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चार अस्पतालों में तालाबंदी जैसा माहौल, नहीं है एक भी चिकित्सक
Updated Fri, 30 Jun 2017 12:11 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिवानी मंडी।
सड़क हादसों के मामले में अतिसंवेदनशील क्षेत्र सिवानी मंडल में तैनात 6 चिकित्सकों के तबादले के बाद यह क्षेत्र स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शुमार हो गया है। चिकित्सकों के तबादलों के बाद एनएच पर स्थित चार राजकीय अस्पताल और एक सीएचसी बिना चिकित्सकों के लावारिस पड़ गए है। हालात यह है कि सिवानी मंडल में निर्धारित पदों के अनुसार 24 चिकित्सकों की जरूरत है लेकिन वर्तमान में दो दंत चिकित्सकों सहित चार ही चिकित्सकों के सहारे केवल दो ही अस्पताल चल रहे है। सिवानी सहित लीलस, गुरेरा और मिरान में तो चिकित्सक है ही नहीं। अस्पतालों में चिकित्सक नहीं होने से लोगों को सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। हैरानी की बात है कि इस मामले में न तो सत्ता पक्ष और ना ही विपक्ष कोई रुचि ले रहा है जिससे लोगों में रोष का माहौल बना हुआ है।
गौरतलब है कि लंबे समय से चिकित्सकों के अभाव में सिवानी क्षेत्र के कई अस्पतालों में तालाबंदी जैसा माहौल बना हुआ है। रही सही कसर सरकार ने यहां के अस्पतालों में तैनात 2 और चिकित्सकों का तबादला कर निकाल दी। इससे पहले 3 चिकित्सकों के तबादले किए गए थे। इन दो चिकित्सकों के तबादले के बाद गुरेरा पीएचसी और मिरान स्थित सीएचसी में कोई भी चिकित्सक नहीं रह गया है। इससे पहले लीलस और सिवानी बिना चिकित्सक के चल रहा था। सड़क दुर्घटनाओं के मामले मेें अति संवेदनशील क्षेत्र सिवानी में स्वास्थ्य सरकार की बेकद्री लोगों के लिए मुसीबत बन चुकी है। सबसे बड़ी विडंबना तो ये है कि महकमे के पास एनएच पर शानदार भवन तो है लेकिन चिकित्सक और जरूरी उपकरण नहीं होने। अस्पताल पर हो रही राजनीति से इस अस्पताल को शुरू करवाने में कई रोड़े आड़े आ रहे है। यहां उपकरणों और आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलने का खामियाजा शहर के जरूरतमंद लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा भी नहीं है कि यह मामला सरकार के संज्ञान में नहीं है। करीब 6 माह पूर्व इस अस्पताल का सीएम मनोहर लाल खट्टर के हाथों उद्घाटन होना था लेेकिन अपनी ही सरकार के एक मंत्री की नाराजगी की वजह से इसका उद्घाटन टालना पड़ा। यह बात अलग है कि पुराने अस्पताल की छतें टपकने की वजह से बिना उद्घाटन के ही अस्पताल नए भवन में शिफ्ट तो हो गया लेकिन उसमें सुविधाएं शून्य होने की वजह से वह लोगों के लिए सफेद हाथी ही साबित हो रहा है।
जरूरत 24 की उपलब्ध मात्र चार
सिवानी मंडल के तहत अस्पतालों में 24 चिकित्सकों की जरूरत है लेकिन दंत चिकित्सकों समेत केवल चार ही चिकित्सक अस्पतालों में तैनात है। इसमें एक चिकित्सक बड़वा तो एक चिकित्सक झुंपा में तैनात है। इसके अलावा 1 दंत चिकित्सक सिवानी तो एक बड़वा में तैनात है। सामान्य रोगियों के लिए तो सिवानी, गुरेरा, लीलस और मिरान में तालाबंदी जैसी स्थिति बनी हुई है। आपातकालीन समय में अगर चिकित्सकों की जरूरत पड़ जाए तो स्वास्थ्य विभाग के भरोसे रहकर जान हथेली पर रखने के बराबर होगा। खास बात ये है कि ये हालात उस समय है जब हरियाणा के मुख्यमंत्री खुद 9 जुलाई को सिवानी के दौरे पर आ रहे है।
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स्वास्थ्य मंत्री अंबाला तक सीमित : बड़वा
इस बारे में हलका से विधायक ओमप्रकाश बड़वा ने कहा कि सूबे के स्वास्थ्य मंत्री खुद को केवल अंबाला की ही स्वास्थ्य मंत्री समझते है। अति संवेदनशील क्षेत्र में चिकित्सकों के अभाव में अस्पतालों में चिकित्सकों की नियुक्ति करने की बजाय तैनात चिकित्सकों का तबादला करना सरकार की नीयत को दर्शाने के लिए काफी है। विधायक बड़वा ने कहा कि वे इस मामले को पहले भी कई बार सरकार के सामने उठा चुके है और भविष्य में भी इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे।
जल्द मिलेंगे चिकित्सक : एसएसओ
इस बारे में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी हरेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में कई अस्पतालों में चिकित्सक नहीं है। रिक्त पड़े पदों को भरवाने के लिए चिकित्सकों की लिस्ट आला अधिकारियों के पास भेज दी गई है। जल्द ही अस्पतालों को चिकित्सक मिलने की उम्मीद है।
