{"_id":"5a95bc1e4f1c1b0a7b8b99b7","slug":"81519762462-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार ने निगम से मांगी डिफाल्टर विभागों की जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार ने निगम से मांगी डिफाल्टर विभागों की जानकारी
Updated Wed, 28 Feb 2018 01:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकार ने निगम से मांगी डिफाल्टर विभागों की जानकारी
चरखी दादरी।
सरकार ने बिजली निगम से डिफाल्टर विभागों की जानकारी मांगी है। निगम अधिकारियों ने भी अब इन डिफॉल्टर विभागों की सूची तैयार कर सरकार को भेज दी है। बिल की बकाया राशि की रिपोर्ट पर विभागीय अधिकारियों के हस्ताक्षर भी कराए गए हैं। निगम के मुताबिक जिले के सरकारी विभागों ने बिजली निगम की करीब 24 करोड़ रुपये की बिजली फूंक दी और बिल अब तक नहीं चुकाया है। निगम अधिकारी बिल के भुगतान के संबंध में विभागों को कई दफा पत्र भी लिख चुके हैं लेकिन कोई गौर नहीं किया गया।
निगम अधिकारियों ने आम उपभोक्ता के साथ डिफॉल्टर सरकारी विभागों की बकाया बिल राशि की सूची तैयार की है। इसके मुताबिक नगर परिषद, जन स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग, एसडीएम कार्यालय, पुलिस थाने व सिंचाई विभाग की तरफ करोड़ों की राशि फंसी पड़ी है। निगम अधिकारियों के मुताबिक नगर परिषद के अधिकारियों ने तो अब तक स्ट्रीट लाइटों के बिल की अदायगी तक नहीं की है। नगर परिषद पर करीब पौने चार करोड़ रुपये का बिल बकाया है। इसके बाद आंकड़ों के मुताबिक सिंचाई विभाग पर 9.47 करोड़ की राशि बकाया पड़ी है। इसमें से 8.51 करोड़ सरचार्ज है। वहीं जन स्वास्थ्य विभाग की तरफ करीब 6.57 करोड़ रुपये की राशि बकाया पड़ी है। यह राशि शहरी है जबकि कुछ गांवों के भी 1.63 करोड़ रुपये बकाया है। ये जानकारी एसडीओ विक्रम परमार ने दी। उपमंडल नागरिक अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय की तरफ 26.66 लाख की राशि बकाया है। सिटी पुलिस थाने की तरफ 91200 रुपये, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस की बकाया बिजली राशि 70718 रुपये है। बकाया राशि की यह सूची गत दिनों ही बिजली निगम अधिकारियों ने आगामी कार्रवाई के लिए सरकार को भेज दी है। इस सूची पर विभागाध्यक्ष के हस्ताक्षर कराए गए हैं और इसकी एक कॉपी निगम अधिकारियों ने अपने रिकॉर्ड में भी रख ली है। निगम अधिकारियों ने बताया कि सरकार की तरफ से ही इस संदर्भ में निर्देश दिए गए थे और इनकी पालना करते हुए ही सरकार को जिले का डाटा भेजा गया है।
नगर परिषद ने आज तक नहीं भरा स्ट्रीट लाइटों का बिल
कनेक्शन के बाद से ही अगर कोई आम उपभोक्ता बिल नहीं भरता है तो कुछ माह में ही निगम टीम उस पर कार्रवाई करते हुए सीधा कनेक्शन काट आती है। वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों पर नरमी बरती जाती है। बिजली निगम के एसडीओ विक्रम परमार ने बताया कि स्ट्रीट लाइटों के बिजली बिल की अदायगी नगर परिषद ने अब तक नहीं की। वहीं, नगर परिषद सचिव संजय यादव का कहना है कि निगम की तरफ उनकी करोड़ों का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया पड़ा है और इसकी जानकारी गत दिनों भी उन्होंने निगम अधिकारियों को दी थी।
विज्ञापन
तीन विभागों व नगर परिषद का बकाया बिल भर सकती है सरकार
निगम सूत्रों के मुताबिक सरकार ने पत्र भेजकर सरकारी विभागों के बकाया बिल राशि की जानकारी मांगी है। सूत्रों का कहना है कि जन स्वास्थ्य विभाग, पंचायत विभाग, सिंचाई विभाग व नगर परिषद का बकाया पड़े बिल का भुगतान सरकार अपने स्तर पर ही कर सकती है। सरकार प्रदेश के हर जिले में इस तरह की स्थिति को अपने स्तर पर ही सुलझाने का प्रयास कर रही है।
वर्जन::
सरकार की तरफ से जारी किया गया पत्र हमें मिला है। इस पर कार्रवाई करते हुए सभी सरकारी विभागों की बकाया राशि की सूची तैयार की गई और इस पर विभाग के संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर भी कराए गए। ये सूची हमने सरकार को भेज दी है। पहले भी हम नोटिस जारी कर चुके हैं और होली के बाद दोबारा से इन्हें नोटिस दिए जाएंगे।
