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डॉ. अंबेडकर ने अपने कायोऱं् से बनाई विशेष पहचान
Updated Thu, 07 Dec 2017 03:01 AM IST
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डॉ. अंबेडकर ने अपने कार्यों से बनाई विशेष पहचान : डॉ. विजय कायत
- बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में पहुंचे चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
आपसी भाईचारा, प्यार और एकत्व की भावना ही उसके समृद्ध लोकतंत्र की परिचायक हो सकती है। डॉ. भीमराम अंबेडकर ने अपने कार्यों द्वारा पूरे विश्व में पहचान बनाई। यह बात चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय कायत ने बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
उन्होंने कहा कि महिलाओं और दलितों के उत्थान के रूप में बाबा साहेब के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। वह सदैव मानव मूल्यों की प्रतिष्ठा और उसकी समाज में स्थापना के लिए अग्रणी रहे। राष्ट्र के प्रति, समाज के प्रति उनके अगाध प्रेम को बड़ी आसानी से समझा जा सकता है। डॉ. अंबेडकर को अपने वास्तविक नाम की बजाय गुरु के नाम से भी जाना जाता है। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मारकंडे आहूजा ने कहा कि सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण स्वयं बाबा मस्तनाथ मठ है। इस मठ के अनुयायी बिना किसी भेदभाव के आते हैं। इससे पूर्व सभी ने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि देते हुए पुष्प अर्पित किए। इस मौके पर उप कुलपति डॉ. अंजू आहूजा भी मौजूद रही।
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डॉ. अंबेडकर ने अपने कार्यों से बनाई विशेष पहचान : डॉ. विजय कायत
- बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में पहुंचे चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
आपसी भाईचारा, प्यार और एकत्व की भावना ही उसके समृद्ध लोकतंत्र की परिचायक हो सकती है। डॉ. भीमराम अंबेडकर ने अपने कार्यों द्वारा पूरे विश्व में पहचान बनाई। यह बात चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय कायत ने बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
उन्होंने कहा कि महिलाओं और दलितों के उत्थान के रूप में बाबा साहेब के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। वह सदैव मानव मूल्यों की प्रतिष्ठा और उसकी समाज में स्थापना के लिए अग्रणी रहे। राष्ट्र के प्रति, समाज के प्रति उनके अगाध प्रेम को बड़ी आसानी से समझा जा सकता है। डॉ. अंबेडकर को अपने वास्तविक नाम की बजाय गुरु के नाम से भी जाना जाता है। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मारकंडे आहूजा ने कहा कि सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण स्वयं बाबा मस्तनाथ मठ है। इस मठ के अनुयायी बिना किसी भेदभाव के आते हैं। इससे पूर्व सभी ने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि देते हुए पुष्प अर्पित किए। इस मौके पर उप कुलपति डॉ. अंजू आहूजा भी मौजूद रही।
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