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भाजपा के सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ने विधानसभा चुनाव से पहले रोहतक में कांग्रेस को दिया एक और झटका

Mon, 17 Jun 2019 02:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jun 2019 02:16 AM IST
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भाजपा के सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ने विधानसभा चुनाव से पहले रोहतक में कांग्रेस को दिया एक और झटका
रोहतक। पांच साल से भाजपा के हाथों झटके खा रही कांग्रेस को विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा झटका लगा है। रविवार को जब कांग्रेस के पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा रोहतक में लोकसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में विस चुनाव के लिए जोश भरने का प्रयास कर रहे थे, ठीक उसी समय जींद में रोहतक नगर निगम की पूर्व मेयर एवं महिला कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष रेनू डाबला भाजपा में शामिल हो गई। सीएम मनोहर लाल ने उन्हें सदस्यता दिलाते हुए पूरा मान-सम्मान देने की बात कही। बता दें कि रेनू डाबला हुड्डा परिवार की करीबी रही हैं। उन्होंने 2013 में एएनएम की नौकरी छोड़कर निगम का चुनाव लड़ा और विजयी रही। इसके बाद उन्होंने सर्वसम्मति से मेयर बनाया गया।
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याद रहे कि अक्तूबर 2014 में हुए विधानसभा चुनाव भाजपा प्रत्याशी मनीष ग्रोवर ने तीन हार की हैट्रिक को पीछे छोड़ते हुए कांग्रेस के भारत भूषण बतरा को शिकस्त दी। साथ ही केंद्र के बाद राज्य में भी भाजपा की सरकार बनी। बदलने हालात में नगर निगम मेयर चुनाव में भी ग्रोवर के नेतृत्व में भाजपा कांग्रेस को शिकस्त देने में कामयाब रही। फिर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका लगा, जब जीत की हैट्रिक लगा चुके कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा रोहतक से ही चुनाव हार गए। अब कांग्रेस समर्थक पूर्व मेयर एवं पूर्व महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष रेनू डाबला ने भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। खास बात यह रही थी कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा डाबला के बूथ से हार गए थे। बदले हालात में डाबला ने पाला बदलने में भलाई समझी।
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कलानौर से मांग रही थी डाबला विधायक की टिकट
रेनू डाबला पांच साल 2013 से 2018 तक नगर निगम की पहली मेयर रही। अब वे कलानौर हलके से विधानसभा चुनाव की टिकट मांग रही थी। कलानौर से कांग्रेस की शकुंतला खटक विधायक हैं। सियासी सूत्रों का कहना है कि एक तो लोकसभा चुनाव में कलानौर हलके से खुद दीपेंद्र हुड्डा पीछे रह गए। दूसरा, खटक के आगे उनको विस चुनाव की टिकट मिलने की संभावना कम ही थी। क्योंकि उनके बूथ पर ही दीपेंद्र पीछे रह गए थे। दूसरा डाबला पर फर्नीचर मामले में भी कार्रवाई की तलवार लटक रही थी। क्योंकि विजिलेंस ने नगर निगम की 2014 में हुई करीब 18 लाख की फर्नीचर खरीद मामले में डाबला के साथ, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा व डिप्टी मेयर अशोक भाटी को अनियमितता के लिए जिम्मेदार बताया था। फाइल लंबे समय से चंडीगढ़ शहरी निकाय विभाग कार्यालय में अटकी रही। अब कार्रवाई की संभावना नहीं है।
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रेनू डाबला के ससुर आजाद डाबला पुराने कांग्रेसी हैं। हुड्डा परिवार से उनका करीबी रिश्ता रहा है। रेनू का मायका मोखरा गांव में हैं। 2013 में नगर निगम के पहले चुनाव से पहले उन्होंने एएनएम की नौकरी छोड़कर नगर निगम पार्षद का तत्कालीन वार्ड नंबर 4 से लड़ा और विजयी रही। उस समय मेयर का पद एससी वर्ग की महिला के लिए आरक्षित था। ऐसे में डाबला के अलावा वार्ड 2 से ममता रानी, 3 से सुशीला इंदौरा और 18 से पूनम किलोई भी मेयर की दौड़ में थी। कांग्रेस के तत्कालीन विधायक बीबी बतरा की मौजूदगी में कांग्रेस समर्थक पार्षदों की मीटिंग हुई और रेनू डाबला को सर्वसम्मति से मेयर बनाया गया।
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