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फरवरी 2016 के दंगों का मामला
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फ्लैग : फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा का मामला
हेडिंग : शुक्रवार को कोर्ट में चार्जशीट की तैयारी
- प्रो. वीरेंद्र, मानसिंह दलाल व जयदीप धनखड़ हैं केस में आरोपी
- चुनावी साल में गरमा सकती है भाजपा व कांग्रेस के बीच फिर से सियासत
- 17 नवंबर को पुलिस की चार्जशीट थी तैयार, नहीं दाखिल कर सकी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। चुनावी साल के पहले सप्ताह में भाजपा व कांग्रेस के बीच रोहतक की सियासत फिर से गरमा सकती है। क्योंकि फरवरी 2016 के दंगों के मामले में सिविल लाइन पुलिस पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. वीरेंद्र सिंह, कांग्रेस की ग्रामीण इकाई के पूर्व जिला अध्यक्ष जयदीप धनखड़ व दलाल खाप के प्रवक्ता मानसिंह दलाल को एफआईआर में आरोपी बनाया गया था। पुलिस भी तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है, इसके लिए चार जनवरी शुक्रवार की तारीख तय की गई है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि चार्जशीट के दौरान आंदोलन के दौरान वायरल हुई 1 मिनट 23 सेकिंड की ऑडियो को मुख्य आधार बनाया गया है। आरोप है कि यह प्रो. वीरेंद्र सिंह अपने साथी जयदीप धनखड़ के मोबाइल से दलाल खाप के प्रवक्ता मानसिंह दलाल से बातचीत कर रहे थे। 17 नवंबर को सिविल लाइन थाना पुलिस ने चार्जशीट तैयार कर ली थी, लेकिन अदालत में दाखिल नहीं कर सकी थी। क्योंकि अदालत में सवाल उठा था कि कोर्ट में केवल प्रो. वीरेंद्र सिंह ही पेश हुए हैं। जयदीप व मानसिंह को अदालत में पेश होने का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद उनकी मौजूदगी में चार्जशीट दाखिल की जाए। ऐसे में मामले की आगामी तारीख 4 जनवरी तय की गई।
बता दें कि करीब 2 साल 11 माह पहले फरवरी 2016 में प्रदेश के अंदर जाट आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा था। फरवरी माह में आंदोलनकारियों ने रोहतक, सोनीपत, झज्जर सहित दूसरे एरिया में रोड जाम कर दिए। 19 फरवरी को हिंसा शुरू हो गई, जो 20 व 21 फरवरी को प्रदेश के दूसरे जिलों में भी फैल गई। इस हिंसा में न केवल दर्जनों लोग मारे गए, बल्कि बड़े पैमाने पर आगजनी हुई। इसी दौरान एक विवादित अॅाडियो वायरल हुई, जिसके आधार पर भिवानी के रिटायर्ड कैप्टन पवन ने सिविल लाइन थाना रोहतक में शिकायत दी कि दंगों को भड़काने में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. वीरेंद्र सिंह का हाथ है। इसके लिए इसी ऑडियो को आधार बनाया गया था। ऑडियो में दूसरी जगह आंदोलन शुरू कराने की बात की जा रही है। ऑडियो टेप के आधार पर पुलिस ने प्रो. वीरेंद्र के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज किया था।
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वर्जन :
पिछली तिथि पर पुलिस चालान लेकर तो पहुंची थी, लेकिन दाखिल नहीं किया। सवाल उठा था कि प्रोफेसर के साथ-साथ अगर पुलिस मान सिंह दलाल व जयदीप धनखड़ को आरोपी बनाने जा रही है तो तीनों को नोटिस भेजा जाए। ऐेसे में मामले की सुनवाई 4 जनवरी को तय की गई थी।
आरसी दलाल, वकील बचाव पक्ष।
.......
