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कैटल फ्री सिटी का सच : प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक लोगों को नहीं दिला पा रहे समस्या से निजात

Tue, 30 Apr 2019 02:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 30 Apr 2019 02:30 AM IST
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कैटल फ्री सिटी का सच : प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक लोगों को नहीं दिला पा रहे समस्या से निजात
रोहतक। लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने चुनाव को अपने पक्ष में करने के लिए जनसंपर्क तेज कर दिया है। यहीं नहीं हर तरह से वोटरों को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं लोगों का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवार लुभावने सपने तो दिखा रहे हैं लेकिन लोगों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। प्रशासन की ओर से शहर को कैटल फ्री सिटी घोषित किया हुआ है लेकिन सच यह है कि आज भी सड़कों पर कब्जा किए हैं। इससे आए दिन हादसे हो रहे हैं। लोगों ने कहा कि जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशासन तक उन्हें इस समस्या से निजात नहीं दिला पा रहे हैं। वहीं चुनाव के समय भी कोई भी प्रत्याशी इस मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया है। आवारा पशुओं से लोगों को हो रही परेशानी पर संवाददाता महबूब अली की रिपोर्ट
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सच्चाई : दस से अधिक बार डीसी से निजात दिलाने की मांग की
लोगों का आरोप है कि दस से अधिक बार आवारा पशुओं को पकड़वाने या फिर किसी गोशाला या फिर अन्य स्थानों पर भिजवाने की मांग कर चुके हैं मगर इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। इसके कारण जहां विभिन्न स्थानों पर सड़क हादसे हो रहे हैं। वहीं गंदगी का भी अंबार लगा रहता है।
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दावा : पहरावर की गोशाला भेजे जाते हैं पकड़े गए पशु, समिति वहन कर रही खर्च
शहर के विभिन्न स्थानों पर घूमने वाले पशुओं को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम की आती है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि जिस भी स्थान पर आवारा पशुओं के घूमने या फिर परेशान करने की सूचना मिलती है तो नगर निगम टीम को भेजकर पशुओं को पकड़वाकर पहरावर की गोशाला भेजते हैं। जहां पर सीता देवी संतोष देवी राधे-राधे सेवा समिति के पदाधिकारी पशुओं की देखरेख करते है। समिति के संचालक राजेश लूंबा टीनू का कहना है कि बीस से अधिक सदस्यों को पशुओं की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताया कि नगर निगम से 21 रुपये एक पशु की देखरेख के मिलते हैं, बाकी रुपये उन्हें खुद ही वहन करने पड़ते हैं।
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फिलहाल गोशाला में पशुओं को रखने की जगह नहीं
नगर निगम भी असमंजस में है कि आखिरकार पकड़े गए आवारा पशुओं को रखा कहा जाएं। क्योंकि गोशाला में भी पशुओं की संख्या पूरी है। जिसके कारण अन्य पशुओं को रखना यहां पर संभव नहीं है। हालांकि गोमाता को लोग पता चलने पर खुद ही पालने को तैयार हो जाते हैं।

फैक्ट फाइल
पहरावर गोशाला पशुओं की संख्या - 3200
नगर निगम एक पशु का खर्च देता है - 21 रुपये
कुल गोशाला : 12
प्रत्येक गोशाला में पशुओं की संख्या : 1000-1200

लोगों की विपदा
बीस से अधिक बार आवारा घूमने वाले पशुओं की निजात दिलाने की मांग नगर निगम के अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से की जा चुकी हैं, मगर समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।
- उमेद सिंह खत्री, रिटायर्ड निरीक्षक

चुनाव के समय तो प्रत्याशी आवार पशुओं से निजात दिलाने का दावा करते हैं मगर चुनाव जीतने के बाद वादे को पूरी तरह से भुला दिया जाता है। जिसके कारण परेशानी आड़े आती है। - रमेश कुमार


लोगों को ऐसे प्रत्याशी को वोट देनी चाहिए, जो वायदों पर भी पूरी तरह से खरा उतरे। सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशु कई बार लोगों को भी टक्कर मारकर घायल कर देते हैं। -नीरज कुमार

जब तक लोग एकजुट नहीं होंगे, आवारा पशुओं की समस्या से निजात मिलने वाली नहीं है, इसके लिए हर किसी को जागरूक होना होगा। - सुनील कुमार
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