{"_id":"5eda9eab8ebc3e90644a56cf","slug":"250-years-ago-sehrawat-goter-people-manned-bhensru-khurd-village-rohtak-news-rtk5581465128","type":"story","status":"publish","title_hn":"250 साल पहले दिल्ली के महरौली से आकर सहरावत गोत्र के लोगों ने बसाया था भैसरू खुर्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
250 साल पहले दिल्ली के महरौली से आकर सहरावत गोत्र के लोगों ने बसाया था भैसरू खुर्द
विज्ञापन
250 years ago sehrawat goter people manned bhensru khurd village
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सांपला। यूपी से राजस्थान जाने वाले नेशनल हाईवे 334बी पर बसा रोहतक जिले का गांव भैसरू खुर्द सुख-समृद्धि की नई इबारत लिख रहा है। करीब 250 वर्ष पहले दिल्ली के महरौली से आकर सहरावत गोत्र के पूर्वजों ने इसे बसाया था। करीब 90 एकड़क्षेत्रफ ल में फैले और 4300 आबादी वाले इस गांव में आजादी के बाद पहली पंचायत का गठन 1952 में हुआ था। गांव के पहले सरपंच चदन सिंह बने थे। गांव में 36 बिरादरी के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। गांव में धार्मिक भावना भी ज्यादा है। गांव में प्रसिद्ध बाबा सोटे वाला, शिव मंदिर व सैयद पीर का मंदिर है। गांव वालों का आजीविका चलाने का मुख्य स्रोत खेती बाड़ी और दूध उत्पादन है। यह गांव रोहतक शहर से करीब 28 किलोमीटर दूर है। गांव में सभी सुविधाएं हैं। गांव में सरकारी स्कूल व प्राइवेट स्कूल छोटे बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र भी है। गिझी मार्ग पर खेल स्टेडियम भी बना है।
ब्लॉक समिति सदस्य सुभाष कुमार सिंह, रामरती, रामेशवर, रघुबीर सिंह ने बताया कि गांव में धार्मिक आस्था है। हर वर्ष गांव में बाबा सोटे वाले की याद में और शिव मंदिर में भंडारा लगाया जाता है। जिसमें पूरा गांव बढ़-चढ़ कर भाग लेता है। 87 वर्षीय रघबीर सिंह, 80 वर्षीय टाले राम ने बताया कि गांव का इतिहास करीब 250 वर्ष पुराना है। गांव में सभी लोग भाईचारे से रहते हैं। गांव के लोग पहले खेती बाड़ी पर ही निर्भर थे, लेकिन अब नौकरी व अन्य दूसरे व्यवसाय से भी अपनी आजीविका चला रहे हैं।
सरपंच राजेश कुमार का कहना है कि गांव में किसी प्रकार की समस्या नहीं है। युवाओं की खेलों में रुचि बढ़ाने के लिए हर वर्ष कुश्ती कराई जाती है। अगर गांव में कोई विवाद होता है तो उसे गांव के मौजिज लोग आपस में सुलझाने का प्रयास करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
ब्लॉक समिति सदस्य सुभाष कुमार सिंह, रामरती, रामेशवर, रघुबीर सिंह ने बताया कि गांव में धार्मिक आस्था है। हर वर्ष गांव में बाबा सोटे वाले की याद में और शिव मंदिर में भंडारा लगाया जाता है। जिसमें पूरा गांव बढ़-चढ़ कर भाग लेता है। 87 वर्षीय रघबीर सिंह, 80 वर्षीय टाले राम ने बताया कि गांव का इतिहास करीब 250 वर्ष पुराना है। गांव में सभी लोग भाईचारे से रहते हैं। गांव के लोग पहले खेती बाड़ी पर ही निर्भर थे, लेकिन अब नौकरी व अन्य दूसरे व्यवसाय से भी अपनी आजीविका चला रहे हैं।
विज्ञापन
सरपंच राजेश कुमार का कहना है कि गांव में किसी प्रकार की समस्या नहीं है। युवाओं की खेलों में रुचि बढ़ाने के लिए हर वर्ष कुश्ती कराई जाती है। अगर गांव में कोई विवाद होता है तो उसे गांव के मौजिज लोग आपस में सुलझाने का प्रयास करते हैं।
विज्ञापन