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चार साल के अनुभव पर लगाई शर्त करेंगी सबसे अधिक महिला डॉक्टरों को प्रभावित
Updated Sun, 11 Mar 2018 02:52 AM IST
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चार साल के अनुभव पर लगाई शर्त करेंगी सबसे अधिक महिला डॉक्टरों को प्रभावित
- डीएमईआर के तुगलकी फरमान के विरोध में एचएसएमटीए 15 मार्च को तय करेगा रणनीति
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने डीएमईआर की ओर से जारी निर्देशों पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रमोट होने के लिए चार साल के अनुभव की शर्तों का असर सीधे महिला डॉक्टरों पर पडे़गा। यह शर्त महिला डॉक्टरों को पीछे धकेलने के अलावा कुछ नहीं है। इसके लिए एसोसिएशन 15 मार्च को बैठक करेगी और अधिकारी के इस निर्देश के विरोध में अपनी रणनीति तैयार करेगी। वहीं महिला डॉक्टरों ने तो स्वास्थ्य अधिकारी के जारी निर्देश को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर तुगलकी फरमान करार दिया है।
एसोसिएशन के प्रधान डॉ. आरबी जैन ने इस संबंध में बताया कि सभी हैरान है कि कोई नियम नये सिरे से तो लागू किया जाता है, लेकिन बैक डेट में लागू करने का मामला पहली बार प्रकाश में आया है। सबसे बड़ी बात है कि पीजीआईएमएस के डॉक्टरों पर कोई भी फैसला सीधा सरकार या अधिकारी नहीं थौंप सकते। हेल्थ विश्वविद्यालय एक ऑटोनोमस बॉडी है, यहां कोई भी नियम बगैर एग्जीक्यूटिव काउंसिल और अकेडमिक काउंसिल में पास हुए बिना लागू नहीं हो सकता। इन सब मुद्दों को लेकर एसोसिएशन ने बैठक बुलाई है और इसमें सारी बातें तय होंगी कि उन्हें आगे क्या करना है। डॉ. जैन ने बताया कि वह इस मामले में प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से भी चर्चा करेंगे और तय करेंगे कि वह आगे क्या करें। बतौर प्रधान सभी उनसे जवाब मांग रहे हैं कि इस तरह का निर्णय उन पर क्यों थोपा जा रहा है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से जारी निर्देशों के बाद पीजीआईएमएस के डॉक्टरों में सोशल मीडिया के ग्रुप में ताबड़ तोड़ सवाल उठाए जा रहे हैं। खानपुर, मेवात, अग्रोहा, करनाल के साथ रोहतक मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों में यह मुद्दा सबसे हॉट बना हुआ है। प्रधान ने बताया कि यह निर्णय महिला डॉक्टरों के लिए अमानवीय है, यह जबरन थोपा जा रहा है।
महिला डॉक्टर क्यों उठा रही हैं सवाल
महिला डॉक्टरों की मानें तो अधिकारी जो नियम उन पर लाद रहे हैं, वह उन्हें मजबूर कर रहा है कि वह या तो अपना निजी जीवन चुने या कैरियर। क्योंकि दोनों एक साथ प्राप्त करना उनके लिए किसी चैलेंज से कम नहीं होगा। प्रदेश में डॉक्टरों की कमी है, विशेषज्ञ तो तलाशने से भी नहीं मिलते। ऐसे में इस तरह के फरमान डॉक्टरों को प्रदेश छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं। जारी नियम का असर सीधा महिला डॉक्टरों पर ही अधिक पड़ रहा है। महिला डॉक्टरों ने रोष जताते हुए बताया कि 17 से 18 की आयु में लड़कियां 12वीं करती हैं। एमबीबीएस की तैयारी करने और डॉक्टर बनने में उनकी आयु 24 से 25 वर्ष की हो जाती है। इसके बाद एमडी करने तक उनकी आयु 28 से 30 वर्ष हो जाती है। इसके बाद एक वर्ष के अनुभव के बाद वह असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन कर सकती हैं। अब नये नियम के अनुसार यदि उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर बनना है तो वह पहले तो शादी न करें और करें तो मां न बनें। क्योंकि चार साल का उनका अनुभव नियमित होना चाहिए। यह शर्त एक महिला के निजी जीवन को समस्या में डाल रहा है। क्योंकि मेडिकल साइंस 35 के बाद किसी महिला को मां बनने के लिए हाई रिस्क मानता है। कोई भी नियम किसी महिला को उसके मां बनने के अधिकार को नहीं छीन सकता।
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यह है मामला