विक्रम परमार, शहरी एसडीओ, बिजली निगम
विज्ञापन
चरखी दादरी।
सरकार ने बिजली निगम से डिफाल्टर विभागों की जानकारी मांगी है। निगम अधिकारियों ने भी अब इन डिफॉल्टर विभागों की सूची तैयार कर सरकार को भेज दी है। बिल की बकाया राशि की रिपोर्ट पर विभागीय अधिकारियों के हस्ताक्षर भी कराए गए हैं। निगम के मुताबिक जिले के सरकारी विभागों ने बिजली निगम की करीब 24 करोड़ रुपये की बिजली फूंक दी और बिल अब तक नहीं चुकाया है। निगम अधिकारी बिल के भुगतान के संबंध में विभागों को कई दफा पत्र भी लिख चुके हैं लेकिन कोई गौर नहीं किया गया।
निगम अधिकारियों ने आम उपभोक्ता के साथ डिफॉल्टर सरकारी विभागों की बकाया बिल राशि की सूची तैयार की है। इसके मुताबिक नगर परिषद, जन स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग, एसडीएम कार्यालय, पुलिस थाने व सिंचाई विभाग की तरफ करोड़ों की राशि फंसी पड़ी है। निगम अधिकारियों के मुताबिक नगर परिषद के अधिकारियों ने तो अब तक स्ट्रीट लाइटों के बिल की अदायगी तक नहीं की है। नगर परिषद पर करीब पौने चार करोड़ रुपये का बिल बकाया है। इसके बाद आंकड़ों के मुताबिक सिंचाई विभाग पर 9.47 करोड़ की राशि बकाया पड़ी है। इसमें से 8.51 करोड़ सरचार्ज है। वहीं जन स्वास्थ्य विभाग की तरफ करीब 6.57 करोड़ रुपये की राशि बकाया पड़ी है। यह राशि शहरी है जबकि कुछ गांवों के भी 1.63 करोड़ रुपये बकाया है। ये जानकारी एसडीओ विक्रम परमार ने दी। उपमंडल नागरिक अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय की तरफ 26.66 लाख की राशि बकाया है। सिटी पुलिस थाने की तरफ 91200 रुपये, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस की बकाया बिजली राशि 70718 रुपये है। बकाया राशि की यह सूची गत दिनों ही बिजली निगम अधिकारियों ने आगामी कार्रवाई के लिए सरकार को भेज दी है। इस सूची पर विभागाध्यक्ष के हस्ताक्षर कराए गए हैं और इसकी एक कॉपी निगम अधिकारियों ने अपने रिकॉर्ड में भी रख ली है। निगम अधिकारियों ने बताया कि सरकार की तरफ से ही इस संदर्भ में निर्देश दिए गए थे और इनकी पालना करते हुए ही सरकार को जिले का डाटा भेजा गया है।
विज्ञापन
नगर परिषद ने आज तक नहीं भरा स्ट्रीट लाइटों का बिल
कनेक्शन के बाद से ही अगर कोई आम उपभोक्ता बिल नहीं भरता है तो कुछ माह में ही निगम टीम उस पर कार्रवाई करते हुए सीधा कनेक्शन काट आती है। वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों पर नरमी बरती जाती है। बिजली निगम के एसडीओ विक्रम परमार ने बताया कि स्ट्रीट लाइटों के बिजली बिल की अदायगी नगर परिषद ने अब तक नहीं की। वहीं, नगर परिषद सचिव संजय यादव का कहना है कि निगम की तरफ उनकी करोड़ों का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया पड़ा है और इसकी जानकारी गत दिनों भी उन्होंने निगम अधिकारियों को दी थी।
विज्ञापन
तीन विभागों व नगर परिषद का बकाया बिल भर सकती है सरकार
निगम सूत्रों के मुताबिक सरकार ने पत्र भेजकर सरकारी विभागों के बकाया बिल राशि की जानकारी मांगी है। सूत्रों का कहना है कि जन स्वास्थ्य विभाग, पंचायत विभाग, सिंचाई विभाग व नगर परिषद का बकाया पड़े बिल का भुगतान सरकार अपने स्तर पर ही कर सकती है। सरकार प्रदेश के हर जिले में इस तरह की स्थिति को अपने स्तर पर ही सुलझाने का प्रयास कर रही है।
वर्जन::
सरकार की तरफ से जारी किया गया पत्र हमें मिला है। इस पर कार्रवाई करते हुए सभी सरकारी विभागों की बकाया राशि की सूची तैयार की गई और इस पर विभाग के संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर भी कराए गए। ये सूची हमने सरकार को भेज दी है। पहले भी हम नोटिस जारी कर चुके हैं और होली के बाद दोबारा से इन्हें नोटिस दिए जाएंगे।
विक्रम परमार, शहरी एसडीओ, बिजली निगम