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रूस-यूक्रेन युद्ध: कीव में फंसे भारतीयों ने किराये के लिए 1.17 लाख रुपये जुटाए, 26 विद्यार्थी बस से हंगरी रवाना
Wed, 02 Mar 2022 01:34 AM IST
भूपेंद्र सिंह
विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
विकास सैनी, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Wed, 02 Mar 2022 01:34 AM IST
सार
बस में कुल 26 विद्यार्थी सवार हैं, इनमे रोहतक के तीन भाई-बहनों समेत 18 हरियाणा के हैं। रूस के हमले के बाद घर आने के लिए परेशान विद्यार्थियों ने यह कदम उठाया है। परिजन बच्चों से फोन पर पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।
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यूक्रेन से रोमानिया के शिवर में पहुंचे एमबीबीस के छात्र। वहां के छात्रों द्वारा उपल्बध कराया फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूक्रेन के कीव में फंसे 26 भारतीय एमबीबीएस विद्यार्थियों ने घर आने के लिए खुद रुपये जुटाकर बस किराये पर ली है। हंगरी सीमा तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए प्रति बच्चे ने 4500 रुपये के हिसाब से 1.17 लाख रुपये चुकाए हैं। इनमें रोहतक के तीन भाई-बहनों समेत 18 विद्यार्थी हरियाणा के हैं। बाकी में एक लखनऊ से, पांच दिल्ली व दो बिहार के रहने वाले हैं। वे देर रात हंगरी पहुंचेंगे। परिजन बच्चों से फोन पर पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।
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कमला नगर वासी तीनों भाई-बहन कर रहे हैं मेडिकल की पढ़ाई
यूक्रेन-रूस के बीच युद्ध के चलते देश के हजारों विद्यार्थी वहां फंसे हुए हैं। इन्हीं में रोहतक के कमला नगर निवासी प्रदीप कुमार के तीन बच्चे भी हैं। इनमें दो बेटियां व एक बेटा है। ये तीनों भाई-बहन वहां मेडिकल की पढ़ाई करने गए थे। कीव में हालात बिगड़ने पर घर आने का प्रयास कर रहे हैं।
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यूक्रेन से रोमानिया के शिवर में पहुंचे एमबीबीस के छात्र जतिन व अन्य।
इसके लिए तीनों ने दोस्तों के साथ मिलकर एक बस किराये पर ली है। बस चालक को सभी 26 विद्यार्थियाें मिलकर 4500 रुपये किराया दिया है। इसके बदले वह उन्हें कीव से हंगरी की सीमा तक पहुंचाएगा। प्रदीप कुमार ने बताया कि फोन पर बच्चों से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि कीव से हंगरी के लिए निकलने तक की दिक्कत थी।
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युद्ध क्षेत्र से बाहर आने के बाद हंगरी में अपने घर जाने के लिए फ्लाइट मिलने की आस है। इसलिए सभी हौसला कर बमबारी के बीच वहां से निकले हैं। कीव से दूर जाने के साथ युद्ध का खतरा नहीं रहेगा।
खारकी से ट्रेन में रवाना हुए दो भाई
सिंहपुरा की परमजीत हंस ने कहा कि मेरे दो भाई खारकी में मेडिकल की पढ़ाई करने गए हैं। वहां युद्ध के चलते हालात बेहद खराब हैं। इसलिए मंगलवार को ही ट्रेन से निकले हैं। पड़ोसी देश जाकर वहां से अपने घर के लिए फ्लाइट पकड़ेंगे। फोन पर भाइयों ने बताया कि खारकी में सैकड़ों विद्यार्थी फंसे हुए हैं। उन्हें निकालने की वहां कोई व्यवस्था नहीं है।
वहां खाना है न परिवहन की सुविधा। लोग जान बचाने के लिए बंकरों में घुसे हुए हैं। बाहर लगातार बमबारी हो रही है। यहीं एक भारतीय विद्यार्थी की मौत भी हो चुकी है। इसलिए लोग बाहर आने से भी डर रहे हैं। भूख के बावजूद लोग बंकर नहीं छोड़ रहे हैं। यहां इंटरनेट सुविधा भी कमजोर है। फोन पर बात भी कम हो पा रही है। इसलिए हम ट्रेन से निकल आए।
रोमानिया में दो दिन से फंसे हैं विद्यार्थी
शहर की शिव कॉलोनी में रहने वाला जतिन एमबीबीएस की पढ़ाई करने विनित्सा गया था। यहां युद्ध के चलते दो दिन पहले किसी तरह रोमानिया पहुंचा। अब यहां फंसा हुआ है। मंगलवार को फ्लाइट मिलने की आस थी। यूक्रेन में मौसम खराब हो जाने से यह भी रद्द हो गई। अब बुधवार को ही फ्लाइट की उम्मीद है।
विद्यार्थी का कहना है अपने दोस्तों के साथ बस किराये पर करके यहां तक पहुंचा। बस चालक ने भी ज्यादा किराया वसूला। यही नहीं, सीमा पर पहुंचने के बाद एक दिन यहीं खड़े रहे। हमें सीमा पार नहीं जाने दिया गया। भोजन व पानी की बड़ी दिक्कत रही। रोमानिया में प्रवेश के लिए लंबा इंतजार कराया गया। रोमानिया पहुंचने पर कुछ राहत मिली।
यहां शेल्टर में आराम करने की जगह के साथ खाना व पानी भी मिला। एंबेसी ने घर बात करने के लिए मोबाइल सिम भी दिलाया। यहां तीन बसें पहुंचीं। इनमें से एक में 53 व दो में 70-70 विद्यार्थी थे। ये सभी घर जाना चाहते हैं। इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है। सरकार फ्लाइट की व्यवस्था करे।