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के निर्देशानुसार प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रमोट होने वाले और प्रमोट हो चुके डॉक्टरों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अनिवार्य किया है कि वह अपने चार साल के अनुभव के दौरान चाइल्ड केयर लीव, मैटरनिटी लीव, अर्बोशन लीव न लें। यदि उन्होंने यह ली हैं तो वह प्रमोशन के योग्य नहीं होंगे। यह पूर्व और भविष्य में भी लागू होगा।
डीएमईआर के निर्णय के विरोध में आए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
मेडिकल एंड रिसर्च एजूकेशन विभाग की ओर से महिला डाक्टरों की छुट्टियों को लेकर जारी किए पत्र को लेकर डॉक्टरों में रोष है। नये नियमों की गंभीरता को देखते हुए कल्पना चावला मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने सोमवार को इस पर बैठक बुलाई है। इसमें बैठक में आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। एसोसिएशन के सचिव डॉ. गुंजन चौधरी ने बताया कि छुट्टियों के लिए केवल डाक्टरों के लिए अलग से नियम नहीं बनाए जा सकते। मेटरनिटी लीव को लेकर सभी कर्मचारियों के नियम बने हुए हैं। इस फैसले से महिला डॉक्टर आहत हुई हैं। ये तुगलकी फरमान है। मेटरनिटी लीव लेने के बाद किसी महिला का प्रमोशन रोकना गलत है, केंद्र सरकार तो महिलाओं को सशक्त करने के लिए योजनाएं शुरू कर रही है, जबकि हरियाणा में बेतुके फैसले लिये जा रहे हैं। एसोसिएशन इस फैसले का विरोध करती है और इस मामले में सोमवार को बैठक करके आगामी रणनीति बनाई जाएगी।
पीजीआई के समाचार के साथ
सीएम विंडो की शिकायत पर बुलाया सुनवाई के लिए
पीड़ित ईशा ने बताया कि उसकी सीएम विंडो की शिकायत पर डॉ. रूप सिंह ने उसे 13 मार्च को सुबह दस बजे सुनवाई के लिए बुलाया है। इसमें उसे कहा गया है कि वह मरीज और सहायक को लेकर जांच में शामिल हो, जिनके सामने पूरा घटनाक्रम हुआ है। वह अपने साथ सारे रिकार्ड भी लेकर आए जो वह अपने साथ ले गया है। पीड़ित ने बताया कि वह अपनी बेटी को जांच में नहीं ला सकता, क्योंकि वह उपचाराधीन है। यदि वह उसे ले कर आता है तो उसे एंबुलेंस के हजारों रुपये खर्च करने पडे़ंगे। उसकी शिकायत है कि उसे आपरेशन के नाम पर आर्थिक रूप से ठगा गया है।
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चार साल के अनुभव पर लगाई शर्त करेंगी सबसे अधिक महिला डॉक्टरों को प्रभावित
- डीएमईआर के तुगलकी फरमान के विरोध में एचएसएमटीए 15 मार्च को तय करेगा रणनीति
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने डीएमईआर की ओर से जारी निर्देशों पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रमोट होने के लिए चार साल के अनुभव की शर्तों का असर सीधे महिला डॉक्टरों पर पडे़गा। यह शर्त महिला डॉक्टरों को पीछे धकेलने के अलावा कुछ नहीं है। इसके लिए एसोसिएशन 15 मार्च को बैठक करेगी और अधिकारी के इस निर्देश के विरोध में अपनी रणनीति तैयार करेगी। वहीं महिला डॉक्टरों ने तो स्वास्थ्य अधिकारी के जारी निर्देश को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर तुगलकी फरमान करार दिया है।
एसोसिएशन के प्रधान डॉ. आरबी जैन ने इस संबंध में बताया कि सभी हैरान है कि कोई नियम नये सिरे से तो लागू किया जाता है, लेकिन बैक डेट में लागू करने का मामला पहली बार प्रकाश में आया है। सबसे बड़ी बात है कि पीजीआईएमएस के डॉक्टरों पर कोई भी फैसला सीधा सरकार या अधिकारी नहीं थौंप सकते। हेल्थ विश्वविद्यालय एक ऑटोनोमस बॉडी है, यहां कोई भी नियम बगैर एग्जीक्यूटिव काउंसिल और अकेडमिक काउंसिल में पास हुए बिना लागू नहीं हो सकता। इन सब मुद्दों को लेकर एसोसिएशन ने बैठक बुलाई है और इसमें सारी बातें तय होंगी कि उन्हें आगे क्या करना है। डॉ. जैन ने बताया कि वह इस मामले में प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से भी चर्चा करेंगे और तय करेंगे कि वह आगे क्या करें। बतौर प्रधान सभी उनसे जवाब मांग रहे हैं कि इस तरह का निर्णय उन पर क्यों थोपा जा रहा है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से जारी निर्देशों के बाद पीजीआईएमएस के डॉक्टरों में सोशल मीडिया के ग्रुप में ताबड़ तोड़ सवाल उठाए जा रहे हैं। खानपुर, मेवात, अग्रोहा, करनाल के साथ रोहतक मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों में यह मुद्दा सबसे हॉट बना हुआ है। प्रधान ने बताया कि यह निर्णय महिला डॉक्टरों के लिए अमानवीय है, यह जबरन थोपा जा रहा है।
