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वन विभाग की नर्सरी देखरेख के अभाव में तोड़ रही दम
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रोहतक। प्रदेश में इस मानसून सीजन में वन विभाग 30 करोड़ पौधे लगाने जा रहा है। इसमें से 30 करोड़ पौधे विभाग का वार्षिक लक्ष्य है। यह लक्ष्य इस बार पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। इसकी वजह अब तक पौधारोपण व पौधे तैयार करने के लिए टेंडर नहीं होना है। वन विभाग ने दो साल पहले ही ये सब काम ठेके के तहत कराने का फैसला लिया है। इसके लिए ई-टेंडरिंग की जाती है। लोकसभा चुनाव के चलते लागू हुई आचार संहिता के फेर में उलझ कर अब तक यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में पौधारोपण के लिए मानसून सत्र में पौधे तैयार होने पर सवाल खड़ा हो गया है।
वन विभाग प्रदेश को हरा भरा बनाने के लिए हर वर्ष मानसून सत्र में पौधारोपण अभियान चलाता है। इस दौरान वन क्षेत्र के अलावा सड़क किनारे, नहरी क्षेत्र, खेत, खाली मैदान व अन्य जगहों पर सरकारी विभागों और विभिन्न संगठनों के सहयोग से पौधे लगाए जाते हैं। यह लक्ष्य 30 करोड़ पौधों का होता है। इसके लिए अप्रैल महीने में ही काम शुरू हो जाता है। इसके लिए मार्च में ही टैंडर छोड़ना होता है।
बीज भरने व कलम लगाने का हो चुका है काम
मानसून सीजन में पौधारोपण अभियान चलाने व उसकी सफलता के लिए वन विभाग की नर्सरियां अप्रैल में शुरू हो जाती हैं। इस बार भी यहां पौधे तैयार करने के लिए बीज भरने व कलम लगाने की प्रक्रिया हो चुकी है। हालांकि टैंडर पूरा होने के बाद भी बगैर वेतन काम करने वाले श्रमिकों ने यह काम किया। ये श्रमिक न तो विभाग के तहत आते हैं और न ही ठेकेदार के। नया टैंडर होने पर ठेकेदार की दया पर इनका पारिश्रमिक निर्भर है।
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ठेका समाप्त होते ही लेबर हुई बेरोजगार, काम रुका
वन विभाग ने पिछले वर्ष जून में टैंडर छोड़ा था। यह टैंडर मार्च में पूरा हो चुका है। इससे आगे काम के लिए नया टैंडर अप्रैल महीना बीतने के बाद भी नहीं हुआ है। ऐसे में वन विभाग में ठेके पर काम करने वाले श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। यही नहीं विभाग काम भी रुक गया है। नर्सरियों में तैयार होने वाले पौधों को न तो समय पर पानी मिल पा रहा है न ही इनमें उगी घास निकाली जा रही है। ऐसे में इन पौधों के पनपने से पहले ही दम तोड़ने की संभावना बनी हुई है।
बगैर टैंडर काम कर रहे श्रमिक को कौन देगा वेतन
मानसून सत्र में शुरू होने वाला विभाग का पौधारोपण अभियान इस बार सिरे चढ़ता नजर नहीं आ रहा है। मई शुरू हो गया है। अब तक नए वित्त वर्ष के लिए टैंडर प्रक्रिया ही शुरू नहीं हुई है। पुराने ठेकेदार ने ठेका पूरा होने पर काम बंद कर दिया है। इस कारण ज्यादातर श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। कुछ कर्मचारी अब भी बगैर वेतन काम कर रहे हैं। पौधे तैयार करने के लिए बीज व कमल लगाने वाले इन कर्मचारियों को वेतन कौन देगा, यह कोई नहीं बता रहा। नया टैंडर नहीं होने से पौधे पनपने से पहले ही मुर्झाने व झुलसने लगे हैं। अधिकारियों व सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। इस ओर लापरवाही प्रदेश की हरियाली बर्बाद हो जाएगी।
जोगेंद्र करौथा, राज्य प्रधान, वन कर्मचारी संघ हरियाणा।
