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कोर्ट की अवमानना पर थाना प्रभारी को एक माह की सजा
Updated Thu, 12 Apr 2018 01:44 AM IST
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कोर्ट की अवमानना पर थाना प्रभारी को एक माह की सजा
चरखी दादरी।
अदालत में हाजिर नहीं होने पर बाढड़ा थाना प्रभारी और पूर्व दादरी सिटी एसएचओ रहे विकास ओल्याण को अतिरिक्त सिविल जज दादरी सीनियर डिवीजन की कोर्ट ने एक माह कारावास की सजा सुनाई है। विकास को फिलहाल उच्च अदालत में अपील के लिए नौ मई तक का समय देते हुए जमानत दे दी गई है।
दादरी शहर थाने में करीब दो साल पहले एनडीपीएस एक्ट के तहत हिमांशु नामक एक युवक को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में भिवानी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीके मित्तल की अदालत ने तत्कालीन दादरी सिटी थाना प्रभारी विकास को वर्ष 2017 में चार मई, 11 मई, 15 मई, 22 मई, तीन जुलाई को कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किए थे लेकिन वे नहीं पहुंचे। इसके बाद उन्हें चार अगस्त को अपने बयान दर्ज करवाने के लिए पेश होने के आदेश जारी किए थे। अदालत द्वारा कई दफा बुलाए जाने के बाद भी गैरहाजिर रहने के कारण भिवानी कोर्ट ने आईपीसी की धारा 174 के तहत दादरी इलाका मजिस्ट्रेट होने के नाते एसीजे (एसडी) अंकिता शर्मा को अगस्त 2017 में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। न्यायाधीश अंकिता शर्मा की अदालत की ओर से भी थाना प्रभारी विकास को अपना पक्ष रखने के लिए जमानती वारंट जारी किए गए। इसके बाद भी विकास ओल्याण कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस पर अदालत द्वारा गैर जमानती वारंट जारी किए गए। नॉन बेल एबल वारंट जारी होने के बाद थाना प्रभारी 10 अप्रैल 2018 को कोर्ट में पेश हुए। एक जिम्मेदार अधिकारी होने पर भी गैर हाजिर रहने पर आईपीसी की धारा 174 के अंतर्गत अदालत ने विकास को एक माह जेल की सजा सुनाई है। थाना प्रभारी विकास को अभी उच्च अदालत में अपील के लिए 9 मई तक का समय देते हुए अंतरिम जमानत दे दी गई है।
व्यक्तिगत सुनवाई पर छह माह की सजा का प्रावधान
अगर कोई व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान कोर्ट की अवमानना करता है तो उसे छह माह तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा एक हजार रुपये जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यह भी संभव है कि कोर्ट सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगा दें। यह एक जमानती, गैर संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
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चरखी दादरी।
अदालत में हाजिर नहीं होने पर बाढड़ा थाना प्रभारी और पूर्व दादरी सिटी एसएचओ रहे विकास ओल्याण को अतिरिक्त सिविल जज दादरी सीनियर डिवीजन की कोर्ट ने एक माह कारावास की सजा सुनाई है। विकास को फिलहाल उच्च अदालत में अपील के लिए नौ मई तक का समय देते हुए जमानत दे दी गई है।
दादरी शहर थाने में करीब दो साल पहले एनडीपीएस एक्ट के तहत हिमांशु नामक एक युवक को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में भिवानी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीके मित्तल की अदालत ने तत्कालीन दादरी सिटी थाना प्रभारी विकास को वर्ष 2017 में चार मई, 11 मई, 15 मई, 22 मई, तीन जुलाई को कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किए थे लेकिन वे नहीं पहुंचे। इसके बाद उन्हें चार अगस्त को अपने बयान दर्ज करवाने के लिए पेश होने के आदेश जारी किए थे। अदालत द्वारा कई दफा बुलाए जाने के बाद भी गैरहाजिर रहने के कारण भिवानी कोर्ट ने आईपीसी की धारा 174 के तहत दादरी इलाका मजिस्ट्रेट होने के नाते एसीजे (एसडी) अंकिता शर्मा को अगस्त 2017 में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। न्यायाधीश अंकिता शर्मा की अदालत की ओर से भी थाना प्रभारी विकास को अपना पक्ष रखने के लिए जमानती वारंट जारी किए गए। इसके बाद भी विकास ओल्याण कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस पर अदालत द्वारा गैर जमानती वारंट जारी किए गए। नॉन बेल एबल वारंट जारी होने के बाद थाना प्रभारी 10 अप्रैल 2018 को कोर्ट में पेश हुए। एक जिम्मेदार अधिकारी होने पर भी गैर हाजिर रहने पर आईपीसी की धारा 174 के अंतर्गत अदालत ने विकास को एक माह जेल की सजा सुनाई है। थाना प्रभारी विकास को अभी उच्च अदालत में अपील के लिए 9 मई तक का समय देते हुए अंतरिम जमानत दे दी गई है।
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व्यक्तिगत सुनवाई पर छह माह की सजा का प्रावधान
अगर कोई व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान कोर्ट की अवमानना करता है तो उसे छह माह तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा एक हजार रुपये जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यह भी संभव है कि कोर्ट सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगा दें। यह एक जमानती, गैर संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
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