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महिला डॉक्टर क्यों उठा रही हैं सवाल
महिला डॉक्टरों की मानें तो अधिकारी जो नियम उन पर लाद रहे हैं, वह उन्हें मजबूर कर रहा है कि वह या तो अपना निजी जीवन चुने या कैरियर। क्योंकि दोनों एक साथ प्राप्त करना उनके लिए किसी चैलेंज से कम नहीं होगा। प्रदेश में डॉक्टरों की कमी है, विशेषज्ञ तो तलाशने से भी नहीं मिलते। ऐसे में इस तरह के फरमान डॉक्टरों को प्रदेश छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं। जारी नियम का असर सीधा महिला डॉक्टरों पर ही अधिक पड़ रहा है। महिला डॉक्टरों ने रोष जताते हुए बताया कि 17 से 18 की आयु में लड़कियां 12वीं करती हैं। एमबीबीएस की तैयारी करने और डॉक्टर बनने में उनकी आयु 24 से 25 वर्ष की हो जाती है। इसके बाद एमडी करने तक उनकी आयु 28 से 30 वर्ष हो जाती है। इसके बाद एक वर्ष के अनुभव के बाद वह असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन कर सकती हैं। अब नये नियम के अनुसार यदि उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर बनना है तो वह पहले तो शादी न करें और करें तो मां न बनें। क्योंकि चार साल का उनका अनुभव नियमित होना चाहिए। यह शर्त एक महिला के निजी जीवन को समस्या में डाल रहा है। क्योंकि मेडिकल साइंस 35 के बाद किसी महिला को मां बनने के लिए हाई रिस्क मानता है। कोई भी नियम किसी महिला को उसके मां बनने के अधिकार को नहीं छीन सकता।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के निर्देशानुसार प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रमोट होने वाले और प्रमोट हो चुके डॉक्टरों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अनिवार्य किया है कि वह अपने चार साल के अनुभव के दौरान चाइल्ड केयर लीव, मैटरनिटी लीव, अर्बोशन लीव न लें। यदि उन्होंने यह ली हैं तो वह प्रमोशन के योग्य नहीं होंगे। यह पूर्व और भविष्य में भी लागू होगा।
डीएमईआर के निर्णय के विरोध में आए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
मेडिकल एंड रिसर्च एजूकेशन विभाग की ओर से महिला डाक्टरों की छुट्टियों को लेकर जारी किए पत्र को लेकर डॉक्टरों में रोष है। नये नियमों की गंभीरता को देखते हुए कल्पना चावला मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने सोमवार को इस पर बैठक बुलाई है। इसमें बैठक में आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। एसोसिएशन के सचिव डॉ. गुंजन चौधरी ने बताया कि छुट्टियों के लिए केवल डाक्टरों के लिए अलग से नियम नहीं बनाए जा सकते। मेटरनिटी लीव को लेकर सभी कर्मचारियों के नियम बने हुए हैं। इस फैसले से महिला डॉक्टर आहत हुई हैं। ये तुगलकी फरमान है। मेटरनिटी लीव लेने के बाद किसी महिला का प्रमोशन रोकना गलत है, केंद्र सरकार तो महिलाओं को सशक्त करने के लिए योजनाएं शुरू कर रही है, जबकि हरियाणा में बेतुके फैसले लिये जा रहे हैं। एसोसिएशन इस फैसले का विरोध करती है और इस मामले में सोमवार को बैठक करके आगामी रणनीति बनाई जाएगी।
पीजीआई के समाचार के साथ
सीएम विंडो की शिकायत पर बुलाया सुनवाई के लिए
पीड़ित ईशा ने बताया कि उसकी सीएम विंडो की शिकायत पर डॉ. रूप सिंह ने उसे 13 मार्च को सुबह दस बजे सुनवाई के लिए बुलाया है। इसमें उसे कहा गया है कि वह मरीज और सहायक को लेकर जांच में शामिल हो, जिनके सामने पूरा घटनाक्रम हुआ है। वह अपने साथ सारे रिकार्ड भी लेकर आए जो वह अपने साथ ले गया है। पीड़ित ने बताया कि वह अपनी बेटी को जांच में नहीं ला सकता, क्योंकि वह उपचाराधीन है। यदि वह उसे ले कर आता है तो उसे एंबुलेंस के हजारों रुपये खर्च करने पडे़ंगे। उसकी शिकायत है कि उसे आपरेशन के नाम पर आर्थिक रूप से ठगा गया है।