन लड़के हैं, कमल, पंकज व राहुल। कमल व राहुल जहां दिल्ली में पढ़ते हैं, जबकि पंकज अपने माता-पिता के साथ रहता है। सोमदत्त कोई काम नहीं करता था। साथ ही शराब पीकर अक्सर सरोज के साथ झगड़ा करता था। सोमदत्त मकान बेचना चाहता था, लेकिन सरोज ऐसा करने से मना करती थी। वारदात की रात उसका भानजा चंडीगढ़ गया हुआ था। 5 अक्तूबर 2013 की सुबह सूचना मिली कि सोमदत्त ने अपनी पत्नी सरोज का कत्ल कर दिया और मौके से फरार है। वह रोहतक परिवार के साथ पहुंचा। सरोज का शव फर्श पर लहूलुहान हालत में पड़ा था। शरीर पर जगह-जगह चोटों के निशान थे। उसे पूरी तरह से पता किया। उसकी बहन का कत्ल उसके पति सोमदत्त ने मकान न बेचने देने की वजह से किया है। पुलिस ने सोमदत्त के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर डेढ़ माह बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।
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हालात बने खुद सबूत
सरकारी वकील गजेंद्र फौगाट ने बताया कि सरोज के बेटे पंकज ने पहले पुलिस को बयान दिए थे कि वारदात की रात वह चंडीगढ़ था। सुबह उसके दोस्त का फोन आया कि उसकी मां का कत्ल हो गया है। जब उसे अदालत में गवाही के लिए कहा तो बातचीत में लगा कि वह सही गवाही नहीं देगा। इस कारण पीड़ित पक्ष की तरफ से उसकी गवाही न कराने का निर्णय लिया गया। इसके बाद सोमदत्त का बेटा आरोपी पक्ष की तरफ से अदालत में पेश हुआ। गवाही दी कि वारदात की रात उसका पिता चंडीगढ़ में उसके साथ था। किसी अनजान शख्स ने उसकी मां का कत्ल किया है। अदालत ने बेटे की गवाही नहीं मानी। साथ ही सुबह पत्नी के शव के पास पति के न मिलने, दाह संस्कार शामिल न होने और डेढ़ माह बाद पुलिस की गिरफ्त में आने जैसी परिस्थितियों को अहम माना। साथ ही सोमदत्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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