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सिवानी मंडी।
सड़क हादसों के मामले में अतिसंवेदनशील क्षेत्र सिवानी मंडल में तैनात 6 चिकित्सकों के तबादले के बाद यह क्षेत्र स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शुमार हो गया है। चिकित्सकों के तबादलों के बाद एनएच पर स्थित चार राजकीय अस्पताल और एक सीएचसी बिना चिकित्सकों के लावारिस पड़ गए है। हालात यह है कि सिवानी मंडल में निर्धारित पदों के अनुसार 24 चिकित्सकों की जरूरत है लेकिन वर्तमान में दो दंत चिकित्सकों सहित चार ही चिकित्सकों के सहारे केवल दो ही अस्पताल चल रहे है। सिवानी सहित लीलस, गुरेरा और मिरान में तो चिकित्सक है ही नहीं। अस्पतालों में चिकित्सक नहीं होने से लोगों को सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। हैरानी की बात है कि इस मामले में न तो सत्ता पक्ष और ना ही विपक्ष कोई रुचि ले रहा है जिससे लोगों में रोष का माहौल बना हुआ है।
गौरतलब है कि लंबे समय से चिकित्सकों के अभाव में सिवानी क्षेत्र के कई अस्पतालों में तालाबंदी जैसा माहौल बना हुआ है। रही सही कसर सरकार ने यहां के अस्पतालों में तैनात 2 और चिकित्सकों का तबादला कर निकाल दी। इससे पहले 3 चिकित्सकों के तबादले किए गए थे। इन दो चिकित्सकों के तबादले के बाद गुरेरा पीएचसी और मिरान स्थित सीएचसी में कोई भी चिकित्सक नहीं रह गया है। इससे पहले लीलस और सिवानी बिना चिकित्सक के चल रहा था। सड़क दुर्घटनाओं के मामले मेें अति संवेदनशील क्षेत्र सिवानी में स्वास्थ्य सरकार की बेकद्री लोगों के लिए मुसीबत बन चुकी है। सबसे बड़ी विडंबना तो ये है कि महकमे के पास एनएच पर शानदार भवन तो है लेकिन चिकित्सक और जरूरी उपकरण नहीं होने। अस्पताल पर हो रही राजनीति से इस अस्पताल को शुरू करवाने में कई रोड़े आड़े आ रहे है। यहां उपकरणों और आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलने का खामियाजा शहर के जरूरतमंद लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसा भी नहीं है कि यह मामला सरकार के संज्ञान में नहीं है। करीब 6 माह पूर्व इस अस्पताल का सीएम मनोहर लाल खट्टर के हाथों उद्घाटन होना था लेेकिन अपनी ही सरकार के एक मंत्री की नाराजगी की वजह से इसका उद्घाटन टालना पड़ा। यह बात अलग है कि पुराने अस्पताल की छतें टपकने की वजह से बिना उद्घाटन के ही अस्पताल नए भवन में शिफ्ट तो हो गया लेकिन उसमें सुविधाएं शून्य होने की वजह से वह लोगों के लिए सफेद हाथी ही साबित हो रहा है।
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जरूरत 24 की उपलब्ध मात्र चार
सिवानी मंडल के तहत अस्पतालों में 24 चिकित्सकों की जरूरत है लेकिन दंत चिकित्सकों समेत केवल चार ही चिकित्सक अस्पतालों में तैनात है। इसमें एक चिकित्सक बड़वा तो एक चिकित्सक झुंपा में तैनात है। इसके अलावा 1 दंत चिकित्सक सिवानी तो एक बड़वा में तैनात है। सामान्य रोगियों के लिए तो सिवानी, गुरेरा, लीलस और मिरान में तालाबंदी जैसी स्थिति बनी हुई है। आपातकालीन समय में अगर चिकित्सकों की जरूरत पड़ जाए तो स्वास्थ्य विभाग के भरोसे रहकर जान हथेली पर रखने के बराबर होगा। खास बात ये है कि ये हालात उस समय है जब हरियाणा के मुख्यमंत्री खुद 9 जुलाई को सिवानी के दौरे पर आ रहे है।
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स्वास्थ्य मंत्री अंबाला तक सीमित : बड़वा
इस बारे में हलका से विधायक ओमप्रकाश बड़वा ने कहा कि सूबे के स्वास्थ्य मंत्री खुद को केवल अंबाला की ही स्वास्थ्य मंत्री समझते है। अति संवेदनशील क्षेत्र में चिकित्सकों के अभाव में अस्पतालों में चिकित्सकों की नियुक्ति करने की बजाय तैनात चिकित्सकों का तबादला करना सरकार की नीयत को दर्शाने के लिए काफी है। विधायक बड़वा ने कहा कि वे इस मामले को पहले भी कई बार सरकार के सामने उठा चुके है और भविष्य में भी इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे।
जल्द मिलेंगे चिकित्सक : एसएसओ
इस बारे में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी हरेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में कई अस्पतालों में चिकित्सक नहीं है। रिक्त पड़े पदों को भरवाने के लिए चिकित्सकों की लिस्ट आला अधिकारियों के पास भेज दी गई है। जल्द ही अस्पतालों को चिकित्सक मिलने की उम्मीद है।