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ghgh
Updated Wed, 04 Apr 2018 03:12 AM IST
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एनआईआरएफ 2018 की रैंकिंग
देश में 38वें और प्रदेश में अव्वल नंबर पर पीजीआईएमएस का फार्मेसी कॉलेज
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। भारत सरकार की मिनिस्ट्री आफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलेपमेंट के नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेम वर्क 2018 के अनुसार पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का फार्मेसी कॉलेज देश में 38वें और प्रदेश में अव्वल नंबर मिला है। वहीं हिसार की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेकभनोलॉजी को देश में 47वां स्थान मिला है।
हेल्थ विवि रोहतक के फार्मेसी कॉलेज में स्नातक की 60 व मास्टर डिग्री में पांच-पांच सीट हैं। यहां फार्मास्यूटिकल व फार्मास्यूटिकल बायो टेकभनोलॉजी में मास्टर डिग्री कराई जा रही है। यहां के विद्यार्थी अपने दम पर गेट व जीपैट की परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे हैं। हालांकि कॉलेज का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। यहां 2008 में विवि बनने से पहले यहां डिप्लोमा कोर्स ही होता था। कम समय में फार्मेसी कॉलेज को यह उपलब्धि मिलने का श्रेय यहां के स्टाफ और प्राचार्य डॉ. गजेंद्र सिंह को जाता है। सूत्रों की मानें तो यहां 2006 में फैकेल्टी आई थी। संस्थान के पहले कुलपति डॉ. एसएस सांगवान ने डिप्लोमा कोर्स को अपग्रेड करते हुए इसे डिग्री के लिए तैयार किया। इस समय तक इस कॉलेज के लिए जगह तक भी पर्याप्त नहीं थी। बाद में इसे इंदिरा गांधी विद्या भवन में शिफ्ट किया गया। यहां अब तक चार विद्यार्थी पीएचडी करके जा चुके हैं। वहीं फार्मेसी कॉलेज से जुडे़ एक्सपर्ट की मानें तो देश में कई फार्मेसी कॉलेज हैं, जोकि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर वाले हैं। सर्वे में इंफ्रास्ट्रक्चर और कोर्स की संख्या व सुविधाओं के साथ फैकेल्टी को देखा जाता है। रिपोट ओपन होने के बाद संस्थान में खुशी की लहर है।
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देश में 38वें और प्रदेश में अव्वल नंबर पर पीजीआईएमएस का फार्मेसी कॉलेज
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। भारत सरकार की मिनिस्ट्री आफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलेपमेंट के नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेम वर्क 2018 के अनुसार पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का फार्मेसी कॉलेज देश में 38वें और प्रदेश में अव्वल नंबर मिला है। वहीं हिसार की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेकभनोलॉजी को देश में 47वां स्थान मिला है।
हेल्थ विवि रोहतक के फार्मेसी कॉलेज में स्नातक की 60 व मास्टर डिग्री में पांच-पांच सीट हैं। यहां फार्मास्यूटिकल व फार्मास्यूटिकल बायो टेकभनोलॉजी में मास्टर डिग्री कराई जा रही है। यहां के विद्यार्थी अपने दम पर गेट व जीपैट की परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे हैं। हालांकि कॉलेज का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। यहां 2008 में विवि बनने से पहले यहां डिप्लोमा कोर्स ही होता था। कम समय में फार्मेसी कॉलेज को यह उपलब्धि मिलने का श्रेय यहां के स्टाफ और प्राचार्य डॉ. गजेंद्र सिंह को जाता है। सूत्रों की मानें तो यहां 2006 में फैकेल्टी आई थी। संस्थान के पहले कुलपति डॉ. एसएस सांगवान ने डिप्लोमा कोर्स को अपग्रेड करते हुए इसे डिग्री के लिए तैयार किया। इस समय तक इस कॉलेज के लिए जगह तक भी पर्याप्त नहीं थी। बाद में इसे इंदिरा गांधी विद्या भवन में शिफ्ट किया गया। यहां अब तक चार विद्यार्थी पीएचडी करके जा चुके हैं। वहीं फार्मेसी कॉलेज से जुडे़ एक्सपर्ट की मानें तो देश में कई फार्मेसी कॉलेज हैं, जोकि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर वाले हैं। सर्वे में इंफ्रास्ट्रक्चर और कोर्स की संख्या व सुविधाओं के साथ फैकेल्टी को देखा जाता है। रिपोट ओपन होने के बाद संस्थान में खुशी की लहर है।
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