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झज्जर में 569 मासूमों ने महामारी को हराया
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झज्जर। कोरोना संक्रमण की पहली लहर हो या दूसरी लेकिन मासूमों में रोगरोधक क्षमता इतनी है कि सभी मासूम पूरी तरह से ठीक हैं। जिले में अब तक 569 बच्चे कोरोना संक्रमित हुए थे। ये सभी कोरोना की जंग जीत चुके हैं। हालांकि आने वाले समय में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। जो बच्चों पर सबसे अधिक प्रभाव डालने वालेेे बताई जा रही है। फिलहाल कोरोना दूसरी लहर युवाओं को अधिक प्रभावित कर रही है।
जिले में एक माह से 12 साल तक के सभी बच्चे कोरोना को मात दे चुके हैं। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों में रोगरोधक क्षमता अधिक होती है। इस वजह से वे जल्द ठीक हो जाते हैं। अन्य कोई बड़ी बीमारी हो तो अलग बात है, लेकिन सामान्य बीमारी होने पर छोटे बच्चे जल्द ठीक हो जाते हैं। लेकिन कोरोना को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। अभिभावकों को इस समय सबसे अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। क्योंकि कोरोना से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। अभिभावकों को इस समय अपने साथ-साथ बच्चों के प्रति अधिक सावधान रहें। बच्चों को इतनी समझ नहीं होती की वे किस चीज को छुएं और किसे नहीं।
छोटे बच्चों का ध्यान रखना जरूरी
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मुरारी लाल का कहना है कि कोरोना काल में छोटे बच्चों का ध्यान रखना अत्याधिक जरूरी है। क्योंकि बच्चे शरारती व जिद्दी होते हैं, वे किसी भी चीज को छू सकते हैं। जबकि बड़े बच्चे कहने से बात मान जाते हैं। कोरोना की तीसरी लहर खतरनाक हो सकती है। इसलिए अभिभावकों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। झज्जर के सामान्य अस्पताल में बच्चों के इलाज के इलाज के लिए सुविधाएं ठीक हैं।
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जिले 569 बच्चे कोरोना संक्रमित अवश्य हुए हैं। किसी भी बच्चे के अब तक कोरोना संक्रमण के कारण मौत नहीं हुई है। सभी बच्चे कोरोना की जंग जीत चुके हैं।
- डॉ. संजय दहिया, सीएमओ, झज्जर
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जिले में एक माह से 12 साल तक के सभी बच्चे कोरोना को मात दे चुके हैं। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों में रोगरोधक क्षमता अधिक होती है। इस वजह से वे जल्द ठीक हो जाते हैं। अन्य कोई बड़ी बीमारी हो तो अलग बात है, लेकिन सामान्य बीमारी होने पर छोटे बच्चे जल्द ठीक हो जाते हैं। लेकिन कोरोना को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। अभिभावकों को इस समय सबसे अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। क्योंकि कोरोना से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। अभिभावकों को इस समय अपने साथ-साथ बच्चों के प्रति अधिक सावधान रहें। बच्चों को इतनी समझ नहीं होती की वे किस चीज को छुएं और किसे नहीं।
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छोटे बच्चों का ध्यान रखना जरूरी
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मुरारी लाल का कहना है कि कोरोना काल में छोटे बच्चों का ध्यान रखना अत्याधिक जरूरी है। क्योंकि बच्चे शरारती व जिद्दी होते हैं, वे किसी भी चीज को छू सकते हैं। जबकि बड़े बच्चे कहने से बात मान जाते हैं। कोरोना की तीसरी लहर खतरनाक हो सकती है। इसलिए अभिभावकों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। झज्जर के सामान्य अस्पताल में बच्चों के इलाज के इलाज के लिए सुविधाएं ठीक हैं।
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जिले 569 बच्चे कोरोना संक्रमित अवश्य हुए हैं। किसी भी बच्चे के अब तक कोरोना संक्रमण के कारण मौत नहीं हुई है। सभी बच्चे कोरोना की जंग जीत चुके हैं।
- डॉ. संजय दहिया, सीएमओ, झज्जर