पुलिस द्वारा चार्जशीट तैयार कर ली गई थी। समय पर उसे अदालत में दाखिल कर दिया जाएगा। - रमेश कुमार, डीएसपी सिविल लाइन थाना
मेयर चुनाव में भी उठा था दंगों में हिंसा का मामला
16 दिसंबर को हुए नगर निगम मेयर के चुनाव में फरवरी 2016 के दंगों का मामला उठा था। भाजपा सरकार के मंत्रियों ने खुले मंच से कहा था कि ढाई साल पहले जो आगजनी हुई थी, उसकी तपिश आज भी लोगों के अंदर महसूस की जा रही है। कारण चाहे कुछ रहे हो, लेकिन कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी सीताराम सचदेवा हार गए थे। भाजपा ने न केवल मेयर का चुनाव जीता, बल्कि 22 में से 8 वार्डों में जीत हासिल की थी। अगर पुलिस अब अदालत में चार्जशीट दाखिल करती है तो सियासी माहौल फिर गरमा सकता है। क्योंकि कांग्रेस जहां प्रकाश आयोग की जांच को आधार मानकर भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करती रही है, जबकि भाजपा नेता व मंत्री पूर्व सीएम हुड्डा व कांग्रेस पर निशाना साधते रहे हैं।
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हेडिंग : शुक्रवार को कोर्ट में चार्जशीट की तैयारी
- प्रो. वीरेंद्र, मानसिंह दलाल व जयदीप धनखड़ हैं केस में आरोपी
- चुनावी साल में गरमा सकती है भाजपा व कांग्रेस के बीच फिर से सियासत
- 17 नवंबर को पुलिस की चार्जशीट थी तैयार, नहीं दाखिल कर सकी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। चुनावी साल के पहले सप्ताह में भाजपा व कांग्रेस के बीच रोहतक की सियासत फिर से गरमा सकती है। क्योंकि फरवरी 2016 के दंगों के मामले में सिविल लाइन पुलिस पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. वीरेंद्र सिंह, कांग्रेस की ग्रामीण इकाई के पूर्व जिला अध्यक्ष जयदीप धनखड़ व दलाल खाप के प्रवक्ता मानसिंह दलाल को एफआईआर में आरोपी बनाया गया था। पुलिस भी तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है, इसके लिए चार जनवरी शुक्रवार की तारीख तय की गई है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि चार्जशीट के दौरान आंदोलन के दौरान वायरल हुई 1 मिनट 23 सेकिंड की ऑडियो को मुख्य आधार बनाया गया है। आरोप है कि यह प्रो. वीरेंद्र सिंह अपने साथी जयदीप धनखड़ के मोबाइल से दलाल खाप के प्रवक्ता मानसिंह दलाल से बातचीत कर रहे थे। 17 नवंबर को सिविल लाइन थाना पुलिस ने चार्जशीट तैयार कर ली थी, लेकिन अदालत में दाखिल नहीं कर सकी थी। क्योंकि अदालत में सवाल उठा था कि कोर्ट में केवल प्रो. वीरेंद्र सिंह ही पेश हुए हैं। जयदीप व मानसिंह को अदालत में पेश होने का नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद उनकी मौजूदगी में चार्जशीट दाखिल की जाए। ऐसे में मामले की आगामी तारीख 4 जनवरी तय की गई।
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बता दें कि करीब 2 साल 11 माह पहले फरवरी 2016 में प्रदेश के अंदर जाट आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा था। फरवरी माह में आंदोलनकारियों ने रोहतक, सोनीपत, झज्जर सहित दूसरे एरिया में रोड जाम कर दिए। 19 फरवरी को हिंसा शुरू हो गई, जो 20 व 21 फरवरी को प्रदेश के दूसरे जिलों में भी फैल गई। इस हिंसा में न केवल दर्जनों लोग मारे गए, बल्कि बड़े पैमाने पर आगजनी हुई। इसी दौरान एक विवादित अॅाडियो वायरल हुई, जिसके आधार पर भिवानी के रिटायर्ड कैप्टन पवन ने सिविल लाइन थाना रोहतक में शिकायत दी कि दंगों को भड़काने में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. वीरेंद्र सिंह का हाथ है। इसके लिए इसी ऑडियो को आधार बनाया गया था। ऑडियो में दूसरी जगह आंदोलन शुरू कराने की बात की जा रही है। ऑडियो टेप के आधार पर पुलिस ने प्रो. वीरेंद्र के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज किया था।
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पिछली तिथि पर पुलिस चालान लेकर तो पहुंची थी, लेकिन दाखिल नहीं किया। सवाल उठा था कि प्रोफेसर के साथ-साथ अगर पुलिस मान सिंह दलाल व जयदीप धनखड़ को आरोपी बनाने जा रही है तो तीनों को नोटिस भेजा जाए। ऐेसे में मामले की सुनवाई 4 जनवरी को तय की गई थी।
आरसी दलाल, वकील बचाव पक्ष।
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पुलिस द्वारा चार्जशीट तैयार कर ली गई थी। समय पर उसे अदालत में दाखिल कर दिया जाएगा। - रमेश कुमार, डीएसपी सिविल लाइन थाना
मेयर चुनाव में भी उठा था दंगों में हिंसा का मामला
16 दिसंबर को हुए नगर निगम मेयर के चुनाव में फरवरी 2016 के दंगों का मामला उठा था। भाजपा सरकार के मंत्रियों ने खुले मंच से कहा था कि ढाई साल पहले जो आगजनी हुई थी, उसकी तपिश आज भी लोगों के अंदर महसूस की जा रही है। कारण चाहे कुछ रहे हो, लेकिन कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी सीताराम सचदेवा हार गए थे। भाजपा ने न केवल मेयर का चुनाव जीता, बल्कि 22 में से 8 वार्डों में जीत हासिल की थी। अगर पुलिस अब अदालत में चार्जशीट दाखिल करती है तो सियासी माहौल फिर गरमा सकता है। क्योंकि कांग्रेस जहां प्रकाश आयोग की जांच को आधार मानकर भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करती रही है, जबकि भाजपा नेता व मंत्री पूर्व सीएम हुड्डा व कांग्रेस पर निशाना साधते रहे हैं।