वन विभाग पौधोरोपण को लेकर तैयार है। आचार संहिता के चलते टैंडर प्रक्रिया में कुछ देरी हुई है। विभाग ने एग्जम्पशन की मांग की थी। इसकी मंजूरी मिल गई है। अब जल्दी ही टैंडर ओपन कर कंपनी को काम सौंपा दिया जाएगा। विभाग प्रदेश को हरा भरा बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
अनिल हुड्डा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक हरियाणा
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वन विभाग प्रदेश को हरा भरा बनाने के लिए हर वर्ष मानसून सत्र में पौधारोपण अभियान चलाता है। इस दौरान वन क्षेत्र के अलावा सड़क किनारे, नहरी क्षेत्र, खेत, खाली मैदान व अन्य जगहों पर सरकारी विभागों और विभिन्न संगठनों के सहयोग से पौधे लगाए जाते हैं। यह लक्ष्य 30 करोड़ पौधों का होता है। इसके लिए अप्रैल महीने में ही काम शुरू हो जाता है। इसके लिए मार्च में ही टैंडर छोड़ना होता है।
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बीज भरने व कलम लगाने का हो चुका है काम
मानसून सीजन में पौधारोपण अभियान चलाने व उसकी सफलता के लिए वन विभाग की नर्सरियां अप्रैल में शुरू हो जाती हैं। इस बार भी यहां पौधे तैयार करने के लिए बीज भरने व कलम लगाने की प्रक्रिया हो चुकी है। हालांकि टैंडर पूरा होने के बाद भी बगैर वेतन काम करने वाले श्रमिकों ने यह काम किया। ये श्रमिक न तो विभाग के तहत आते हैं और न ही ठेकेदार के। नया टैंडर होने पर ठेकेदार की दया पर इनका पारिश्रमिक निर्भर है।
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ठेका समाप्त होते ही लेबर हुई बेरोजगार, काम रुका
वन विभाग ने पिछले वर्ष जून में टैंडर छोड़ा था। यह टैंडर मार्च में पूरा हो चुका है। इससे आगे काम के लिए नया टैंडर अप्रैल महीना बीतने के बाद भी नहीं हुआ है। ऐसे में वन विभाग में ठेके पर काम करने वाले श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। यही नहीं विभाग काम भी रुक गया है। नर्सरियों में तैयार होने वाले पौधों को न तो समय पर पानी मिल पा रहा है न ही इनमें उगी घास निकाली जा रही है। ऐसे में इन पौधों के पनपने से पहले ही दम तोड़ने की संभावना बनी हुई है।
बगैर टैंडर काम कर रहे श्रमिक को कौन देगा वेतन
मानसून सत्र में शुरू होने वाला विभाग का पौधारोपण अभियान इस बार सिरे चढ़ता नजर नहीं आ रहा है। मई शुरू हो गया है। अब तक नए वित्त वर्ष के लिए टैंडर प्रक्रिया ही शुरू नहीं हुई है। पुराने ठेकेदार ने ठेका पूरा होने पर काम बंद कर दिया है। इस कारण ज्यादातर श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। कुछ कर्मचारी अब भी बगैर वेतन काम कर रहे हैं। पौधे तैयार करने के लिए बीज व कमल लगाने वाले इन कर्मचारियों को वेतन कौन देगा, यह कोई नहीं बता रहा। नया टैंडर नहीं होने से पौधे पनपने से पहले ही मुर्झाने व झुलसने लगे हैं। अधिकारियों व सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। इस ओर लापरवाही प्रदेश की हरियाली बर्बाद हो जाएगी।
जोगेंद्र करौथा, राज्य प्रधान, वन कर्मचारी संघ हरियाणा।
वन विभाग पौधोरोपण को लेकर तैयार है। आचार संहिता के चलते टैंडर प्रक्रिया में कुछ देरी हुई है। विभाग ने एग्जम्पशन की मांग की थी। इसकी मंजूरी मिल गई है। अब जल्दी ही टैंडर ओपन कर कंपनी को काम सौंपा दिया जाएगा। विभाग प्रदेश को हरा भरा बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
अनिल हुड्डा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक हरियाणा